महाराष्ट्र: मंत्री छगन भुजबल को सदन घोटाला मामले में बड़ी राहत, बेटे और भतीजे समेत हुए बरी
मुंबई, 9 सितम्बर। एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल को चर्चित महाराष्ट्र सदन घोटाला केस में बड़ी राहत मिली है। भुजबल को एक विशेष अदालत ने आरोपों से बरी कर दिया। भुजबल के साथ ही उनके बेटे पंकज, भतीजे समीर और पांच अन्य आरोपियों को भी कोर्ट ने बरी किया है।

भुजबल ने अपने वकील के जरिए दायर याचिका में कहा था कि उप मुख्यमंत्री और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के राज्यमंत्री पद पर रहते हुए किसी भी प्रकार की अनियमितता या फिर भ्रष्टाचार के कोई सबूत नहीं है।
क्या था मामला?
एंटी करप्शन ब्यूरो ने भुजबल और 16 अन्य के खिलाफ 2015 में मामला दर्ज किया था। इसमें कहा गया था कि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की जमीन पर एक प्रोजेक्ट के लिए भुजबल ने एक निजी फर्म का पक्ष लिया था। भुजबल 2004 से 2014 तक पीडब्ल्यूडी मंत्री थे।
भुजबल ने आरोपों से किया था इनकार
भुजबल ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि सभी आरोप 'गलत गणना' पर आधारित थे और सरकार को कोई नुकसान नहीं हुआ क्योंकि उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि परियोजना को सौंपने का निर्णय कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया था, जहां कई अन्य मंत्री और वरिष्ठ नौकरशाह मौजूद थे।
कोर्ट में वकील ने बताया गया कि डेवलपर को परियोजना देने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी क्योंकि इसे 1998 में पहले ही चुना जा चुका था।
विशेष लोक अभियोजक अजय मिसर और कार्यकर्ता अंजलि दमानिया, जिन्होंने मामले में एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया था, ने यह कहते हुए याचिका का विरोध किया था कि मामले में एक बड़ा आरोप पत्र दायर किया गया था जिसमें आरोपियों की संलिप्तता और सरकार को नुकसान दिखाया गया था।












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