महाराष्ट्र में मराठा-ओबीसी आरक्षण आंदोलन से गहरा रहा विवाद, चुनावों में किसकी बढ़ेगी सिरदर्दी?

महाराष्ट्र में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा बहुत ही खतरनाक शक्ल अख्तियार करता जा रहा है। पहले मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अनशन और आंदोलन चलाया गया तो अब उसके जवाब में ओबीसी कोटा को बचाने के नाम पर आंदोलन शुरू है।

महाराष्ट्र के जालना के वाडिगोद्री गांव में ओबीसी आरक्षण से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने की मांग को लेकर लक्ष्मण हाके और नवनाथ वाघमारे जैसे ओबीसी कार्यकर्ता पिछले 8 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं।

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सीएम शिंदे ने दिया ओबीसी आरक्षण को नहीं छूने का भरोसा
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उन्हें भरोसा दिया है कि ओबीसी कोटा को छुआ भी नहीं जाएगा। सीएम शिंदे ने आंदोलनकारियों को यह भरोसा तब दिया, जब कांग्रेस के नेता और महाराष्ट्र सदन में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने सीधे अनशन स्थल से मुख्यमंत्री को फोन लगा दिया और उसे स्पीकर पर रखकर माइक के सामने रख दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री शिंदे सार्वजनिक रूप से कहते हुए सुने गए कि 'हमने ओबीसी आरक्षण को अछूता रखने का ध्यान रखा है।'

मराठा आंदोलन की वजह से महायुति को हुआ नुकसान
लोकसभा चुनावों में मराठा समुदाय की नाराजगी बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति गठबंधन पर बहुत भारी पड़ी है, जो अपने समुदाय को ओबीसी में शामिल करने की वकालत कर रहे हैं, ताकि उन्हें आरक्षण का लाभ मिल सके।

अनशन पर बैठे ओबीसी कार्यकर्ताओं से मिलीं पंकजा मुंडे
इसकी चपेट में भाजपा नेता पंकजा मुंडे भी आई हैं, जो मराठवाड़ा के बीड से चुनाव हार गईं। कहा जा रहा है कि वहां मराठा और ओबीसी वोटरों में ध्रुवीकरण की वजह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। पंकजा मुंडे खुद ओबीसी समाज से आती हैं।

सीएम की ओर से लक्ष्मण हाके और नवनाथ वाघमारे को आश्वासन दिए जाने से पहले मुंडे भी उनसे मिल चुकी थीं। उन्होंने अपनी ही सरकार से मांग की है कि वह सार्वजनिक रूप से घोषणा करे कि मराठा समुदाय को ओबीसी आरक्षण कोटा में नहीं शामिल किया जाएगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री के अलावा उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार से मांग की थी कि ओबीसी कार्यकर्ताओं की बातें सुनें, जो लगातार मांग कर रहे हैं कि सरकार लिखित भरोसा दे कि ओबीसी कोटा को हाथ नहीं लगाया जाएगा।

मराठा आंदोलनकारी के निशाने पर है राज्य सरकार
इससे पहले राज्य के मंत्री गिरिश महाजन भी कह चुके हैं कि मराठा समुदाय को ओबीसी कोटा से आरक्षण देना असंभव है। उधर मराठा आरक्षण आंदोलन के अगुवा मनोज जारांगे ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह मराठा और ओबीसी समुदाय के बीच विवाद पैदा कर रही है।

उनका दावा है कि मराठाओं को आरक्षण न मिले इसकी साजिश रची जा रही है। जारांगे का कहना है,'आजादी से पहले से मराठा ओबीसी कैटेगरी के तहत आते हैं। हमारा आरक्षण कानूनी और फुल-प्रूफ है।'

प्रकाश अंबेडकर ने बदला रुख!
दिलचस्प बात ये है कि बदली हुई परिस्थितियों में वंचित बहुजन अघाड़ी के प्रमुख प्रकाश अंबेडकर भी हाके और वाघमेरे के अनशन स्थल का दौरा कर आए हैं। अंबेडकर हाल तक जारांगे के मराठा आरक्षण का समर्थन करते आ रहे थे। लेकिन, अब कहने लगे हैं कि अगर सरकार मराठा समुदाय को आरक्षण देना चाहती है तो यह ओबीसी को मिले मौजूदा कोटा से अलग होना चाहिए।

माना जा रहा है कि राज्य की महायुति सरकार से मराठाओं की नाराजगी का फायदा लोकसभा चुनावों में खासकर मराठवाड़ा क्षेत्र में विपक्षी महा विकास अघाड़ी को मिला है। ऐसे में बदले समीकरणों में अक्टूबर में होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में किसे इसका फायदा मिलेगा और कौन नुकसान में रहेगा, यह बड़ा सवाल है।

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