एकनाथ शिंदे गुट को राहत, स्पीकर ने बरकरार रखी विधायकों की सदस्यता, उद्धव ठाकरे गुट को झटका
Maharashtra MLA Disqualification: महाराष्ट्र में शिवसेना के दो गुटों में बंटने के बाद सीएम एकनाथ शिंदे सहित 16 विधायकों की अयोग्यता पर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर अपना फैसला सुना दिया। जिसमें एकनाथ शिंदे गुट को बड़ी राहत मिली है। साथ ही सभी विधायकों की सदस्यता बरकरार रखी गई है। ऐसे में अब शिंदे ही महाराष्ट्र के सीएम बने रहेंगे।
स्पीकर राहुल नार्वेकर के फैसले से उद्धव ठाकरे के गुट यूबीटी को बड़ा झटका लगा है। विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे गुट को ही असली शिवसेना माना है। अपने फैसले को पढ़ते हुए राहुल नार्वेकर ने कहा कि ईसीआई के रिकॉर्ड में शिंदे गुट ही असली शिवसेना है।

1200 पेज का फैसले सुनाया
विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने 1200 पेज के इस फैसले के अहम बिंदुओं को पढ़ा, जिसमें उन्होंने छह बिंदुओं पर अपना फैसला सुनाया। इसमें पहला असली शिवसेना कौन? इसी के साथ शिवसेना के 1999 संविधान को ही आधार माना। साथ ही शिव सेना में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का स्थान सबसे ऊपर बताया गया है।
उद्धव गुट की दलील खारिज
महाराष्ट्र के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने कहा कि एकनाथ शिंदे को हटाने का अधिकार उद्धव ठाकरे को नहीं है। शिंदे को हटाने का फैसला शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ही कर सकती है। इसी के साथ उन्होंने असली पार्टी पर उद्धव गुट की दलील खारिज कर दी।
शिंदे गुट ही असली शिवसेना
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा, "21 जून 2022 को जब प्रतिद्वंद्वी गुट बना तब शिंदे गुट ही असली शिवसेना राजनीतिक दल था।" उन्होंने कहा, "शिवसेना के 2018 संशोधित संविधान को वैध नहीं माना जा सकता क्योंकि यह भारत के चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है। रिकॉर्ड के अनुसार, मैंने वैध संविधान के रूप में शिव सेना के 1999 के संविधान को ध्यान में रखा है।
उद्धव के पास शिंदे को हटाने की शक्ति नहीं
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि उद्धव ठाकरे के पास एकनाथ शिंदे को हटाने की कोई शक्ति नहीं थी। नार्वेकर ने विधायकों की अयोग्यता याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा, "उद्धव ठाकरे के पास मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को शिवसेना से हटाने की कोई शक्ति नहीं थी। शिवसेना प्रमुख के पास पार्टी के किसी भी नेता को हटाने की कोई शक्ति नहीं है। इसलिए, एकनाथ शिंदे को विधायक दल के नेता पद से हटाना स्वीकार नहीं किया जा सकता है।"
शिवसेना का 1999 का संविधान आधार
स्पीकर ने कहा कि शिंदे गुट ने कहा है कि उद्धव ठाकरे गुट ने 2018 का संविधान गुपचुप तरीके से लागू किया है। उद्धव ठाकरे गुट की तरफ से दिए गए पार्टी के कॉन्स्टिट्यूशन पर तारीख नहीं थी, इसलिए वो मान्य नहीं किया गया। शिवसेना का 1999 का संविधान हमने आधार माना है। 2018 का संशोधित संविधान चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है। इसलिए हमने 1999 वाले संविधान को आधार माना है।
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