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Maharashtra Chunav Result 2024: बाल ठाकरे के सियासी वारिस साबित हुए एकनाथ शिंदे,उद्धव की राजनीति क्यों हुई फेल

Maharashtra Chunav Results 2024 in Hindi: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का जो परिणाम आया है,उससे ढाई साल से चल रही शिवसेना की लड़ाई का भी राजनीतिक फैसला हो गया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे शिवसेना की राजनीतिक लड़ाई में इसके संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे पर भारी पड़े हैं। जब से शिंदे उद्धव से विधायकों के साथ अलग हुए थे,वे उन्हें 'गद्दार' बता रहे थे। लेकिन महाराष्ट्र की जनता ने उद्धव की राजनीति को आईना दिखा दिया है।

महाराष्ट्र विधानसभा के परिणामों और रुझानों में एकनाथ शिंदे की पार्टी सिर्फ 81 सीटों पर लड़कर 55-56 सीटों पर जीत की ओर बढ़ रही है और उसे करीब साढ़े 12 फीसदी वोट मिल रहे हैं। वहीं 95 सीटों पर लड़ने के बावजूद शिवसेना (यूबीटी) लगभग 20 सीटों पर ही प्रभावी दिख रही है। उसे वोट भी शिंदे की पार्टी से कम मिले हैं, जो कि 10% से कुछ अधिक है।

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बाल ठाकरे की विचारधारा की विरासत संभालेंगे एकनाथ शिंदे!
शिंदे ने जून 2022 में जब से उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ा था, वह उनपर अपने पिता'हिंदू हृदय सम्राट' बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व वाली विचारधारा छोड़कर कांग्रेस की गोद में जा बैठने का आरोप लगा रहे थे। इसके ठीक उलट उद्धव शिंदे और उनके साथ गए विधायकों को 'गद्दार' कहने से भी परहेज नहीं कर रहे थे।

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2019 में पिता की 'विचारधारा' त्यागकर कांग्रेस से मिल गए थे उद्धव!
पांच साल पहले 2019 में जब महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव हुए थे, तब बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव जीतने के बावजूद उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने की जिद पर अड़ गए। जबकि, एनडीए ने तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में न सिर्फ चुनाव जीता था, बल्कि चुनावी रैलियों में उद्धव की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें सीएम का चेहरा भी बता चुके थे।

2019 में जब उद्धव संयुक्त शिवसेना के प्रमुख थे, तब उनकी पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन में 126 सीटों पर लड़ी थी और उसे तब 56 सीटें मिली थीं। ज्यादा सीटों पर लड़ने की वजह से अलबत्ता उसका वोट शेयर तब 16.41% था।

उद्धव पर लगे कांग्रेस की कठपुतली बनने के आरोप
जून 2022 से जब से महाराष्ट्र की कमान उद्धव के हाथों से एकनाथ शिंदे ने संभाली है, उन्होंने शिवसेना संस्थापक की विचारधारा पर चलने की कोशिश की है। जबकि, उद्धव पर आरोप लगते रहे हैं कि जो बाल ठाकरे कांग्रेस की सियासत के कट्टर-विरोधी थे, वह उसी की हाथ की कठपुतली बन गए।

आज तो बहुत खुश हो रहे होंगे बालासाहेब ठाकरे!
मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति में बाल ठाकरे अपनी बेबाकी और अलग अंदाज की राजनीति के लिए लोकप्रिय थे। कोई भी राजनीतिक चर्चा होती थी तो वह उनके आवास मातोश्री में ही होती थी। लेकिन, उद्धव ठाकरे पर आरोप लगे कि उन्होंने बार-बार दिल्ली में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के दरबार में हाजिरी लगाकर अपने पिता के मान-सम्मान को कमतर करने का काम किया है।

उद्धव और शिंदे दोनों के कामों के आधार पर आया जनादेश
2019 में उद्धव उस कांग्रेस और एनसीपी की सहयोग वाले गठबंधन महा विकास अघाड़ी के मुखिया बने, जिन्हें शिवसेना और बीजेपी विधानसभा चुनाव में हरा चुकी थी। वे नवंबर, 2019 से लेकर जून 2022 तक मुख्यमंत्री भी रहे। इसलिए, इस बार महाराष्ट्र के मतदाताओं ने जो जनादेश दिया है, उसमें उद्धव और शिंदे सरकार दोनों के कामों के आधार पर दिया है।

शिंदे ही संभालेंगे बाबासाहेब की राजनीतिक विरासत!
चुनाव आयोग पहले से ही शिंदे के गुट को असली शिवसेना और उसके चुनाव निशान धनुष-बाण पर उसका अधिकार तय कर दिया है। जबकि, उद्धव के गुट को शिवसेना-यूबीटी वाला नाम और मशाल वाला चुनाव निशान मिला हुआ है।

23 नवंबर, 2024 (शनिवार) के चुनाव परिणाम ने आयोग के इस फैसले पर महाराष्ट्र की जनता ने भी मुहर लगा दी है,जिससे यही संदेश निकला है कि भले ही उद्धव ठाकरे को बालासाहेब की मातोश्री वली विरासत में मिली हो, उनकी शिवसेना की विरासत शिंदे के पास ही रहेगी।

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