महाराष्ट्र सरकार में अजित पवार की 'धमक' से शिंदे गुट में खलबली, मंत्रियों ने सीएम से सीधी नाराजगी जताई
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की सियासत में रविवार का दिन काफी अहम रहा। एनसीपी चीफ शरद पवार के भतीजे और पार्टी के दिग्गज नेता अजित पवार अपने साथ विधायक को लेकर महाराष्ट्र की शिवसेवा-बीजेपी सरकार में शामिल हो गए।
हालांकि सामने से तो सरकार और भाजपा की ताकत बढ़ी है, लेकिन पर्दे के पीछे एकनाथ शिंदे खेमे में एक अशांति सा माहौल भी है। क्योंकि हालिया मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पहले से तैयार पोर्टफोलियो धरा की धरा रह गया।

दरअसल, महाराष्ट्र सरकार में अजित पवार की उप मुख्यमंत्री और उनके साथ 8 मंत्रियों की एंट्री के बाद शिंदे गुट के खेमे में बेचैनी बढ़ गई है। सोमवार को शिंदे गुट के सभी मंत्रियों ने मुख्यमंत्री के ठाणे स्थित निजी आवास पर मुलाकात की, जहां अजित पवार और उनके विधायकों को सरकार में शामिल करने के कदम पर अपनी नाराजगी भी जताई।
सीएम एकनाथ शिंदे से मुलाकात करने वालों में कैबिनेट मंत्री उदय सामंत, गुलाबराव पाटिल, शंभूराज देसाई के साथ पार्टी नेता दादा भुसे, संदीपन भुमरे मौजूद थे। सभी लोगों ने एक छोटी बैठक में आगानी कैबिनेट विस्तार के तहत विभागों के संभावित बंटवारे पर चर्चा की।
गलत नहीं शिंदे खेमे की अशांति
वैसे देखा जाए तो अजित पवार की एंट्री से शिंदे खेमे में बढ़ी बेचैनी गलत नहीं है। क्योंकि एक तरफ जहां शिवसेना और बीजेपी दोनों ही दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट कर आगामी चुनावों के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। वहीं एक साथ 9 लोगों का सरकार के अंदर आना बाकी नेताओं की परेशानी बढ़ा रहा है।
अजित की एंट्री से बदले समीकरण
बता दें कि शिंदे-फडणवीस सरकार को 30 जून को ही एक साल पूरा हुआ था। दूसरी तरफ 23 कैबिनेट पद अभी भी खाली हैं, लेकिन अब अजित पवार के आने से सारे समीकरण बदल गए, क्योंकि अजित पवार नहीं होते तो साफ तौर पर कैबिनेट विस्तार भाजपा-शिवसेना के बीच होता, जो अब इस प्रकरण के बाद काफी बदल चुका है।
हाल ही में महाराष्ट्र कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज थी। जिसे लेकर सीएम मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़नवीस 29 जून को दिल्ली पहुंचे थे। खबरों के अनुसार भाजपा के शीर्ष नेता के साथ बैठक में पोर्टफोलियो को भी अंतिम रूप दे दिया गया था।
20 पहले और 9 की अब दस्तक
मालूम हो कि अजित पवार के सरकार में शामिल होने से पहले महाराष्ट्र कैबिनेट में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित केवल 20 मंत्री थे, जो ज्यादा से ज्यादा 43 हो सकते हैं, लेकिन एनसीपी के 9 मंत्रियों के आने से सारी तस्वीर बदल चुकी है।












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