Maharashtra: महायुति सरकार के कार्यकाल में महिलाओं को मिली मजबूती, योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन अहम

महाराष्ट्र में महायुति सरकार के कार्यकाल के दौरान महिला सशक्तिकरण पर सीएम शिंदे ने फोकस किया है। प्रदेश में सराकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के चलते महिलाओं का सीएम शिंदे सरकार के प्रति विश्वास मजबूत हुआ। वित्त मंत्री अजित पवार द्वारा प्रस्तुत बजट में विभिन्न योजनाओं की घोषणाएं करके महायुती ने पूरी तस्वीर ही बदल दी। ऐसे में सरकार में शामिल दलों के नेता मौजूदा चुनाव में अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिख रहे हैं। महायुती सरकार की 'मुख्यमंत्री मेरी प्यारी बहन योजना' की सबसे लोकप्रिय स्कीम है, जिसके अंतर्गत पात्र लाभार्थी महिलाओं को हर महीने डेढ़ हजार रुपये उनके बैंक खाते में जमा किए जाते हैं।

शिवसेना में उथल पुथल और शिंदे गुट के अलग होने और एमवीए सरकार गिरने के बाद से ही विपक्षी दल लगातार शिंदे सरकार के कार्यों की आलोचना करे रहे हैं। उद्धव गुट के नेता सीएम नाथ शिंदे पर विश्वासाघात के आरोप में मढ़ रहे हैं। लेकिन सीएम शिंदे, डिप्टी सीएम फडणवीस और पवार तीनों नेताओं ने अलग-अलग मंचों पर जनता को विश्वास दिलाया कि जनकल्याणकारी योजनाएं स्थायी रूप से जारी रहेंगी। शिंदे सरकार ने इस बीच दावा किया है कि महिला कल्याण योजना के तहत लगभग ढाई करोड़ महिलाओं का पंजीकरण किया गया है, जिनमें से अधिकांश महिलाओं के खातों में तीन किस्तें जमा की गई हैं।

CM Eknath Shinde

चुनाव काल के लिए इस योजना के कार्यान्वयन को चुनाव आयोग ने स्थगित कर दिया, फिर भी एक महीने की अग्रिम किस्त सरकार ने अधिक जमा की। इस वर्ष रक्षाबंधन के समय इस योजना की पहली किस्त दी गई थी। दो करोड़ 31 लाख महिलाओं को 17000 करोड़ रुपये सीधे बैंक खाते में जमा किए गए हैं। वहीं चौथी किस्त अब विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित होने के बाद जमा की जाएगी।

2022 में शिंदे सरकार आने के बाद बदल रही तस्वीर

बात महाराष्ट्र में शिवसेवा से शिंदे गुट के अलग होने और महाराष्ट्र के सियासी संकट के परिणाम उद्धव गुट के लिए काफी नुकसानदेह साबित हुए। वहीं तमाम विरोध के बावजूद विधानसभा चुनाव में एकनाथ शिंदे का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। उनके कार्यकाल मे विकास कार्यों के चलते लोग शिवसेना (शिंदे गुट) से लगातार जुड़ रहे हैं। महाविकास आघाड़ी सरकार 2022 के जून महीने में गिरने के बाद शिंदे- फडणवीस की शिवसेना- भाजपा गठबंधन वाली सरकार सत्ता में आई। उसके बाद एक साल के भीतर ही अजित पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस के 40 विधायकों को लेकर गठबंधन सरकार में शामिल हो गए। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के नेतृत्व में लोककल्याणकारी योजनाओं की बौछार कर दी गई। विशेष रूप से महिलाओं को केंद्र मानकर कई योजनाएं चलाई गईं, जिनका लाभ करोड़ों महिलाओं ने उठाया है।

2024 में हुए लोकसभा चुनावों में महायुती को बड़ी पराजय झेलना पड़ा। महाविकास आघाड़ी ने कुल 31 सीटें जीतीं जबकि महायुती को केवल 17 सीटों पर संतोष करना पड़ा। जब एंटी इन्कम्बेंसी का असर महायुती पर पड़ने की चर्चा थी। उस वक्त हरियाणा विधानसभा के नतीजे घोषित होने के बाद महायुती का आत्मविश्वास पूरी तरह बढ़ गया। इसी बीच वित्त मंत्री अजित पवार द्वारा प्रस्तुत बजट में विभिन्न योजनाओं की घोषणाएं करके महायुती ने पूरी तस्वीर बदल दी। ऐसे में एक बार फिर से महायुति गठबंधन की सरकार बनने दावा किया जा रहा है।

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