Maharashtra Politics: महाराष्‍ट्र में निकाय चुनाव से पहले मचा बवाल, शिंदे के मंत्री आखिर क्‍यों हैं नाराज?

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा और शिवसेना के बीच की तल्खियां और इतनी बढ़ गई है। आलम ये है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कैबिनेट बैठक में एकनाथ शिंंदे के अलावा शिवसेना का एक भी मंत्री इस बैठक में नहीं पहुंचा। जिसके बाद महाराष्‍ट्र में सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। माना जा रहा है कि शिंदे गुट और भाजपा के बीच पिछले कई दिनों से मनमुटाव चल रहा है।

दरअसल, कैबिनेट मीटिंग मंत्रालय भवन की सातवीं मंजिल पर होती है, जबकि शिवसेना के सभी मंत्री छठी मंजिल पर स्थित मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दफ्तर में मौजूद थे उन्होंने कैबिनेट बैठक में हिस्सा नहीं लिया। इस स्थिति के बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। आइए जानते हैं आखिर क्‍यों नाराज है शिवसेना गुट के मंत्री?

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बता दें महायुति में पिछले कई महीनों से अनबन की खबरें सामने आ रही थीं। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे थे कि एकनाथ शिंदे गुट की ओर से आज जो कदम उठाया गया है, वह किसी न किसी दिन होना ही था। दरअसल, एकनाथ शिंदे के मंत्री लंबे समय से अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे थे।

क्‍यों नाराज हैं शिंदे गुट के मंत्री?

दरअसल, अब महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले बीजेपी अपनी स्थिति मजबूत कर रही है। राज्य के कई जिलों में विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ता और नेता बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। इसी क्रम में, कल्याण-डोंबिवली में शिवसेना के दोनों गुटों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल हो गए, जिससे शिवसेना (शिंदे गुट) और बीजेपी के बीच तनाव उत्पन्न हो गया।

इस घटना के विरोध में, ऐसी खबरें थीं कि शिवसेना के मंत्रियों ने 18 नवंबर को मुंबई में हुई कैबिनेट बैठक का बहिष्कार किया। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को छोड़कर शिवसेना का कोई भी मंत्री इस बैठक में मौजूद नहीं था।

हालांकि, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इन दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य भर में स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मी है और कई मंत्रियों को विभिन्न जिलों का प्रभार सौंपा गया है।

बावनकुले के अनुसार, "कई मंत्री अपने-अपने जिलों में व्यस्त हैं, जिसके कारण आज की बैठक में तीनों पार्टियों के मंत्रियों की संख्या कम थी। मंत्रियों की अनुपस्थिति का कोई और कारण नहीं था।" उन्होंने आगे बताया कि इन मंत्रियों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अनुमति ली थी और उसके बाद ही वे अपने-अपने क्षेत्रों में गए थे।

उन्होंने मीडिया के दावों को गलत बताते हुए कहा, "राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भी कुछ मंत्री अपने जिलों में थे। मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री (एकनाथ शिंदे और अजित पवार) बैठक में उपस्थित थे। अभी भी उनकी अलग बैठक चल रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी की बैठक हाल ही में संपन्न हुई है, और वन विभाग की बैठक चल रही है। मीडिया जो खबरें दिखा रहा है, वैसा कुछ भी नहीं है।"

जब बावनकुले से पूछा गया कि कैबिनेट बैठक में एकनाथ शिंदे के अलावा शिवसेना का एक भी मंत्री क्यों नहीं था, तो उन्होंने सीधे प्रतिक्रिया नहीं दी। कल्याण-डोंबिवली में शिवसेना के पदाधिकारियों के बीजेपी में शामिल होने से उपजी नाराजगी के सवाल पर बावनकुले ने कहा, "ऐसा कोई मामला नहीं है। मीडिया का अनुमान गलत है। महायुति में कहीं कोई नाराजगी नहीं है। हम सब एकजुट हैं।"

उदय सामंत ने भी शिवसेना के मंत्रियों की कथित नाराजगी पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "हमें जो कुछ भी कहना है, हम सीधे एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कहेंगे। शिवसेना के मंत्री मुख्यमंत्री से मिलने गए थे।"

सामंत ने अपनी अनुपस्थिति का कारण बताते हुए कहा, "मैं स्वास्थ्य जांच के लिए गया था, इसलिए बैठक में उपस्थित नहीं हो सका। लेकिन हमारे प्रमुख नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उस बैठक में मौजूद थे। हमने मुख्यमंत्री को अपनी बात बता दी है। हमने कैबिनेट बैठक का कोई बहिष्कार नहीं किया है। हमारे प्रमुख नेता उपस्थित थे, इसलिए इसे बहिष्कार नहीं कहा जा सकता।"

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