Maharashtra Election Result 2024: महायुति ने तोड़े जीत के सारे रिकॉर्ड,1962 से कभी नहीं आए ऐसे नतीजे
Maharashtra Election Results 2024 in Hindi: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती का काम चल रहा है। अभी तक जितने नतीजे आए हैं और मतगणना का जो रुझान दिख रहा है, उसके हिसाब से सत्ताधारी महायुति गठबंधन महाराष्ट्र के चुनावी इतिहास में रिकॉर्ड जीत की ओर बढ़ रहा है। चुनाव आयोग के पास प्रदेश में चुनावों के जो 1962 से आंकड़े हैं, वहां अबतक किसी गठबंधन या पार्टी को इतनी बड़ी जीत कभी नहीं मिली थी।
झारखंड में रुझानों और नतीजों को देखने से लगता है कि बीजेपी की अगुवाई वाला सत्ताधारी महायुति गठबंधन लगभग 235 सीटों पर आगे है। वहीं विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) करीब 50 सीटों पर आगे है। महायुति में बीजेपी, एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना और अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी शामिल है।

1962 में महाराष्ट्र में कांग्रेस जीती थी 215 सीट
1962 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में वहां कांग्रेस पार्टी अकेले 215 सीटें जीती थी। तब उसके मुकाबले में आसपास भी कोई पार्टी नहीं नजर आती थी। इसी तरह से 1967 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की सीटें जरूर घटीं, लेकिन वह फिर भी 203 सीटों पर जीत के साथ सरकार बनाने में सफल रही।
1972 में कांग्रेस को मिली थी सबसे ज्यादा 222 सीट
इसके बाद 1972 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव हुआ। तब कांग्रेस फिर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसे 222 सीटें मिलीं। इस चुनाव में जनसंघ को 5 सीटें मिली थीं, जो कि भारतीय जनता पार्टी की पूर्ववर्ती थी।
1978 में विभाजित होकर लड़ी थी कांग्रेस
1978 के चुनाव में कांग्रेस विभाजित होकर मैदान में थी। तब कांग्रेस पार्टी को 69 सीटें मिली थीं और कांग्रेस (इंदिरा) को 62 सीटें मिली थीं। आपातकाल के बाद हुए इस चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जनता पार्टी ने जीती थी, जिसके 99 विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
1980 में पहली बार बीजेपी ने जीती 14 सीट
1980 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस (इंदिरा) के हाथ बाजी लगी और उसके 186 एमएलए जीते। वहीं कांग्रेस (यू) को 47 सीटें मिलीं। इस चुनाव में पहली बार बीजेपी के 14 विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा तक पहुंचे।
1985 में कांग्रेस को मिली थी 161 सीट
1985 में कांग्रेस को 161 सीटें मिलीं, वहीं बीजेपी के विधायकों की संख्या बढ़कर 16 पहुंची। तब आईसीएस को 54 सीटें मिली थीं। इसके बाद 1990 में चुनाव हुए तो कांग्रेस 141 सीटें जीती और बीजेपी की संख्या बढ़कर 42 तक पहुंची।
1995 से गठबंधन की राजनीति तेज हुई
1995 में कांग्रेस की सीटों की संख्या घटकर 80 रह गई और बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना ने 73 और भाजपा ने 65 सीटें जीतकर प्रदेश की राजनीति में नई धारा की शुरुआत कर दी।
1999 में एनसीपी ने जीती सबसे ज्यादा 71 सीट
1999 में कांग्रेस को 75 और एनसीपी को 58 सीटें मिलीं। वहीं बीजेपी 56 और शिवसेना 69 सीटें जीत सकी। 2004 में एनसीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसे 71 सीटें मिलीं और उसकी सहयोगी कांग्रेस को 69 पर ही सिमटना पड़ा। वहीं भाजपा को 54 और उसकी सहयोगी शिवसेना को 62 सीटें मिलीं।
कोई गठबंधन कभी नहीं छू पाया मौजूदा आंकड़ा
2009 में एक बार फिर से कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को बढ़त मिल गई। कांग्रेस ने 82 और एनसीपी ने 62 सीटें जीतीं। जबकि, भाजपा शिवसेना गठबंधन में पहले ने 46 और दूसरे ने 44 सीटें ही जीतीं।
2014 में बीजेपी 122, शिवसेना 63, कांग्रेस 42 और एनसीपी 41 सीटों पर विजयी रही। वहीं, 2019 में भाजपा को जहां 105 सीटें मिलीं वहीं, शिवसेना को 56, कांग्रेस को 44 और एनसीपी को 54 सीटें मिलीं।












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