मराठा आंदोलन: लीक क्लिप को सीएम शिंदे ने बताया एडिटेड, कहा- हम आरक्षण पर गंभीर
महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन के मुद्दे ने फिर से तूल पकड़ लिया है। इसको लेकर सरकार ने सर्वदलीय बैठक की। जिसमें कई अहम सुझाव मिले। इसके बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने सहयोगी मंत्रियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसकी एक विवादित क्लिप खूब वायरल हुई। उस पर सीएम ने अब सफाई दी है।
दरअसल सीएम के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में डिप्टी सीएम अजित पवार मौजूद थे। उनको देखते हुए सीएम ने कहा कि हमें सिर्फ बोलकर छोड़ देना है। इस पर पवार ने कहा कि हां। तभी वहां मौजूदा दूसरे डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने दोनों को चुप करवाया और बताया कि माइक ऑन है।

विपक्षी दलों ने तुरंत इस मामले को लपक लिया। इस क्लिप को सोशल मीडिया पर खूब वायरल किया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि राज्य सरकार मराठा आंदोलन पर गंभीर नहीं है। वो सिर्फ आश्वसन देकर मामला शांत करवाना चाहती है।
वहीं सीएम ने इस मुद्दे को लेकर दोबारा मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि ये सरकार मराठों को आरक्षण देने को लेकर संवेदनशील है, साथ ही इसके लिए गंभीरता से काम हो रहा। इस संबंध में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी और हमें बहुत अहम सुझाव मिले।
उन्होंने आगे कहा कि बैठक के बाद जब हम मीडिया को संबोधित करने आए, तो हमने तय किया था कि हम केवल मराठा आरक्षण और मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल के बारे में बात करेंगे, उसके अलावा किसी भी राजनीतिक प्रश्न या राजनीतिक बयान पर चर्चा नहीं करेंगे। कुछ लोगों ने उसकी क्लिप को एडिट करके फैलाया और मराठा समुदाय को गलत सूचना दी।
सीएम ने कहा कि सभी से निवेदन है कि किसी तरह की गलत बयानबाजी को ना फैलाएं। मैं ये कहना चाहूंगा कि किसी भी जाति के साथ अन्याय नहीं करते हुए मराठों को आरक्षण दिया जाएगा।
भूख हड़ताल पर हैं पाटिल
मराठा आंदोलन को लेकर मनोज जरांगे पाटिल 29 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं। सरकार के आश्वासन के बाद अब वो अपनी हड़ताल वापस लेने के लिए तैयार हैं। हालांकि उन्होंने ये दावा किया है कि जब तक सरकार मराठवाड़ा क्षेत्र के मराठा समुदाय को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करना शुरू नहीं कर देती, वो धरनास्थल से नहीं हटेंगे।












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