Maharashtra Chunav: 2019 में शरद पवार क्यों चाहते थे राष्ट्रपति शासन? फडणवीस ने किया विस्फोटक खुलासा!
Maharashtra Chunav 2024: 20 नवंबर को महाराष्ट्र में चुनाव होना है। लेकिन, 2019 के चुनावों के बाद वहां जो राजनीतिक उठापटक का खेल हुआ था, उससे जुड़े खुलासे अभी भी हो ही रहे हैं। अब एनसीपी-एससीपी के चीफ शरद पवार को लेकर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक विस्फोटक खुलासा किया है।
एनसीपी अध्यक्ष और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि उन्होंने जिस तरह से अचानक सुबह-सुबह देवेंद्र फडणवीस के साथ 2019 के चुनाव के बाद शपथ ली थी, उसके बारे में उनके चाचा शरद पवार को सब मालूम था। उस समय जो राजनीतिक घटनाक्रम हुआ था, उसपर पिछले कुछ दिनों से लगातार खुलासे पर खुलासे हो रहे हैं।

2019 में शरद पवार राष्ट्रपति शासन लगवाना चाहते थे- देवेंद्र फडणवीस
अब देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि शरद पवार तो उस समय यहां तक चाहते थे कि पहले राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए और फिर आराम से बीजेपी और एनसीपी की सरकार गठन का फॉर्मूला तय किया जाए। इससे पहले अजित पवार ने दावा किया था कि तब बीजेपी-एनसीपी की सरकार बनाने को लेकर दिल्ली में उद्योगपति गौतम अडानी के घर पर बैठक हुई थी।
बीजेपी और एनसीपी सरकार के लिए दिल्ली में हुई थी बैठक- फडणवीस
फडणवीस ने द हिंदू को एक इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है, 'वहां एक बैठक हुई था। लेकिन, वह गौतम अडानी के आवास पर नहीं हुई थी। अमित शाह, शरद पवार, अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल और मैं उस बैठक में उपस्थित था। यह बैठक दिल्ली में एक तटस्थ स्थान पर हुई थी। यही वह समय था, जब उद्धव ठाकरे ने निर्णय किया था कि वह हमारे साथ शामिल नहीं होंगे। इसलिए, बीजेपी और एनसीपी को एकसाथ सत्ता में लाने के लिए बैठक हुई थी।'
'लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए राष्ट्रपति शासन की कर रहे थे वकालत पवार'
उन्होंने आगे बताया, 'मुझे अच्छे से याद है, 11 नवंबर (2019) को मेरे पास शरद पवार का एक फोन आया था। बैठक में शरद पवार राष्ट्रपति शासन लगाने का सुझाव दिया था, ताकि वे घूम सकें और लोगों के सामने महाराष्ट्र में स्थायी सरकार बनाने की वकालत कर सकें। सारे निर्णय लिए गए कि किसे कौन सा पोर्टफोलियो दिया जाएगा।'
भाजपा से बात कर अचानक शिवसेना, कांग्रेस के साथ चले गए शरद पवार
हालांकि, बाद में शरद पवार महा विकास अघाड़ी गठबंधन के अगुवा बन गए और उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई। इससे पहले अजित पवार ने अचानक 23 नवंबर, 2019 की सुबह बीजेपी के फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। उन्होंने राज्यपाल को एनसीपी एमएलए के समर्थन का पत्र भी सौंपा। लेकिन, 80 घंटे के अंदर ही फडणवीस ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और सरकार बहुमत साबित किए बिना ही गिर गई।
अजित पवार इस कार्यकाल में तीन-तीन बार बने डिप्टी सीएम
चंद रोज बाद ही अजित पवार वापस अपने चाचा शरद पवार के पास लौट गए। फिर उद्धव ठाकरे की अगुवाई में महा विकास अघाड़ी की कांग्रेस,एनसीपी, शिवसेना की सरकार बनी। इस सरकार में अजित पवार फिर से उपमुख्यमंत्री बन गए और तबतक उस पद पर रहे, जब जून, 2022 में शिवसेना में टूट की वजह से उद्धव की सरकार गिर नही गई।
एमवीए की सरकार गिरने के बाद शिवसेना के एकनाथ शिंदे की अगुवाई में बीजेपी-शिवसेना की महायुति सरकार बनी। कुछ समय बाद अजित पवार एनसीपी तोड़कर इसमें भी शामिल हो गए और फिर से उपमुख्यमंत्री बने, जिस पद पर वह आज भी कायम हैं।












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