Mumbai Metro News Update: मेट्रो लाइन-3 के नाम जुड़ गया एक अनचाहा रिकॉर्ड, सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई नाराजगी
Mumbai Metro News Update: मुंबई की मेट्रो लाइन-3 (एक्वा लाइन) परियोजना से एक अनचाहा विवाद जुड़ गया है। इस लाइन को बनाते वक्त काफी संख्या में पेड़ों की कटाई हुई थी। मेट्रो प्रशासन ने उसी अनुपात में पेड़ लगाने और पर्यावरण संरक्षण के दावे भी किए थे। हालांकि, इन दावों की हकीकत अब सामने आ गई है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना के लिए जिन पेड़ों को काटा गया और उनकी जगह नए पेड़ लगाए गए उनमें से ज्यादातर सूख गए हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी नाराजगी जताई है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हालात इतने गंभीर हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की नए पेड़ लगाने की कोशिशों को बेहद खराब और असंतोषजनक करारा दिया है। 33.5 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन-3 के निर्माण के लिए कुल 4,941 पेड़ काटे गए थे।

Mumbai Metro News Update: पेड़-पौधों की नहीं हुई सही देखभाल
- काटे गए 2,800 पेड़ मेट्रो स्टेशन स्थलों पर और 2,141 पेड़ आरे कॉलोनी में बनाए गए कार डिपो के लिए हटाए गए थे।
- इसके बदले मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL) ने दावा किया कि 1,643 बड़े पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन किया गया और 20,460 पौधे वन अभियान के तहत लगाए गए।
Mumbai Metro News: सूखे ठूंठ में बदले हजारों पेड़
- रिपोर्ट के मुताबिक जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट है। आरे कॉलोनी में किए गए निरीक्षण में पाया गया कि ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों में से सिर्फ 35% ही जीवित बचे हैं।
- लगाए गए पौधों में भी केवल करीब 50% का ही अस्तित्व बचा है। कई जगह पेड़ सूखे ठूंठ में बदल चुके हैं, छाल उखड़ चुकी है और फंगल संक्रमण साफ नजर आता है।
- पौधारोपण स्थलों पर मुरझाए पौधे, खाली गड्ढे और निर्माण मलबे के नीचे दबे पौधे दिखाई दिए।
Mumbai Metro Update: सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण कार्यकर्ताओं की ओर से जारी याचिका पर सुनवाई करते हुए नाराजगी जाहिर की थी। पेड़ों की कटाई और वृक्षारोपण की दुर्दशा के तथ्यों के आधार पर कड़ी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पर्यावरण संरक्षण को सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। मेट्रो लाइन-3 का मामला अब राज्य की विकास योजनाओं में हरियाली को लेकर एक बड़े सवाल के रूप में खड़ा हो गया है।
बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से गठित एक समिति ने 2019 से लगातार निरीक्षण कर यह भी पाया कि समय के साथ इन पेड़ों की स्थिति और खराब हुई थी। जनवरी 2018 में जहां 42% ट्रांसप्लांटेड पेड़ मर चुके थे, वहीं नवंबर 2019 तक यह आंकड़ा 61% तक पहुंच गया। 2020 में MMRDA के एक सर्वे में सिर्फ 543 पेड़ों के जीवित होने की पुष्टि हुई। समिति की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सीएसटी, सिद्धिविनायक, विद्यानगरी और MIDC जैसे प्रमुख इलाकों में भी सूखे पेड़ों की संख्या काफी ज्यादा है।
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