Maharashtra में क्या सच में महंगी होने वाली है बिजली? दामों में वृद्धि के प्रस्ताव की क्या है सच्चाई
Maharashtra Electricity price: महाराष्ट्र में बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अतुल लोंढे ने दावा किया है कि राज्य में बिजली की दरें कम होने के बजाय 16% तक बढ़ सकती हैं, जिससे आम जनता को बड़ा झटका लग सकता है। उन्होंने महायुति सरकार के दावों का खंडन करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के उनके वादों पर स्पष्टीकरण मांगा है।
लोंढे के अनुसार, महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (महावितरण) ने महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (MERC) के समक्ष बिजली दरों में 20 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव पर नागपुर में एक जनसुनवाई भी हुई थी। लोंढे ने चिंता व्यक्त की कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले छोटे और मध्यम आकार के उपभोक्ताओं पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे पूरी व्यवस्था चरमरा सकती है।

उन्होंने मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए महावितरण को पुराने आदेश को लागू करने और अनियमितताओं को दूर करने के लिए फिर से जनसुनवाई करने को कहा। लोंढे ने आयोग से 25 जून 2025 के संशोधित MYT (मल्टी-ईयर टैरिफ) आदेश को रद्द करने की भी मांग की, ताकि उद्योग, लघु और मध्यम उद्योगों के साथ-साथ सौर परियोजनाओं को भी संरक्षण मिल सके। उनके आरोप हैं कि यह कदम 'अदानी' के फायदे के लिए उठाया जा रहा है, जिससे सामान्य बिजली उपभोक्ता और एमएसएमई प्रभावित होंगे।
कांग्रेस प्रवक्ता ने सरकार के 'किफायती दरों पर बिजली' के वादे पर भी सवाल उठाए। सरकार ने घोषणा की थी कि पांच वर्षों में बिजली की दरें 50% और पहले वर्ष में 10% कम की जाएंगी। हालांकि, उनका कहना है कि वास्तविकता इसके विपरीत है। उन्होंने पड़ोसी राज्यों का उदाहरण देते हुए बताया कि गुजरात में घरेलू बिजली दरें 3.0 से 5.2 रुपये प्रति यूनिट, कर्नाटक में 3.7 से 7.3 रुपये और तेलंगाना में 2 से 10 रुपये तक हैं।
इस बीच, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विश्वास पाठक ने लोंढे के आरोपों को निराधार और झूठा बताते हुए खारिज कर दिया। पाठक ने स्पष्ट किया कि महावितरण ने बिजली दरों में कोई वृद्धि प्रस्तावित नहीं की है। उन्होंने कहा कि लोंढे नगर निगम चुनावों में मिली असफलता से निराश हैं। पाठक ने दोहराया कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने बिजली दरें कम करने का वादा किया था और महावितरण ने दरों में कमी का ही प्रस्ताव रखा है, इसलिए वृद्धि का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय ने महावितरण को नहीं, बल्कि नियामक आयोग को आदेश दिए हैं।
एक अलग घटनाक्रम में, अमरावती परिमंडल में बिजली बिलों का भुगतान न करने वाले 16,981 सरकारी कार्यालयों की बिजली आपूर्ति 12 फरवरी को 24 घंटे के लिए काट दी जाएगी। इन कार्यालयों को बार-बार सूचनाएं, रिमाइंडर और सीधे संदेश भेजे गए थे। इससे पहले 22 जनवरी को भी प्रतीकात्मक रूप से 4 घंटे के लिए बिजली आपूर्ति बाधित की गई थी, लेकिन फिर भी बिलों का भुगतान नहीं किया गया।
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