1 टन प्याज बेचने के बावजूद किसान को हुआ महज 13 रुपए का फायदा, जानिए कहां का है ये मामला
सोलापुर, 04 दिसंबर: देश में किसानों की दुर्दशा किसी से छिपी हुई नहीं है। एक तरफ जहां प्याज अभी भी महंगे भाव में बिक रहा है तो दूसरी तरफ किसानों को इसके मुताबिक कीमत नहीं मिल पा रही है। जो किसान अपनी फसल बोने से लेकर उसे बड़ी करने तक खून पसीना एक कर देता हैं, लेकिन जब उस फसल के दाम उसे मिलते है तो वो खुद को ठगा हुआ ही महसूस करता है। धरती का सीना फाड़कर फसल उगाने वाला किसान आखिर क्या करें? अब एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जब अपनी फसल के अच्छे दाम की उम्मीद लगाने वाला किसान फसल के उचित दाम से वंचित रह गया। महाराष्ट्र के एक किसान ने एक टन प्याज बेचकर महज 13 रुपए की कमाई की है।

1,123 किलो प्याज बेचने के बाद मिले मात्र 13 रुपए
जी हां, इसे पढ़कर एक बार आपको अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ होगा, लेकिन यह 100 फीसदी सच है। महाराष्ट्र के सोलापुर के एक किसान ने 1,123 किलोग्राम प्याज बेचने के बाद मात्र 13 रुपए की कमाई की है, जबकि सर्दियों में प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। एक तरफ जहां किसान अपनी फसल बेचकर मायूस है तो दूसरी तरफ कमीशन एजेंट का दावा है कि किसान को खराब फसल की वजह से इतनी कम कीमत दी गई है।

कमीशन एजेंट की रसीद से हुआ खुलासा
सोलापुर स्थित एक कमीशन एजेंट की तरफ से दी गई बिक्री रसीद में दिखाया गया है कि किसान बप्पू कावड़े ने बाजार में 1,123 किलो प्याज बेचा और 1,665.50 रुपए कमाए। जिसमें मजदूरी, वजन शुल्क (तौल का खर्चा) और खेत से कमीशन एजेंट की दुकान तक का ट्रांसपोर्ट शामिल था, लेकिन लागत को छोड़कर उत्पादन का 1,651.98 रुपए रहा। इसका मतलब है कि उसने बिक्री से सिर्फ 13 रुपए का मुनाफा कमाया।

24 बोरी प्याज और कमाई 13 रुपए
इसे मामले को स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता और पूर्व लोकसभा सांसद राजू शेट्टी ने उठाया है। उन्होंने किसान कावड़े की बिक्री रसीद को ट्वीट करते हुए लिखा कि 'इस 13 रुपये का क्या करना चाहिए? यह अस्वीकार्य है। किसान ने अपने खेत से 24 बोरी प्याज की आपूर्ति कमीशन एजेंट को की और उसने इससे केवल 13 रुपये कमाए।' उन्होंने आगे लिखा कि किसान उत्पादन लागत कैसे चुकाएगा, जिसमें खेती के लिए मिट्टी की तैयारी, प्याज के बीज की खरीद, खाद और कटाई का खर्चा शामिल हैं? इसी के साथ शेट्टी ने आरोप लगाया कि अगर प्याज की कीमतें आसमान छूती हैं, तो केंद्र सरकार युद्ध स्तर पर अन्य देशों से उपज का आयात करती है। हालांकि अब जब कीमतें गिर गई हैं, तो सरकार किसान की दुर्दशा को नजरअंदाज कर देगी।

कमीशन एजेंट की सफाई
इधर, किसान बप्पू कावड़े से प्याज खरीदने वाले कमीशन एजेंट रुद्रेश पाटिल ने बताया कि मैंने इतनी कम दाम पर प्याज खरीदा, लेकिन यह मुख्य रूप से उपज की खराब गुणवत्ता के कारण है। पिछले कुछ दिनों में बेमौसम बारिश के कारण प्याज गीला और खराब हो गया था, यही वजह है कि प्याज की इतनी कम कीमत दी गई।












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