महाराष्ट्र सरकार के साथ बैठक में नहीं निकला कोई हल, जारी रहेगी ASHA वर्कर्स की हड़ताल
मुंबई, 17 जून। कोरोना वायरस संकट के बीच महाराष्ट्र में लगातार तीसरे दिन भी लगभग 70,000 एक्रेडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट्स (आशा) वर्कर्स की हड़ताल जारी रही है। आशा कार्यकर्ताओं की मांग है कि कोरोना काल में उनका वेतन बढ़ाने जाए, साथ ही उन्हें श्रमिक के तौर पर दर्जा दिया जाए और दूसरी सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिले। आशा वर्कर्स की हड़ताल के चलते राज्य सरकार की मुश्किल बढ़ गई है जिसके बाद आज (गुरुवार) महत्वपूर्ण बैठक की गई।

आशा वर्कर्स एक्शन कमेटी के अध्यक्ष के साथ हुई महाराष्ट्र सरकार की इस बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल पाने की सूरत में एक्रेडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट्स वर्कर्स ने अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है। बैठक के बाद आशा कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि राज्य सरकार ने उनके मानदेय में इस आधार पर वृद्धि करने से इनकार कर दिया है कि वे आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। बता दें कि वर्तमान में आशा कार्यकर्ताओं को प्रति माह लगभग वेतन के रूप में 6,000 रुपए मिलते हैं, जिसमें केंद्र से कोविड भत्ता के रूप में 1000 रुपए शामिल है।
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आशा कार्यकर्ताओं की मां है कि उनका वेतन बढ़ाकर 18,000 रुपए किया जाना चाहिए। स्टेट आशा वर्कर्स एक्शन कमेटी के अध्यक्ष एमए पाटिल ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे के साथ बैठक की और मांगों को दोहराया। एमए पाटिल ने बैठक के बाद मीडिया को बताते हुए कहा, हमने राज्य सरकार से मानदेय बढ़ाने को कहा, स्वास्थ्य मंत्री ने भी स्वीकार किया कि हमारे द्वारा की गई मांग वाजिब है और आशा कार्यकर्ताओं को हो रही कठिनाई के प्रति सहानुभूति व्यक्त की। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वे वित्तीय संकट के कारण महाराष्ट्र सरकार आर्थिक बोझ बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं।












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