Maharashtra Elections: 'गुजरात जा रहे हैं उद्योग', MVA के इन आरोपों का महायुति के पास क्या है तोड़?
Maharashtra Chunav: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में इस बार वोटरों को विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) और सत्ताधारी महायुति दोनों ही गठबंधनों के लगभग ढाई-ढाई वर्षों के कार्यकालों को देखने के बाद फैसला करने का मौका मिला है। कोई भी गठबंधन अकेले एंटी-इंकंबेंसी का दबाव झेलने को मजबूर नहीं है। इसलिए, अगर एमवीए, बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी गठबंधन के खिलाफ कोई दावा कर रहा है, तो जनता उसके कामों का भी हिसाब मांग सकती है।
हाल ही में एक राष्ट्रीय अखबार को दिए एक इंटरव्यू में एमवीए के सबसे बड़े नेता शरद पवार के बेहद खास एनसीपी (एससीपी) के नेता जितेन्द्र आव्हाड ने सत्ताधारी गठबंधन पर आरोप लगाया है कि इनकी वजह से महाराष्ट्र ने गुजरात के हाथों कई उद्योग गंवा दिए हैं। यह आरोप कोई पहली बार नहीं लगाया गया है। चुनावों में एमवीए महायुति सरकार के खिलाफ इन आरोपों को प्रमुखता से उठा रहा है।

अकेले महाराष्ट्र में भारत की 52% एफडीआई पहुंची- एकनाथ शिंदे
महायुति को लेकर यहां तक कहा जा रहा है कि उसके कार्यकाल में इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल (EAC) की रिपोर्ट में भी महाराष्ट्र में मंदी दिखाई गई है। राज्य के मुख्यमंत्री और शिवसेना सुप्रीमो एकनाथ शिंदे ने टीओआई को दिए एक साक्षात्कार में इन आरोपों को लेकर जवाब दिए हैं। उन्होंने कहा है कि, 'यह एक फर्जी नैरेटिव है। निवेश के तौर पर लाखों करोड़ रुपए आए हैं। भारत में अकेले महाराष्ट्र में 52% एफडीआई हुई है।'
'ईएसी की रिपोर्ट में में 2 साल नहीं, 10 वर्षों का हिसाब'
उन्होंने ईएसी रिपोर्ट के नाम पर किए जा रहे दावों को लेकर कहा है, 'ईएसी की रिपोर्ट में जो चीजें दिखाई गई हैं, वह 10 वर्षों के दौरान की हैं, सिर्फ 2 साल के नहीं। आपको हमें वक्त देना चाहिए। हमने 2 वर्षों में इतना सारा किया है, गढ़चिरौली तक उद्योग पहुंचाए हैं, अमरावती को टेक्सटाइल पार्क मिला। समृद्धि एक्सप्रेसवे पर शीर्ष मल्टीनेशनल कंपनियां आ रही हैं। मुंबई में हम इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विस सेंटर बनाएंगे और पुनर्जीवित करेंगे।'
हमनें हिमाचल और कर्नाटक में कांग्रेस की तरह झूठे वादे नहीं किए- महायुति नेता
वहीं वित्तीय दिवालियापन के विपक्ष के आरोप के बारे में उनका कहना है, 'हमारी सभी कल्याणकारी योजनाएं बहुत ही सुलझी हुई और टिकाऊ हैं। हम सभी मानकों का पालन कर रहे हैं...जीडीपी के 25% से कम। हम जीडीपी का महज 17.5% खर्च कर रहे हैं। हम राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट मैनेजमेंट के मानदंडों की 3% सीमा से भी नीचे हैं। हमने केंद्र और आरबीआई के सभी मानकों का पालन किया है। हमने कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश की तरह हवा में और झूठे वादे नहीं किए हैं।'
लाडकी बहिन योजना से एमवीए को झटका लगा है- एकनाथ शिंदे
उनके मुताबिक 'लाडकी बहिन योजना ने एमवीए को बहुत बड़ा झटका दिया है। यह इतना कामयाब है कि वह इसे निशाना बना रहे हैं। लेकिन, हम इसे 2,100 मासिक कर रहे हैं। जो लोग सोने के चम्मच लेकर पैदा हुए हैं, उन्हें 1,500 रुपए के मायने नहीं पता हैं। हम गरीबी से उठे हैं, मुझे पता है कि मेरी मां घर कैसे चलाती थी।'
हालांकि, एमवीए ने अपने घोषणापत्र में महिलाओं के लिए जो महालक्ष्मी गारंटी का वादा किया है, उसमें उन्हें 3,000 रुपए देने का दावा किया गया है। लेकिन, महायुति के पक्ष में यह बात जा सकती है कि वह सिर्फ वादे नहीं कर रही है, बल्कि इसे लागू करके अबतक 7,500 रुपए लाभार्थी महिलाओं के खातों में डाल भी चुकी है और इसमें और बढ़ोतरी का भरोसा दे रही है।
'एमवीए ने विकास प्रोजेक्ट में अड़ंगे डाले, जिसे हम ट्रैक पर लेकर आए'
वहीं कुशासन और भ्रष्टाचार के विपक्ष के आरोपों पर शिवसेना चीफ ने कहा है कि 'यह एमवीए ही थी, जिसने प्रोजेक्ट बंद किए....बुलेट ट्रेन, मेट्रो कार शेड....उन्होंने कोस्टल रोड, अटल सेतु का विकास धीमा किया। उन्होंने जल युक्त शिवार कार्यक्रम को लेकर एक जांच शुरू करवा दी। उन्होंने समृद्धि एक्सप्रेस तक के काम को धीमा किया। ढाई वर्षों में हमने सबको ट्रैक पर लाया है।'
धारावी प्रोजेक्ट को लेकर भी एमवीए पर पलटवार
वहीं धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट (DRP) को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं का भी उन्होंने जोरदार जवाब दिया है। शिंदे ने कहा है, 'डीआरपी करार और टेंडर एमवीए सरकार के दौरान हुआ था। इसलिए यह तो उन्हीं का किया हुआ है, उन्होंने अन्य कंपनी सेकलिंक को हटा दिया और अडानी को ठेका दे दिया। तो अब वे इसका विरोध क्यों कर रहे हैं? वे सिर्फ पात्र लोगों को ही घर देना चाहते थे, लेकिन हम तो सबको आवास दे रहे हैं।'












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