महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में भी चली महायुति की लहर,देवेंद्र फडणवीस की किस रणनीति से मनोज जारांगे पाटिल हुए फेल?
Maharashtra Election Result 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में इस बार एक मुद्दा शुरू से काफी हावी था। मराठा आरक्षण आंदोलन का मुद्दा। इसके अगुवा मनोज जारांगे पाटिल ने बार-बार के भूख हड़ताल से महायुति सरकार के नाकों में दम कर रखा था। उनके निशाने पर सबसे ज्यादा बीजेपी और उसके नेता देवेंद्र फडणवीस थे। इस आंदोलन के विरोध में ओबीसी के कुछ नेता भी खड़े हो गए थे। इसकी वजह से एक समय हालात तनावपूर्ण तक हो गए थे। लेकिन,चुनाव नतीजों से पता चलता है कि जारांगे तो सिर्फ 'बुलबला' बना रहे थे।
मनोज जारांगे पाटिल के निशाने पर मुख्यतौर पर बीजेपी और फडणवीस थे। बीच में उन्होंने चुनावों में अपने उम्मीदवार भी उतार दिए। एक समय मराठा, दलित और मुस्लिम गठबंधन की भी बात करने लगे। मुस्लिम नेताओं से समर्थन जुटाना भी शुरू कर दिया। लेकिन, नामांकन वापसी के आखिरी समय में अचानक से यू-टर्न ले लिया और चुनाव से अपने उम्मीदवारों के कदम पीछे खींचवा लिए।

बीजेपी और फडणवीस थे जारांगे का निशाना
इसके बाद कभी मराठा समाज को अपनी इच्छानुसार वोट डालने को कहा तो कभी इशारों में विपक्षी महा विकास अघाड़ी को वोट देने का संदेश देते दिखे। लेकिन,भाजपा और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मराठा आरक्षण का विरोधी बताते हुए, उनका विरोध और उन्हें हराने की अपील करने से कभी पीछे हटते नहीं दिखे।
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मराठवाड़ा में बीजेपी और महायुति के पक्ष में चली लहर
मराठों की मायूसी का परिणाम लोकसभा चुनावों में बीजेपी की अगुवाई वाला महायुति भुगत चुका था। मराठों के प्रभाव वाले मराठवाड़ा क्षेत्र की 8 लोकसभा सीटों में से 7 पर सत्ताधारी गठबंधन का सितारा डूब गया था। लेकिन, विधानसभा चुनावों में उसी मराठवाड़ा में एक तरह से बीजेपी और महायुति के पक्ष में लहर चल गई। इलाके की 46 विधानसभा सीटों में से 40 महायुति जीत गया, जिसमें अकेले 19 सीटें बीजेपी के खाते में आईं।
वहीं, लोकसभा चुनावों में 7 सीटें जीतने वाले इंडिया ब्लॉक या एमवीए को विधानसभा में इस क्षेत्र में सिर्फ 5 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। मराठवाड़ा के जिन 32 विधानसभा क्षेत्रों में लोकसभा चुनावों में महायुति पिछड़ा था, इस बार न सिर्फ वो सारी सीटें जीत ली, बल्कि 8 अन्य सीटें भी अपने कब्जे में करने में सफल हो गया।
मराठवाड़ा में बीजेपी के 11 मराठा प्रत्याशी जीते
जारांगे पाटिल की भड़कीली टिप्पणियों और ओबीसी नेताओं के उसके विरोध की वजह से एक वक्त जो दुश्मनी का माहौल तैयार होने लगा था, बीजेपी की अगुवाई में एमवीए की सुनामी में वह सब गायब हो गया। यहां से जीतने वाले बीजेपी के 19 विधायकों में 11 मराठा, 4 ओबीसी, 2 आदिवासी (ST),1 दलित (SC) और एक मारवाड़ी शामिल हैं।
मराठवाड़ा में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना को 13 और एनसीपी को 8 सीटें मिली हैं। वहीं एमवीए में सबसे ज्यादा 3 सीटें शिवसेना (यूबीटी),1-1 सीट कांग्रेस, एनसीपी (एससीपी) और निर्दलीय को मिली है।
फडणवीस की किस रणनीति से मनोज जारांगे पाटिल हुए फेल?
मराठवाड़ा में बीजेपी अगर एमवीए के मुंह से मराठा वोट छीन पाई है तो उसके पीछे उसकी बहुत ही सूझबूझ वाली रणनीति की कामयाबी है। जारांगे पाटिल ने अपने मराठा कोटा आंदोलन के दौरान डिप्टी सीएम फडणवीस पर बहुत ही तीखे हमले किए। उन्हें एक तरह से मराठा-विरोधी की तरह पेश करने की कोशिश की। लेकिन, सुलझे हुए राजनेता ने कभी मराठा आंदोलनकारी को निशाना नहीं बनाया।
कई मौके आए जब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे जरूर जारांगे से मिले। उनका अनशन तुड़वाने के लिए उन्हें जूस भी पिलाया। लेकिन, फडणवीस और उनके सहयोगी अजित पवार ने उनसे एक रणनीतिक दूरी बनाए रखी। यहां तक कि ये दोनों जारांगे के ग्राउंड-जीरो जालना से भी दूर रहे।
जारांगे कार्ड के फेल होने का सबसे बेहतर उदाहरण येवला सीट
मराठवाड़ा में महायुति के खिलाफ जारांगे फैक्टर किस तरह से नाकाम हुआ है, उसका एक उदाहरण येवला सीट का परिणाम है, जहां से एनसीपी के दिग्गज ओबीसी नेता छगन भुजबल फिर से चुनाव जीते हैं। जारांगे पाटिल भुजबल को मराठा कोटा की मांग का कट्टर विरोधी ही नहीं,उन्हें फडणवीस की कठपुतली भी बताते रहे।
यहां तक कि भुजबल के खिलाफ जारांगे ने येवला में एक रोडशो भी किया और मराठों को ओबीसी कोटे से आरक्षण देने का उन्हें विरोधी बताते हुए मतदाताओं से उन्हें हराने की अपील की। भुजबल के खिलाफ एनसीपी (एसपी) के प्रत्याशी के लिए शरद पवार ने भी प्रचार किया। लेकिन, फिर भी वे 26,400 वोटों से जीत गए। जबकि,अनुमानित 1.35 लाख मराठा आबादी वाली इस सीट पर पवार की पार्टी के उम्मीदवार माणिक राव माधव राव शिंदे भी मराठा हैं।
इस जीत के बाद भुजबल ने जारांगे पर यह कहकर निशाना साधा कि,'उन्होंने फडणवीस और मुझे टारगेट किया...लेकिन जारांगे को याद रखना चाहिए कि मराठा वोटर समझदार हैं, वे आसानी से बहकावे में नहीं आते हैं।'
जलील को भी नहीं दिला सके जीत
जारांगे के बेअसर होने का एक और उदाहरण एआईएमआईएम के पूर्व सांसद और पार्टी के महाराष्ट्र प्रमुख इम्मितियाज जलील हैं। वह मतदान से ठीक पहले भी औरंगाबाद ईस्ट सीट पर अपने समर्थन के लिए जारांगे के पास कैंप कर रहे थे। लेकिन, फिर भी जलील को वे बीजेपी के उम्मीदवार से हारने से बचा नहीं सके।
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जारांगे को तब सबसे ज्यादा झटका लगा होगा, जब बीजेपी जालना लोकसभा क्षेत्र की सभी तीन विधानसभा सीटें भी जीत गई, जहां वह लोकसभा चुनावों में पिछड़ गई थी।
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