Maharashtra: NCP में पनप रहा परिवारवाद! जानें चाचा-भतीजे के इस्तीफे की पेशकश से कैसे बदल रही पार्टी की हवा?
Maharashtra Politics: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में घटी हाल ही की घटनाओं ने पॉलिटिकल ड्रामा की स्थिति पैदा की है। पार्टी में परिवारवाद पनपता नजर आ रह है।
Maharashtra Politics: 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में ड्रामा देखते को मिल रहा है। शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता का पद छोड़ने की इच्छा जताई। जिसके बाद छगन भुजबल ने किसी ओबीसी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने सुझाव में अपना ही नाम पेश कर दिया।
अजित पवार ने अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होने की इच्छा जताते हुए पार्टी के संगठन में एक पद दिए जाने का प्रस्ताव रखा। अजित की इस पेशकश के बाद अजित पवार की बहन और पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि दादा संगठन के लिए काम करना चाहते हैं। मैं चाहती हूं कि दादा की इच्छा पूरी हो। अप्रैल के बाद की घटनाओं पर गौर करें तो अजित की बीजेपी के साथ निकटता की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, चाचा-भतीजे की जोड़ी ने इन रिपोर्टों का स्पष्ट रूप से खंडन किया था। आइए समझें एनसीपी में पॉलिटिकल ड्रामा...

6 पॉइंट में समझें NCP में परिवारवाद
- 2 मई को शरद पवार (82) ने अपने इस्तीफे की घोषणा की और अपने उत्तराधिकारी की तलाश के लिए एक समिति का गठन किया।
- 5 मई को पवार अपना इस्तीफा वापस ले लिया था, जब उनके उत्तराधिकारी की तलाश के लिए नियुक्त समिति ने सर्वसम्मति से उनके इस्तीफे को खारिज कर दिया था। नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के बीच उनसे इसे वापस लेने का अनुरोध किया था। इस्तीफा वापस लेते हुए, पवार ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए संगठनात्मक परिवर्तन और नया नेतृत्व तैयार करने का संकेत दिया था। इसके अलावा, उन्होंने पार्टी में एक उचित उत्तराधिकारी की प्लानिंग की आवश्यकता पर बल दिया।
- 17 मई को एनसीपी ने संगठनात्मक चुनावों की घोषणा की। महाराष्ट्र और मुंबई के लिए जयप्रकाश दांडेगावकर और दिलीप वाल्से-पाटिल को रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त किया।
- 9 और 10 जून पार्टी के 24वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पवार ने उस समय आश्चर्यचकित कर दिया, जब उन्होंने अपनी बेटी सुप्रिया सुले और विश्वासपात्र प्रफुल्ल पटेल को दो कार्यकारी अध्यक्षों के रूप में नियुक्त किया।
- 21 जून को, पार्टी का रजत जयंती समारोह आयोजित किया गया था। पवार के भतीजे अजित ( दो दशकों का मंत्री पद का अनुभव और चार बार पूर्व उपमुख्यमंत्री) ने अब आश्चर्य जताया है कि वह पद छोड़ना चाहते हैं।
- छगन भुजबल ने किसी ओबीसी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने सुझाव में अपना ही नाम पेश कर दिया।
अजित ने क्यों जताई इस्तीफे की इच्छा
अजित पवार ने कहा था कि मुझे बताया गया है कि मैं विपक्ष के नेता के रूप में सख्त व्यवहार नहीं करता हूं। मैं आपको बता दूं, सबसे पहले मैं इस पद के लिए उत्सुक नहीं था। पार्टी नेतृत्व और विधायकों ने इसे संभालने के लिए कहा। मैं इस पद पर एक साल से काम कर रहा हूं। मैं इस पद से मुक्त होना चाहता हूं। इसके बजाय मैं पार्टी संगठन के लिए नेतृत्व द्वारा तय की गई क्षमता के अनुसार काम करना चाहता हूं। मैं इसके साथ न्याय करूंगा।
क्या कहा था भुजबल ने?
पूर्व उपमुख्यमंत्री और उत्कृष्ट वक्ता भुजबल ने कहा था कि मेरा मानना है कि एक ओबीसी नेता को पार्टी का प्रमुख होना चाहिए और पार्टी में कई लोग हैं। जैसे सुनील तटकरे, जीतेंद्र अवहद, धनंजय मुंडे, यहां तक कि मैं भी हो सकता हूं। उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले दोनों ओबीसी हैं।












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