Maharashtra Chunav : पूर्व CM अशोक चव्हाण बटेंगे तो कटेंगे नारे से असहमत, कहा-'चुनावी माहौल प्रभावित होगा'
Maharashtra Assembly Elections 2024: भाजपा सांसद और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने बटेंगे तो कटेंगे जैसे विवादास्पद नारे की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अपमानजनक और अप्रासंगिक बताया है। एक साक्षात्कार के दौरान चव्हाण ने बुधवार को कहा कि इस प्रकार की बयानबाजी का जनता पर सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा और यह चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि भाजपा और सत्तारूढ़ महायुति का ध्यान राज्य और राष्ट्र के विकास पर है और नेताओं को अपनी भाषा में संयम बनाए रखना चाहिए। ताकि किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए आयोजित रैलियों में इस नारे का इस्तेमाल किया था। अशोक चव्हाण ने कहा ने चुनावों में नारे दिए जाते हैं। लेकिन यह नारा गलत संदर्भ में है और मुझे नहीं लगता कि इसे जनता से सराहना मिलेगी। उन्होंने राजनीतिक नेताओं को अभियानों के दौरान जिम्मेदार व्यवहार करने की सलाह दी।

इसी दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में चुनाव में वोट जिहाद के खिलाफ धर्म-युद्ध का संदर्भ दिया था। चव्हाण ने इस बयान को भी तूल न देते हुए इसे कमतर आंका और स्पष्ट किया कि महायुति और भाजपा का असली एजेंडा राज्य के विकास के लिए काम करना है। जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और महाराष्ट्र के विजन के अनुरूप है।
मराठा आरक्षण मुद्दे पर भी बोले अशोक चव्हाण
मराठा आरक्षण मुद्दे के संदर्भ में चव्हाण ने आश्वासन दिया कि महायुति सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशीलता से विचार कर रही है। महाराष्ट्र विधानमंडल ने फरवरी में मराठा समुदाय के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव पास किया था। लेकिन कुछ कार्यकर्ता इसे अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत लाने की मांग कर रहे हैं। अशोक चव्हाण ने कहा कि महायुति सरकार इस पर भविष्य में विचार करेगी और राज्य के हित में फैसले लेगी।
चुनावी उत्साह पर चर्चा
भाजपा सांसद अशोक चव्हाण ने आगामी चुनावों को लेकर सकारात्मक माहौल का हवाला देते हुए कहा कि जनता में जबरदस्त उत्साह है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों का जिक्र करते हुए बताया कि जनता से मिले समर्थन से महायुति के उम्मीदवारों में जीत का विश्वास बढ़ा है।
राजनीतिक सफर में बदलाव पर विचार
कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने के फैसले पर चव्हाण ने बताया कि यह कदम उन्होंने अपने करियर के हित में लिया था। 2010 में आदर्श हाउसिंग घोटाले के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद से उन्होंने राजनीतिक स्थिति का मूल्यांकन करते हुए भाजपा से जुड़ने का फैसला किया।
अशोक चव्हाण ने आगामी विधानसभा चुनावों में महायुति के प्रदर्शन को लेकर आशावाद जताया है और 288 सीटों वाली विधानसभा में आरामदायक बहुमत की उम्मीद की है। जनता के उत्साह को देखते हुए चव्हाण को विश्वास है कि महायुति की नीतियां और योजनाएं लोगों को प्रभावित करेगी और चुनाव में सकारात्मक परिणाम लाएगी।












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