Mumbai Water Crisis: मुंबई पर गहराया जल संकट, मानसून की देरी ने बढ़ाई चिंता, 7 झीलों में कितना बचा है पानी?
Mumbai Water Crisis: मुंबई एक बार फिर गंभीर जल संकट के मुहाने पर खड़ी दिखाई दे रही है। बृहद मुंबई महानगरपालिका (BMC) के ताजा आंकड़ें चिंता बढ़ाने वाले हैं। शहर को पानी उपलब्ध कराने वाली सात झीलों में अब केवल 40 दिनों के लिए पानी शेष बचा है।
मानसून के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचने और बारिश की कमी के कारण मुंबई की झीलों और जलाशयों में जलस्तर लगातार गिर रहा है। ऐसे में बीएमसी ने स्थिति पर कड़ी नजर रखते हुए पहले ही जलापूर्ति में कटौती लागू कर दी है।

7 झीलों में घट गया जल का भंडार
बीएमसी के अनुसार, मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाली तानसा, विहार, तुलसी, भातसा, अपर वैतरणा, मोडक सागर और मिडिल वैतरणा झीलों में कुल जल भंडार घटकर 1,55,167 मिलियन लीटर रह गया है। यह इन झीलों की कुल क्षमता का मात्र 10.72 प्रतिशत है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बेहतर है, लेकिन मानसून में हो रही देरी ने प्रशासन और नागरिकों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
क्यों घट रहा झीलों का जल स्तर?
बीएमसी के मुताबिक, वर्ष 2026 में अब तक तानसा झील का जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) में केवल 13 मिमी और मोडक सागर क्षेत्र में 7 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यानी वो इलाका है जहां गिरने वाला बारिश का पानी ढलान के जरिए बहकर इकट्ठा होता है और अंततः उस झील में पहुंचता है। इसे 'जल ग्रहण क्षेत्र' भी कहा जाता है। अन्य झीलों के कैचमेंट क्षेत्रों में अभी तक एक बूंद भी बारिश नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण है कि मौजूदा जल भंडार तेजी से कम हो रहा है।
फिर क्यों बरती जा रही सतर्कता
दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा जल भंडार पिछले साल की तुलना में अधिक है। पिछले वर्ष इसी दिन सातों झीलों में 1,25,824 मिलियन लीटर यानी 8.69 प्रतिशत पानी उपलब्ध था, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा मात्र 78,889 मिलियन लीटर या 5.45 प्रतिशत था। इसके बावजूद बीएमसी किसी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहती और एहतियाती कदम उठा रही है।
रोजाना की जा रही 10% कटौती
मुंबई की आबादी और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए बीएमसी प्रतिदिन लगभग 3950 मिलियन लीटर पानी (एमएलडी) की आपूर्ति करती है। जल भंडार में लगातार गिरावट को देखते हुए 15 मई से 10 प्रतिशत जल कटौती लागू कर दी गई है। इसके तहत दैनिक जलापूर्ति को लगभग 3950-4100 एमएलडी से घटाकर करीब 3650 एमएलडी कर दिया गया है।
एल नीनो के प्रभाव और कमजोर मानसून की चेतावनी
बीएमसी का यह फैसला भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की उस चेतावनी के बाद लिया गया था, जिसमें एल नीनो के प्रभाव के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहने और सामान्य से लगभग 90 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना जताई गई थी। गौरतलब है कि मुंबई में औसतन हर वर्ष करीब 2300 मिमी बारिश होती है, जो शहर के जल स्रोतों को भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
15 मई को झीलों में था 23.12 प्रतिशत पानी
बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, 15 मई को सातों झीलों में कुल 3,34,643 मिलियन लीटर पानी उपलब्ध था, जो उनकी कुल क्षमता का 23.12 प्रतिशत था। मात्र कुछ सप्ताह के भीतर यह स्तर घटकर 10.72 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जिससे जल संकट की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मानसून पर टिकी मुंबई की उम्मीदें
मुंबई की करोड़ों आबादी की निगाहें अब मानसून की पहली जोरदार बारिश पर टिकी हैं। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं होती है, तो बीएमसी को जल कटौती और सख्त करनी पड़ सकती है। फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन जल भंडार में लगातार गिरावट शहर के लिए चेतावनी का संकेत मानी जा रही है।












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