Maharashtra Election: MVA में आकर मिस्टर 50 परसेंट भी नहीं रहे उद्धव ठाकरे! कैसे बनेंगे CM?
Maharashtra Election 2024: 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बावजूद उद्धव ठाकरे ने इसलिए बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ दिया था, क्योंकि कांग्रेस और एनसीपी उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए तैयार हो गई। उद्धव अपनी विचारधारा से समझौता करके सीएम जरूर बन गए, लेकिन आखिरकार इसकी वजह से वह अपनी ही शिवसेना में बगावत नहीं रोक सके और उनकी सरकार गिर गई।
2019 में उन्होंने कांग्रेस और तत्कालीन एनसीपी के साथ महा विकास अघाड़ी (MVA) में अपनी शर्तों पर गठबंधन किया था। लेकिन, पांच साल बाद जब फिर से महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, तब न ही एमवीए में उद्धव का वह रुतबा नजर आ रहा है और न ही उनकी शिवसेना (यूबीटी) की वह हैसियत ही रह गई है।

उद्धव के खाते में आधी से भी कम रह गई शिवसेना
जब महाराष्ट्र के मौजूदा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना टूटी तो ज्यादातर विधायकों ने ठाकरे से ज्यादा शिंदे के मार्गदर्शन में भरोसा जताया।
उद्धव ने अपनी पार्टी के विधायकों को अपने साथ जोड़े रखने के लिए एड़ी चोटी एक कर दिया। चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कांग्रेस के बड़े-बड़े वकील उतार दिए, लेकिन न ही विधायकों को वापस ला पाए और न ही पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह ही बचा सके।
उद्धव को एमवीए में नहीं मिल रहा बीजेपी वाला भाव
उद्धव ठाकरे ने जब एनडीए से पलटी मारने का फैसला किया था, तब कांग्रेस और तत्कालीन एनसीपी के नेता उन्हें सिर आंखों पर बैठाने के लिए तैयार थे। वह खुद सीएम बने, बेटे आदित्य ठाकरे को कैबिनेट मंत्री बना दिया। लेकिन, एमवीए के सहयोगियों ने चुनावों में हार के बाद भी सरकार में बने रहने के लिए उनके सारे नाज नखरे उठाए।
लेकिन, जब 2024 का विधानसभा चुनाव हो रहा है और लोकसभा चुनाव में एमवीए के घटक दलों में शिवसेना (यूबीटी) का प्रदर्शन सबसे खराब रहा तो अब इन्हें कांग्रेस और एनसीपी (शरदचंद पवार) में से कोई भी ज्यादा भाव देने के लिए तैयार नहीं है।
2019 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के साथ गठबंधन में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना को महाराष्ट्र में 126 सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका दिया गया था।
आज एमवीए गठबंधन में शिवसेना (यूबीटी) को काफी संघर्ष के बाद फिलहाल 85 सीटों पर ही सिमटना पड़ गया है। हो सकता है इनमें से चंद सीटों की और बढ़ोतरी भी हो जाए। लेकिन, न तो 2019 वाला सम्मान नजर आ रहा है और न ही तब की तरह 56 सीटों पर जीतने की संभावना ही नजर आ रही है।
हिंदुत्व वाली छवि को भी लग गया बट्टा
उद्धव ठाकरे के पिता बाल ठाकरे ने जब शिवसेना का गठन किया था तो पार्टी की पहचान ही हिंदुत्व पर आधारित थी। लेकिन, बीते पांच वर्षों में उद्धव ठाकरे अपने पिता की पहचान को भी सहेजकर नहीं रख पाए हैं। उन्होंने उस कांग्रेस पार्टी के साथ हाथ मिलाया है, जिसकी विचारधारा के विरोध के बुनियाद पर ही बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना को खड़ा किया था।
उद्धव ठाकरे कैसे बनेंगे मुख्यमंत्री?
2019 में कांग्रेस और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाना एक मजबूरी थी। क्योंकि, उनके बिना एमवीए की सरकार ही मुमकिन नहीं थी। इसकी वजह ये थी कि महाराष्ट्र की जनता ने तो कांग्रेस और एनसीपी के खिलाफ जनादेश दिया था।
लेकिन, अगर 2024 में एमवीए चुनाव जीत गया तो भी कांग्रेस या शरद पवार के लिए उद्धव ठाकरे को सीएम बनाने जैसी कोई मजबूरी नहीं रहेगी। एक तो लोकसभा चुनावों में उनकी पार्टी का प्रदर्शन तीनों सहयोगी दलों में सबसे खराब रहा। अगर इसे भी आधार मानें तो शिवसेना (यूबीटी) के गठबंधन की जीत के बावजूद सबसे बड़ी पार्टी बनने की संभावना बहुत कम ही है।
ऐसे में लग रहा है कि जिस कुर्सी की माया में पांच साल पहले उद्धव ने भाजपा के 'राम' को छोड़ दिया, इस चुनाव के बाद उन्हें न तो 'माया' मिलने की संभावना है और न ही 'राम' के पास लौटने की भी कोई गुंजाइश बचे रहने की उम्मीद है।












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