Maharashtra Election Results: मुस्लिम बहुल्‍य पर कैसे जीती भाजपा? जानें खास वजहें

Maharashtra Election Results: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को करारा झटका लगा है, जिससे कांग्रेस समेत उसके घटक दलोंं की चिंता बढ़ गई है। पांच महीने पहले लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस इस चुनाव में बुरी तरह हारी है।

महाराष्‍ट्र चुनाव के प्रचार के दौरान बड़े-बड़े बयानों के जरिए मुस्लिम वोटरों की हितैशी बनी कांग्रेस के सारे पैतरे इस चुनाव में फेल हो गए और उस मुंह की खानी पड़ी। ताज्‍जुब की बात ये है कि कई मुस्लिम बहुल्‍य सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है और कांग्रेस को करारी हार का समाना करना पड़ा है।

Maharashtra Election Results

बता दें ये कई सीटें ऐसी हैं जहां पर पांच महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था, वहीं विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। आइए इसकी पड़ताल करते हैं

मुसलमान बहुल्‍य विधानसभा सीटों पर जीती भाजपा

बता दें महाराष्ट्र के लोकसभा चुनावाों में जिन सीटों पर भाजपा हारी थी उनमें कई मस्लिम संख्या वाले निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे, जिन्हें पार्टी अपने खिलाफ अल्पसंख्यक वोटों की एकजुटता के कारण मामूली अंतर से हार गई थी। वहीं इस बार के विधानसभ चुनाव में 38 विधानसभा सीटों पर जहां मुसलमानों की आबादी 20 प्रतिशत से अधिक है, भाजपा ने अपनी संख्या 2019 में 12 से बढ़ाकर 14 कर ली है। दूसरी ओर, कांग्रेस इन सीटों पर पांच साल पहले 11 से घटकर इस बार केवल पांच रह गई है।

लोकसभा के बाद भाजपा ने बदली ये रणनीति

लोकसभा चुनाव में हारने वाली सीटें जीतने की वजह भाजपा की अहम चुनावी रणनीति रही। याद रहे कांग्रेस ने संविधान संशोधन के मुद्दे का लाभ उठाया था। कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों के दौरान संविधान बदलने के बारे में जो मुद्दा उठाया था, वह बहुत उपयुक्त था और कारगर रहा क्योंकि भाजपा के कई नेताओं ने संविधान बदलने की बात की थी।

भाजपा ने कांग्रेस पर संविधान के मुद्दे पर किया पलटवार

वहीं इस विधानसभा चुनावों से पहले, भाजपा ने कांग्रेस की कहानी को पूरी तरह से खत्म कर दिया और जनता के बीच जाकर ये कहना शुरू कर दिया कि संविधान उनकी प्राथमिकता है और वे इसका सम्मान करते हैं। यहां तक पीएम नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी को घेरते हुए कहा था राहुल गांधी जो हाथ में संविधान लेकर घूमते हैं वो अंदर से काेरी है। राहुल गांधी ने कभी संविधान पढ़ा ही नहीं।

भाजपा ने खोई जमीन हासिल की

महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान इस बदली हुई रणनीति ने उसे बौद्ध, ओबीसी और मराठों सहित विभिन्न मतदाता वर्गों के बीच फिर से अपनी जमीन हासिल करने में मदद की, जो पहले के चुनावों में कांग्रेस की ओर झुके हुए थे। इस बार के चुनाव में ये सारे वोट माना जा रहा है वो भाजपा की झोली में गिरे।

चुनावी मुद्दा

वहीं दूसरी वजह विपक्षी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के पास कोई ठोस मुद्दा क्यों नहीं था! यहां तक ​​कि उनके शीर्ष नेता राहुल गांधी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अडानी और धारावी के मुद्दे उठाए, जिससे मुंबई के बाहर के जिलों को कोई फायदा नहीं हुआ। विपक्षी कांग्रेस पीएम मोदी और भाजपा पर हमले करती रही, लेकिन इस का उसे कोई फायदा नहीं मिला।

मुस्लिम वोटर्स

जानकारों की माने तो लोकसभा चुनावों की तुलना में विधानसभा चुनावों में मुसलमानों ने कम मतदान किया। मुस्लिम बहुल्‍य क्षेत्र यानी जहां पर 50 फीसदी मुस्लिम आबादी रहती है। मुस्लिम वर्ग के वोटर्स ने इस बार के चुनाव में उदासीन नजर आए। स्वतंत्रता के बाद से, मुस्लिम मतदाताओं का मतदान प्रतिशत लगभग 35% रहा है। लोकसभा चुनावों में, हमने देखा कि 55% से 80% मुस्लिम मतदाताओं ने विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदान किया। इस बार, यह संख्या लोकसभा चुनावों के दौरान की तुलना में कम दिखाई दी।

आदिवासियों वोटर्स ने क्‍या भाजपा को दिया वोट?

अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या महाराष्‍ट्र में आदिवासी समाज समेत अन्‍य समुदायों का वोट क्‍या महायुति गठबंधन की जीत का कारण बना। तो ऐसा नहीं है क्‍योंकि आदिवासी समुदाय महायुति का समर्थन नहीं करता है लेकिन अन्‍य कई समुदायों ने भाजपा को वोट किया।

लाडली बहन योजना

महाराष्‍ट्र में महायुति की पिछली सरकार में शुरू की गई लाडली बहना योजना समेत अन्‍य सरकारी योजनाओं ने भाजपा को जीत दिलाने में काफी हद तक सहायक रही। हर वर्ग की महिलाओं को बिना भेदभाव के 1500 रुपये प्रतिमाह लाडली बहना योजना के तहत दिया गया। ऐसी योजनाओं ने महिलाओं और लोगों के जीवन पर सीधा प्रभाव दिखाया है, खासकर उन लोगों पर जो लगभग 10,000 प्रति माह कमाते हैं। उनकी मासिक आय में 1500 रुपये का इजाफा हो गया। माना जा रहा है कि भाजपा और महायुति की जीत में महिला वोटर्स की अहम योगदान रहा है।

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