Maharashtra Floor Test: सीएम एकनाथ शिंदे ने पास की आखिरी परीक्षा, फ्लोर टेस्ट में 164 वोट मिले
महाराष्ट्र: CM एकनाथ शिंदे ने बहुमत से पास की आखिरी परीक्षा, फ्लोर टेस्ट में 164 वोट मिले
मुंबई, 04 जुलाई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आज सोमवार (04 जुलाई) को विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन फ्लोर टेस्ट पास कर ली है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत के दौरान बहुमत का आंकड़ा पार किया है। एकनाथ शिंदे को उनके पक्ष में 164 वोट मिले हैं। बहुमत के लिए 144 वोटों की जरूरत थी। महाराष्ट्र विधानसभा में 288 सीट हैं। विपक्ष की बेंच से विश्वास मत के खिलाफ मतों की गिनती की जाएगी। विपक्ष को 99 वोट मिले हैं।
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एकनाथ शिंदे बनाए गए शिवसेना के विधायक दल के नेता
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष ने एकनाथ शिंदे को शिवसेना का विधायक दल का नेता घोषित किया है। वहीं भरत गोगावले को मुख्य सचेतक बनाया गया है। वहीं शिवसेना विधायक अजय चौधरी की विधायक दल के नेता के रूप में नियुक्ति को खारिज कर दिया गया है।
फ्लोर टेस्ट से पहले एकनाश शिंदे और देवेंद्र फडणवीस ने रविवार की रात एक बैठक की थी। ये दूसरी बार था जब एकनाथ शिंदे सीएम बनने के बाद देवेंद्र फडणवीस के साथ बैठक की।

सीएम शिंदे बोले- किसी विधायक पर नहीं बनाया गया दबाव
हालांकि आज का फ्लोर टेस्ट एकनाथ शिंदे के लिए कोई चुनौती भरा नहीं था। एकनाथ शिंदे के पास 50 से अधिक विधायकों का समर्थन पहले से था। वहीं बीजेपी के पास 106 विधायक थे। विधानसभा सत्र के दौरान एकनाथ शिंदे ने साफ कर दिया था कि किसी भी विधायक पर दबाव नहीं बनाया गया है। बता दें कि पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया था कि एकनाथ खेमे द्वारा विधायकों पर दबाव बनाया गया है।

'महाराष्ट्र फ्लोर टेस्ट में 100 फीसदी से जीतेंगे'
फ्लोर टेस्ट से पहले न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता रावसाहेब पाटिल दानवे ने कहा, आज महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार के लिए अंतिम परीक्षा का दिन है और हम इस परीक्षा में, महाराष्ट्र फ्लोर टेस्ट में 100 फीसदी से जीतेंगे।

संजय राउत बोले- पार्टी में लोग आते हैं और चले जाते हैं
वहीं संजय राउत ने फ्लोर टेस्ट के पहले कहा कि पार्टी में लोग आते हैं और चले जाते हैं, ऐसा हर पार्टी में होता है। हमारे लोग भी गए लेकिन यह लोग चुनकर वापस कैसे आएंगे? यह लोग शिवसेना के नाम और हमारे कार्यकर्ता की मेहनत से चुनकर आए थे। कोई प्रलोभन या किसी एजेंसी के दबाव की वजह से यह लोग चले गए। यह अस्थायी व्यवस्था है।












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