40 हजार रु की लागत से उगाई प्‍याज, 70 किमी दूर मंडी में बेचने गया किसान, हाथ आए महज दो रुपये

40 हजार रु की लागत से महाराष्‍ट्र के किसान ने प्‍याज उगाई थी। अपने गांव से 70 किलोमीटर दूर जब वो प्‍याज की मंडी में बेचने गया तो उसे 500 किलो से अधिक प्‍याज की कीमत के बदले महज 2 रुपये मिले।

maharshtrafarmer

किसान अपने खेत में कड़ी मेहनत कर फसल तैयार करता है। साल भर खेतों में अपनी फसल बोने से पहले और उसके तैयार होने तक वो उसकी सेवा और रखवाली बिल्‍कुल अपने बच्‍चों की तरह करते हैं। किसान साल भर इसलिए इतनी मेहनत करता है कि जब वो अपनी फसल को मंडी में बेचे तो उसे उसकी अच्‍छी कीमत मिले। किसान की आमदनी का स्रोत उसकी फसल ही होती है ऐसे में अगर किसान को उसकी फसल की अच्‍छी कीमत ना मिले तो उसका क्‍या हाल होगा? महाराष्‍ट्र से एक किसान की मामला सामने आया है जिसमें उसकी व्‍यथा सुनकर आप भी देश के किसानों के प्रति भावुक हो जाएंगे।

बेचने के लिए 70 किलोमीटर की यात्रा की

बेचने के लिए 70 किलोमीटर की यात्रा की

ये किसान महाराष्‍ट्र सोलापुर जिले के बरशी तालुका के बोरगांव का रहने वाला है। राजेद्र तुकाराम चव्‍हाण नाम के इस किसान ने अपने खेत में इस साल प्‍याज की खेती की थी। वो अपने खेत में उगी 512 किलो प्‍याज को मंडी में बेचने के लिए 70 किलोमीटर की यात्रा की।

एक रु प्रतिकिलो बिकी प्‍याज, थमाया गया दो रुपये का चेक

एक रु प्रतिकिलो बिकी प्‍याज, थमाया गया दो रुपये का चेक

किसान की खेत में उगाई प्‍याज मंडी में एक रुपये प्रतिकिलो रुपये के भाव से बिकी। सभी कटौतियों के बाद चव्‍हाण को केव किसान चव्हाण का शुद्ध लाभ बमुश्किल 2.49 रुपये था। उमसें से भी उसे पोस्ट-डेटेड चेक के रूप में 2 रुपये का भुगतान मिला, जिसे वह 15 दिनों के बाद ही भुना पाएंगे।

किसान को 49 पैसा चेक में नहीं दिया गया क्‍योंकि....

किसान को 49 पैसा चेक में नहीं दिया गया क्‍योंकि....

किसान को दिए गए चेक में 49 पैसे की शेष राशि चेक में दिखाई नहीं दे रही थी क्योंकि बैंक लेनदेन आमतौर पर रांउड फिगर में होते हैं। इस शेष राशि का दावा करने के लिए चव्हाण को इसे सीधे व्यापारी से लेना होगा, लेकिन किसान को लगता है कि वो 49 पैसा नहीं लेगा क्‍योंकि उसका कोई फायदा नहीं है।

किसान को क्‍यों 2.49 पैसे ही मिले

किसान को क्‍यों 2.49 पैसे ही मिले

टीओआई को दिए इंटरव्‍यू में किसान चव्हाण ने कहा "मुझे प्याज के लिए 1 रुपये प्रति किलो मिला। एपीएमसी व्यापारी ने 512 रुपये की कुल राशि से 509.50 रुपये परिवहन शुल्क और हेड-लोडिंग और वजन शुल्क में कटौती की। इस तरह उन्‍हें 2.49 पैसे ही मिले।

क्‍यों दिया गया चव्‍हाण को पोस्‍ट-डेटेट चेक

क्‍यों दिया गया चव्‍हाण को पोस्‍ट-डेटेट चेक

सोलापुर एमपीएससी के व्‍यापारी नासिर खलीफा ने दो रुपये का पोस्‍ट-डेटेड चेक जारी करने के पीछे की वजह बताई कि चेक जारी करने की प्रक्रिया को अब कम्‍यूटर से जोड़ दिया गया है । इस वजह से चव्‍हाण को पोस्‍ट-डेटेड चेक जारी किया गया। उन्‍होनें बताया कि चेक पर रकम को देखे बिना पहले ही इतनी छोटी रकम के चेक जाीर किए गए है।

क्‍यों व्‍यापारी से किसान को मिले प्‍याज के इतने कम दाम

क्‍यों व्‍यापारी से किसान को मिले प्‍याज के इतने कम दाम

सूर्या ट्रेडर्स के मालिक खलीफा जिन्‍होंने ये प्‍याज खरीदी है उन्‍होंने बताया कि चव्‍हाण की प्‍याज की क्‍वालिटी खराब थी। चव्‍हाण इससे पहले अच्‍छी प्‍याज लाए थे त उन्‍हें 18 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भाव दिया गया। इसके पहले 14 रुपये प्रति किलो रुपये दिए गए थे।

प्‍याज के दामों में आई भारी गिरावट, किसान को हुआ बड़ा घाटा

प्‍याज के दामों में आई भारी गिरावट, किसान को हुआ बड़ा घाटा

बता दें इस बार प्‍याज की पैदावार बहत अधिक हुई है और पिछले दो महीने में प्‍यार के दाम में 70 फीसदी की गिरावट आई है। किसान को जो बाजार में दाम मिल रहा है उसे लेकर प्‍याज बेचने के अलावा उनके पास कोई अन्‍य विकल्‍प नहीं बचा है। इसकी वजह है कि प्‍याज को एक महीने से ज्‍यादा किसान नहीं स्‍टोर कर सकते हैं क्‍योंकि प्‍याज एक महीने बाद सड़ने लगती है।

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