मराठी आंदोलन की बदौलत कैसे महाराष्ट्र बना राज्य, मुंबई बनी राजधानी? 105 लोगों को गंवानी पड़ी थी जान
Marathi language Row: महाराष्ट्र सरकार ने त्रिभाषा नीति को मंजूरी देते हुए कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बना दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस फैसले के बाद विपक्ष आक्रामक हो गया है।
हिंदी भाषा को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाए जाने के बाद महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी की लड़ाई फिर जोर पकड़ चुकी है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे आक्रामक हो गए हैं। वहीं कांग्रेस भी स्कूलों में हिंदी लागू करने का पुरजोर विरोध कर रही है।

चूंकि स्थाीनय निकाय चुनाव आने वाले हैं इसलिए विपक्षी दलों को मराठी भाषी लोगों का दिल जीतने के लिए ये मुद्दा और समय अनुकूल लग रहा है। खास तौर पर मुंबई जो ऐसा शहर है जहां पर दशकों से मराठी बनाम गैर-मराठी का मुद्दा छाया रहा है। मुंबई में मराठी भाषी आंदोलन जो एक बार फिर जोर पकड़ चुका है। ऐसे ही वर्षों पहले मराठी आंदोलन की वजह से ही महाराष्ट्र राज्य का गठन हुआ और मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी बनी। जिसकी यादें एक बार फिर ताजा हो गईं हैं।
1950 में हुआ था ये आंदोलन
दरअसल,1950 के दशक के बीच में जब तत्कालीन बॉम्बे राज्य के अंदर एक अलग मराठी भाषी राज्य बनाने के लिए मराठी भाषी आंदोलन की शुरूआत की गई थी। संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन ने मराठी भाषी लोगों के लिए अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन किया जिसमें वर्तमान उत्तर पश्चिमी कर्नाटक और गुजरात के कुछ हिस्से शामिल थे।
105 लोगों को गंवानी पड़ी थी जान
तमाम विरोध के बावजूद ये आंदोलन जोर पकड़ता गया और मुंबई को महाराष्ट्र की राजधानी बनाने की मांग की गई। इस आंदोलन में 105 लोग पुलिस की गोलियों का शिकार हुए और उन्होंने इस आंदोलन के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
1 मई 1960 को आंदोलन की बदौलत महाराष्ट्र का गठन हुआ
अंतत: संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन सफल हुआ और मराठी भाषी कार्यकर्ताओं के विरोध और बलिदान के बाद 1मई 1960 को अधिकारिक रूप से महाराष्ट्र का गठन हुआ और मुंबई राजधानी बनी।
बॉम्बे पुनर्गठन अधिनियम पारित किया
संसद ने बॉम्बे पुनर्गठन अधिनियम पारित किया, जिसमें प्रावधान था कि 1 मई 1960 से एक नया राज्य गुजरात बनाया जाएगा जिसमें बॉम्बे राज्य के निम्नलिखित क्षेत्र शामिल होंगें। इसके अलावा उक्त क्षेत्र बॉम्बे राज्य का हिस्सा नहीं रहेंगे, और शेष बॉम्बे राज्य को महाराष्ट्र राज्य के रूप में जाना जाएगा। तब मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी बन गई।
बालासाहेब ने शिवसेना की स्थापना कर मराठी के लिए चलाया ये अभियान
इसी के छह साल बाद महाराष्ट्र में मराठी मानुष की रक्षा करने और बैंक की नौकरियों और व्यवसाय में गुजरातियों, दक्षिण भारतीयों के कथित प्रभुत्व को खत्म करने के लिए बाल ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की थी। 80 के दशक में शिवसेना ने दक्षिण भारतीयों और यूपी, बिहार समेत मुंबई में बसे उत्तर भारतीयों के खिलाफ बृहद रैली निकाली। अपने शासन में बाल ठाकरे की शिवसेना ने दुकानों, प्रतिष्ठानों में मराठी नेम प्लेट लगाना अनिवार्य कर दिया था।












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