Maharashtra Chunav: शिवसेना में हिन्दुत्व का चेहरा बनकर उभरे एकनाथ शिंदे, चुनाव असली 'अग्निपरीक्षा'
Maharashtra Assembly Election 2024: महाराष्ट्र में कभी बाला साहेब ठाकरे की शिवसेना अपने प्रखर हिन्दुत्व को लेकर विख्यात थी। लेकिन आज वो शिवसेना दो धड़ो में बंट चुकी है। साथ ही पार्टी की कार्यशैली और विचारधारा भी बदल चुकी है। उद्धव ठाकरे जो शिवसेना के एजेंडे के साथ बाला साहेब की विरासत को आगे बढ़ा रहे थे, आज पार्टी के एजेंड और विचारधारा से हटकर कांग्रेस के साथ हैं। ऐसे में महाराष्ट्र में शिवसेना के हिन्दुत्व का चेहरा बनकर उभरने वाले एकनाथ शिंदे की भूमिका काफी अहम हो चुकी है।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना में अपने करियर की शुरुआत से ही संगठन के हिन्दुत्ववादी एजेंडे को मजबूती से अपनाया है। साल 2022 में शिवसेना में विभाजन के बाद, उन्होंने बागी गुट का नेतृत्व किया और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने, जिससे उन्होंने राज्य की राजनीति में एक मजबूत मौजूदगी दर्ज की है।

बाल ठाकरे के विचार और एकनाथ शिंदे
शिवसेना, जो बाल ठाकरे के नेतृत्व में हिन्दुत्ववादी राजनीति की मजबूत पक्षधर रही है, उस धारा को एकनाथ शिंदे ने भी जारी रखा है। हालांकि, शिवसेना का उद्धव ठाकरे गुट भी खुद को हिन्दुत्ववादी पार्टी मानता है, लेकिन उनके के पुरानी साथियों का कहना है कि सत्ता के लिए वो अपने रास्ते से भटक चुके हैं।
एकनाथ शिंदे की शिवसेना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन कर हिन्दुत्व को अपने राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में रखे हुए है। शिंदे ने मुख्यमंत्री बनने के बाद हिन्दू विचारधारा और मंदिरों से जुड़ी नीतियों पर जोर दिया है, जिससे वे शिवसेना के हिन्दुत्ववादी चेहरे के रूप में स्थापित होते जा रहे हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया समीकरण
सीएम एकनाथ शिंदे का यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया समीकरण बनाता है, जहां शिवसेना के दो धड़े अब अलग-अलग हिंदुत्व की व्याख्या कर रहे हैं। आज के वक्त में शिंदे की हिंदुत्व छवि ने शिवसेना का बड़ा चेहरा बना दिया है। एकनाथ शिंदे वो ही राजनीति कर रहे हैं जो कि शिवसेना के सिद्धांतों पर आधारित थी, जो बालासाहेब ठाकरे ने बनाए थे। जिसके चलते शिव सैनिकों के लिए एक आदर्श नेता माने जाते हैं।
उद्धव ठाकरे ने जहां सत्ता के लिए अपने पिता बाला साहेब के द्वारा स्थापित शिवसेना के हिंदुत्व के मुद्दें को दरकिनार रखते हुए शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस से हाथ मिला लिया वहीं एकनाथ शिंदे ने अलग राह चुनते हुए हिंदुत्व के एजेंडे पर राजनीति करने वाली भारतीय जनता पार्टी से हाथ मिलाया। साथ ही सरकार बनाने के बाद उद्धव गुट के आरोपों का डटकर पलटवार भी किया।
हालांकि हिन्दुत्व चेहरा होने के साथ-साथ उनकी महायुति सरकार की योजनाओं ने भी उनको लोगों के बीच स्थापित किया है। ऐसे में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव अब एकनाथ शिंदे और उनकी शिवसेना के लिए असली अग्निपरीक्षा है।












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