BMC चुनाव में अभी कितनी सीटें जीत सकती है बीजेपी ? 150 के लक्ष्य से पहले आंतरिक सर्वे का नतीजा जानिए
मुंबई, 6 सितंबर: भारतीय जनता पार्टी ने बीएमसी चुनाव में जीत के लिए अभी से पुख्ता रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इसकी कमान संभाल चुके हैं। वह मुंबई के प्रसिद्ध लालबाग के राजा का दर्शन करने पहुंचे थे, उसके साथ ही उन्होंने देश के सबसे अमीर निगम में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए कार्यकर्ताओं को मंत्र भी दे दिया। पार्टी बीएमसी चुनाव में कुल 150 से ज्यादा सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। लेकिन, फिलहाल उसका एक आंतरिक सर्वे भी आ चुका है, जिसमें अभी चुनाव हुए तो उसे कितनी सीटें मिलने का अनुमान है, यह जानकारी सामने आई है।

बीएमसी चुनाव में 150 का आंकड़ा पार करने का लक्ष्य
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दो दिवसीय मुंबई दौरे के बाद बीएमसी चुनावों के लिए भाजपा ने कमर कस ली है। वह बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों में 227 सीटों में से 150 से ज्यादा सीटें जीतने के लिए मिशन मोड में जुट गई है। शाह के मुंबई दौरे से पार्टी कार्यकर्ताओं को सीधा संदेश यही मिला है कि उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना को मुंबई की जमीन पर समेटने के लिए संघर्ष के लिए तैयार हो जाना है। दरअसल, बीएमसी का चुनाव इस बार भाजपा के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है और यह अमित शाह के दौरे से निकली बातों से भी जाहिर हो रही है।

2019 का 'घाव' नहीं भुला पाई है बीजेपी
शाह के मुंबई दौरे से जो एक बात जो मोटे तौर पर सामने आई है, वह ये है कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महा विकास अघाड़ी सरकार गिरने भर से बीजेपी का मन शांत नहीं हुआ है। वह 2019 में महाराष्ट्र की राजनीति में मारी गई राजनीतिक 'गुलाटी' का पूरा 'हिसाब' करना चाहती है। तब उद्धव ठाकरे ने विधानसभा चुनावों में बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी ठोककर परिस्थितियां ही बदल दी थी। उन्होंने दावा किया था कि खुद अमित शाह ने बंद कमरे में उनसे इसका वादा किया था, जिसे भारतीय जनता पार्टी बार-बार सिरे से खारिज कर चुकी है। उस समय बीजेपी नेतृत्व मुख्यमंत्री पद के लिए उद्धव ठाकरे के मोलभाव से इतना चिढ़ गया कि साफ कह दिया कि पार्टी मुख्यमंत्री के पद पर कोई समझौता नहीं करेगी। इसके चलते गठबंधन टूट गया और ठाकरे ने कांग्रेस और एनसीपी का समर्थन लेकर सरकार बना ली।

उद्धव ठाकरे को बीएमसी से उखाड़ने की मुहिम में जुटी बीजेपी
भाजपा उस 'विश्वासघात' को भुलाने के लिए कभी तैयार नहीं हुई। ढाई साल बाद एकनाथ शिंदे ने उद्धव से बगावत किया और उन्होंने ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना के 55 में से 40 एमएलए और 18 सांसदों में से 12 को अपने साथ कर लिए। उद्धव की 'सेना' के खाते में आज सिर्फ 15 एमएलए और 6 सांसद रह गए हैं। राज्य में बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना की सरकार बन चुकी है। उद्धव अपनी पार्टी में टूट के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हैं। लेकिन, भाजपा इन आरोपों को सिरे से खारिज करती है। लेकिन, बीजेपी नेतृत्व के 2019 के नवंबर वाले घाव अभी भरे नहीं हैं। राज्य में सरकार बनने के बाद भी पार्टी मानती है कि जबतक बीएमसी से ठाकरे का वर्चस्व खत्म नहीं होता, उसका 'बदला' पूरा नहीं होगा। जाहिर है कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और वहां की अमीर बीएमसी पर कब्जा ठाकरे को राजनीतिक तौर पर सशक्त बनाती है। इसलिए बीजेपी उनकी पार्टी को यहीं से उखाड़ने की मुहिम छेड़ चुकी है।

'राजनीति में विश्वासघात बर्दाश्त नहीं'
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई में पार्टी के नेताओं, कॉर्पोरेटरों और चुने हुए प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा, 'बीएमसी की बड़ी लड़ाई के लिए नए जोश के साथ फील्ड के काम में वापस जुट जाएं।' बीएमसी की सत्ता पर तीन दशकों के कब्जे को हटाने के लिए आक्रामक रणनीति अपनाने के लिए कहते हुए वे पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे पर सीधा हमला करने से भी नहीं चूके। उन्होंने दो टूक कह दिया कि 'अगर शिवसेना घटकर छोटी पार्टी हो गई है तो इसके लिए उद्धव ठाकरे जिम्मेदार हैं.....' उन्होंने यह कहने में भी परहेज नहीं किया कि 'उद्धव ठाकरे ने बीजेपी के साथ विश्वासघात किया है। राजनीति में कुछ भी बर्दाश्त किया जा सकता है, लेकिन विश्वासघात नहीं।'

आंतरिक सर्वे के मुताबिक भाजपा जीत सकती है 100 से ज्यादा सीट
बीएमसी में कुल 227 सीटें हैं और भाजपा ने 150 सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है। आजतक कोई भी पार्टी इतनी सीटें नहीं जीत सकी है। 2017 के चुनाव में शिवसेना को 84, बीजेपी को 82, कांग्रेस को 22 और एनसीपी को 9 सीटें मिली थीं। भाजपा के आंतरिक सर्वे से पता चला है कि वह 100 सीटें पार कर सकती है। अब पार्टी की रणनीति है कि इसे 150 को पार कराने के लिए जीती हुई 82 सीटों के अलावा उन 30-35 सीटों पर फोकस करे, जहां 500 से 2000 वोटों के अंतर से हार गई थी।

शिंदे के साथ गठबंधन से हौसले और बुलंद
पार्टी के रणनीतिकार मान रहे हैं कि अगर थोड़ी सी कोशिश की जाए तो ये 30 से 35 अतिरिक्त सीटें उसके खाते में आ सकती हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ भी उसका गठबंधन है, जिससे उसके हौसले और बुलंद हुए हैं। उसे लगता है कि ऐसे में अतिरिक्त 40 से 45 सीटें अपनी झोली में कर पाना मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव कतई नहीं है। पार्टी के भीतर के लोगों का दावा है कि कई कॉर्पोरेटर पहले जो ठाकरे के साथ थे, वह बीजेपी-शिंदे शिवसेना के साथ जुड़ सकते हैं।

आशीष शेलार को दी जिम्मेदारी
सबकुछ रणनीति के तहत आगे बढ़े इसलिए बीजेपी ने अपने वरिष्ठ नेता आशीष शेलार को मुंबई की कप्तानी दे दी है। बांद्रा के रहने वाले शेलार पहले दो बार मुंबई बीजेपी के चीफ रह चुके हैं। उन्हीं के नेतृत्व में पार्टी बीएमसी में 2012 की 33 सीट से बढ़कर 2017 में 82 सीटों तक पहुंची थी। मातोश्री से सीधे भिड़ने के लिए जाने जाने वाले शेलार पार्टी के लिए आजमाए और परखे हुए नेता हैं। इनके अलावा डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का नेतृत्व सभी रणनीति को अमलीजामा पहनाने के लिए काफी है।












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