Pune: वारकरी भक्तों पर लाठीचार्ज का मुद्दा गरमाया, विपक्ष बोला- 'महाराष्ट्र में हुआ मुगलों का पुनर्जन्म'
वारकरी भक्तों पर लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष महाराष्ट्र सरकार पर हमलावर है। हालांकि डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इससे इनकार किया है।
महाराष्ट्र के पुणे जिले में रविवार को वारकरी भक्तों पर लाठीचार्ज के मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। विपक्षी दल इसके लिए लगातार राज्य सरकार पर निशाना साध रहे। शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत ने कहा कि मुगलों का महाराष्ट्र में पुनर्जन्म हुआ है। हालांकि सरकार इस घटना से इनकार कर रही।
राउत ने ट्वीट कर लिखा कि ओह ओह...हिंदुत्व सरकार के ढोंग की पोल खुल गई। उनका नकाब उतर गया। औरंगजेब किस प्रकार भिन्न व्यवहार कर रहा था? मुगलों का महाराष्ट्र में पुनर्जन्म हुआ है।

वहीं एनसीपी नेता छग्गन भुजबल ने ट्वीट कर लिखा कि श्रीक्षेत्र आलंदी में वारकरी भाइयों के साथ हुआ व्यवहार अपमानजनक है। वारकरी संप्रदाय की नींव रखने वाले महान संत ज्ञानेश्वर महाराज की उपस्थिति में वारकरियों का ये अपमान घोर निंदनीय है। क्या वारकरी संप्रदाय के प्रति सरकार की कोई जिम्मेदारी है या नहीं?
ये है आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रविवार को बड़ी संख्या में भक्त आलंदी के श्रीक्षेत्र मंदिर में एक समारोह के लिए पहुंचे थे। मंदिर में एंट्री के दौरान उनकी पुलिस से बहस हो गई। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
एक अन्य रिपोर्ट मुताबिक हर साल आलंदी से पंढरपुर के विठ्ठल मंदिर के लिए पदयात्रा होती है। इस बार ये 11 जून को शुरू हुई। मंदिर में केवल 75 भक्तों को प्रवेश की इजाजत थी, लेकिन वहां पर 400 से ज्यादा लोग पहुंच गए। वो मंदिर में एंट्री चाहते थे, ऐसे में पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
डिप्टी सीएम ने दी सफाई
वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने लाठीचार्ज की बात से इनकार किया है। उन्होंने नागपुर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमने पिछले साल इसी जगह हुई भगदड़ से सीख ली और मंदिर में कम प्रवेश पास देने की कोशिश की। इस बार तीर्थयात्रा में शामिल प्रत्येक ग्रुप को 75 पास जारी करने का निर्णय लिया गया था।
डिप्टी सीएम के मुताबिक कुछ भक्तों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए, जिस पर पुलिस ने उनको रोकने की कोशिश की। इस बीच उनमें मामूली हाथापाई हुई, जिसमें 6 पुलिसकर्मी घायल हुए।












Click it and Unblock the Notifications