Maharashtra NCP Crisis: महाराष्ट्र में शरद पवार ने गंवा दिए ये दो बड़े मौके, वरना एनसीपी का ना होता ये हाल
Maharashtra NCP Crisis: महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य शरद पवार को उनके अपने सगे भतीजे ने ही धोखा देकर उनकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को धड़ो में बांट दिया है। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद जो हाल शिवसेना का हुआ वैसा ही हाल कुछ पवार की एनसीपी का भी होता नजर आ रहा है।

शरद पवार ने गवां दिए दो बड़े मौके
हालांकि नसीपी में आए भूचाल की ये नौबत ही ना आती अगर शरद पवार ने भाजपा का हाथ पकड़ा होता। महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसे दो मौके आए जिन्हें शरद पवार ने गंवा दिए। अगर शरद पवार ने उन मौकों को ना गंवााया होता तो महाराष्ट्र को जहां एक स्थायी सरकार मिलती वहीं एनसीपी को भी ऐस विशाल संकट से गुजरना पड़ता। आइए जानते हैं आखिर वो दो मौके कौन से थे?
पहला मौका 2019
पहला मौका था वर्ष 2019 का जब भाजपा ने शिवसेना के साथ मिलकर राज्य की 288 सीटों में से 161 सीटों पर जीत हासिल की थी जिसमें बीजेपी ने 105 और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने 56 सीटों पर जीत हासिल की थी लेकिन उद्धव ठाकरे सीएम के लिए अड़ गए और भाजपा से अपना गठबंधन तोड़ लिया था
तब ये भी कयास लगाए जा रहे थे कि शिवसेना के नाराज होने के बाद भाजपा एनसीपी जिसने 53 सीटों पर जीत हासिल की है उसके साथ मिलकर सरकार आसानी से बना सकती थी लेकिन शरद पवार ने भाजपा के बजाय शिवसेना का हाथ थामा और कांग्रेस को भी अपने इस गठबंधन में मिलाकर महाराष्ट्र में महाअघाड़ी सरकार बना ली, जो एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद धराशायी हो गई।
शरद पवार ने शिवसेना के बजाय अगर भाजपा को सरकार बनाने में समर्थन किया होता तो महाराष्ट्र को जहां एक स्थायी सरकार मिलती वहीं एनसीपी का ये हाल ना होता जो अजित पवार के कारण हुआ है।
दूसरा मौका 2022
वहीं दूसरा मौका शरद पवार की एनसीपी को 2022 में दोबारा मिला था जब एकनाथ शिंदे की बगावत के बार महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई थी। उस समय भी अगर समय भी पवार ने अपने विधायकों की बात मानी होती तो महाराष्ट्र में भाजपा और शिंदे की सरकार के बजाय भाजपा एनसीपी की सरकार होती।
ये बात खुद एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने मंगवार को कही उन्होंने दावा किया था तब 2022 मे जब एकनाथ शिंदे शिवसेना के 40 विधायको के साथ बगावत कर उन्हें गुवाहाटी ले गए थे तब ये निश्चित हो गया था कि महाराष्ट्र की महाअघाडी सरकार गिर जाएगी तो एनसी के 53 में से 51 विधायकों ने भाजपा से हाथ मिलाकर सरकार बनाने की संभावना तलाशने की राय दी थी लेकिन शरद पवार ने उनकी नहीं सुनी थी,जिसका नतीजा एनसीपी को सरकार से हाथ धोना पड़ा था।












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