आज 'पावर' दिखाएंगे चाचा-भतीजे, शरद पवार की बैठक वाले दिन ही अजीत ने भी MP-MLA को बुलाया
Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल का दौर जारी है। पहले जिस तरह से शिवसेना में दो फाड़ हुए और पार्टी के दो हिस्से हुए गए उसके बाद कुछ ऐसा ही हाल एनसीपी का भी देखने को मिल रहा है। एनसीपी के एक गुट की अगुवाई अजित पवार कर रहे हैं तो दूसरे गुट की अगुवाई शरद पवार। दोनों ही नेताओं के बीच अब पॉवर बैटल शुरू हो गई है।
अजित पवार ने एक तरफ जहां सभी विधायकों, पार्टी के जिला अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष को 5 जुलाई की बैठक में बुलाया है तो दूसरी तरफ शरद पवार ने भी 5 जुलाई को पार्टी के सभी नेताओं की बैठक बुलाई है। अजित पवार ने MET बांद्रा में बैठक बुलाई है तो शरद पवार ने वाईबी चव्हाण ऑडिटोरियम में बैठक बुलाई है।

ऐसे में 5 जुलाई को जिस तरह से दोनों नेताओं ने एक साथ बैठक बुलाई है उसपर हर किसी की नजर होगी। देखने वाली बात है कि किस नेता की बैठक में कौन-कौन सा नेता पहुंचता है। इस बैठक में दोनों गुट में कौन से नेता हैं इसकी भी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
बता दें कि अजित पवार ने एकनाथ शिंदे सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। उन्होंने दावा किया है कि उनके पास 53 में से 40 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में अगर एनसीपी के एक तिहाई विधायक अजित पवार के साथ आते हैं तो पार्टी के विधायकों पर दल बदल का कानून लागू नहीं होगा।
महाराष्ट्र की राजनीति में इस बदलाव के बाद भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा लाभ यह हो सकता है कि गठबंधन की सरकार में शिंदे गुट की धमक कम हो जाएगी। या यूं कहें कि अगर एनसीपी के 35 विधायक भी अजित पवार के साथ हैं तो भाजपा के 106 विधायक मिलकर प्रदेश में बहुमत के करीब पहुंच सकते हैं।
लिहाजा 56 विधायकों वाली एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना की धमक गठबंधन् में जरूर कम होगी। गौर करने वाली बात है कि महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं और बहुमत के लिए 145 सीटों की जरूरत है।












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