'असली शिवसेना' पर फैसला: कांग्रेस ने कहा- लोकतंत्र को खतरा, CM शिंदे के मंत्री बोले- तय हुआ 'गद्दार' कौन?
Maharashtra News: महाराष्ट्र की सियासत के लिए इस हफ्ते बुधवार का दिन सबसे बड़ा दिन साबित हुआ, जब विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने 'असली शिवसेना' को लेकर अपना फैसला सुनाया। स्पीकर नार्वेकर ने शिंदे गुट को असली शिवसेना करार दिया। इस फैसले के बाद शिंदे गुट के नेता ही नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है। शिवसेना कार्यकर्ताओं ने सीएम शिंदे का एयरपोर्ट पर जमकर स्वागत किया। वहीं इस बीच कांग्रेस ने विधासभा स्पीकर राहुल नार्वेकर के इस फैसले को लोकतंत्र के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष का फैसला नियमों के खिलाफ है।
महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने बुधवार (10 जनवरी) को शिंदे गुट को असली शिवसेना करार दिया। स्पीकर के इस फैसले से शिंदे गुट के नेताओं ने खुशी व्यक्त की है। शिवसेना (शिंदे गुट) के मुख्य सचेतक भरत गोगावले ने कहा है कि सीएम शिंदे ने स्पष्ट कहा है कि मौजूदा सरकार अपने काम से विपक्ष को जवाब देगी। उन्होंने दावा कि शिंदे गुट ही शिवसेना है, इसके लिए किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। वहीं शिंदे सरकार में मंत्री उदय सामंत कहते हैं, "यह तय हो गया है कि गद्दार कौन है... हम फैसले से संतुष्ट हैं और विधानसभा अध्यक्ष को धन्यवाद देते हैं।"

स्पीकर का फैसला असंवैधानिक: कांग्रेस
कांग्रेस ने स्पीकर राहुल नार्वेकर के फैसले को असंवैधानिक बताया। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा, "विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर का फैसला असंवैधानिक है और यह एक अलोकतांत्रिक फैसला है और यह पार्टी के नियमों के खिलाफ है।" नाना पटोले ने स्वीकार किया कि असली शिवसेना 1999 थी। उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों के किसी भी विधायक को अयोग्य नहीं ठहराया। हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है। इस फैसले के बाद लोकतंत्र खतरे में है। हालांकि बीजेपी को इस फैसले से कोई दिक्कत नहीं होगी।"
वहीं अपने फैसले को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर उद्धव गुट के सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "भारत के प्रत्येक नागरिक को सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय में अपील करने काअधिकार है। हालांकि, अगर सिर्फ इसलिए अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा कि सदन का फैसला गलत है तो इसका कोई मतलब नहीं है। हालांकि आपके पास ये बात रखने का अधिकार है कि कानून की नजर में कोई फैसला वैध है या फिर नहीं।"












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