Mumbai AQI Today: मुंबई में साफ आसमान के बावजूद स्मॉग की मार, क्यों खराब हुई शहर की AQI?
Mumbai AQI Today: मुंबई की सुबह हमेशा से अपनी खास रौनक के लिए जानी जाती है। सूरज की हल्की किरणें, अरब सागर की ठंडी हवा और सड़कों पर शुरू होती भागदौड़। लेकिन इस बार शहर की यह खूबसूरती एक धुंधली परत के पीछे कहीं छिप सी गई है। बुधवार की सुबह जब लोग घरों से बाहर निकले, तो साफ नीले आसमान के बावजूद हवा में फैला स्मॉग उन्हें महसूस करा गया कि मुंबई का सर्दी का मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा।
मौसम विभाग ने भले ही तापमान को राहत देने वाला बताया हो, लेकिन हवा में घुला प्रदूषण उस राहत को बेअसर कर रहा है। बढ़ते निर्माण कार्य, ट्रैफिक और औद्योगिक गतिविधियों ने हवा की गुणवत्ता को इतना खराब कर दिया है कि सामान्य दिन भी अब भारी लगने लगे हैं। ऐसे में हर सुबह शहर की खूबसूरती के साथ एक चिंता भी उठती है-क्या मुंबई फिर से साफ हवा में सांस ले पाएगी?

शहर का AQI खराब श्रेणी में
एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म AQI.in के मुताबिक, बुधवार सुबह मुंबई का औसत AQI 139 दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है। यह नवंबर और दिसंबर की शुरुआत में दर्ज हुए बेहद खतरनाक स्तरों से बेहतर जरूर है, लेकिन अब भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता। डॉक्टरों के मुताबिक इस स्तर की हवा में भी बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को परेशानी हो सकती है।
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वडाला और एयरपोर्ट बने सबसे प्रदूषित हॉटस्पॉट
शहर के कुछ इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर है। वडाला ट्रक टर्मिनल का AQI 346 दर्ज हुआ, जो 'खतरनाक' श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस स्तर की हवा लंबे समय तक रहने पर आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
मुंबई एयरपोर्ट का AQI भी 213 दर्ज हुआ, जो 'अनहेल्दी' कैटेगिरी में आता है। यहां दिनभर उड़ानों का दबाव और आसपास का घना ट्रैफिक प्रदूषण को और बढ़ाता है। इनके अलावा देवनार (AQI 180), चेंबूर (177), कुर्ला (177) और वर्ली (173) जैसे इलाके लगातार खराब हवा से जूझ रहे हैं। इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां, ट्रैफिक और निर्माण कार्य प्रदूषण का बड़ा कारण बने हुए हैं।
उपनगरीय इलाकों में थोड़ी राहत, लेकिन चिंता बनी हुई
उपनगरीय इलाकों की हवा थोड़ी बेहतर रही, लेकिन पूरी तरह साफ नहीं। चर्कोप (73), जोगेश्वरी ईस्ट (78), कांदिवली ईस्ट (82), गोवंडी (83) और मुलुंड वेस्ट (100) 'मॉडरेट' श्रेणी में रहे। 'मॉडरेट' स्तर पर भी प्रदूषण संवेदनशील लोगों को प्रभावित कर सकता है।
निर्माण कार्य बना प्रदूषण का बड़ा कारण
मुंबई इन दिनों एक विशाल निर्माण केंद्र में बदल चुकी है। मेट्रो कॉरिडोर, रोड-वाइडनिंग, ब्रिज निर्माण और बड़े निजी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के चलते शहर भर में भारी मात्रा में धूल उड़ रही है। इसी कारण सर्दी के मौसम में प्रदूषण और ज्यादा महसूस हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर निर्माण स्थलों पर कवरिंग और वाटर स्प्रे की प्रक्रिया कड़ाई से लागू की जाए तो धूल काफी कम हो सकती है।
बीएमसी अब लेगी कड़ा एक्शन
नए अतिरिक्त नगर आयुक्त अविनाश ढाकने ने संकेत दिए हैं कि निर्माण कंपनियों पर अब पहले से ज्यादा सख्ती होगी। उन्होंने कहा कि जो साइट नोटिस मिलने के बाद भी नियमों का पालन नहीं कर रही हैं,उन पर भारी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। बीएमसी का मानना है कि लगातार चल रहे बड़े प्रोजेक्ट्स के चलते प्रदूषण को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बन गया है और इसके लिए कड़े कदम जरूरी हैं।
AQI स्तर और उनका असर
- 101-150 : खराब (Poor) - सांस और आंखों में हल्की परेशानी
- 151-200 : अनहेल्दी - संवेदनशील लोगों के लिए अधिक जोखिम
- 200 से ऊपर : खतरनाक (Hazardous) - सभी लोगों के लिए स्वास्थ्य खतरा
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