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महाराष्ट्र में एजुकेशन इंडेक्स गिरने पर एक्शन में सरकार, राज्य में करेगी 50 हजार शिक्षकों की भर्ती

महाराष्ट्र में 50 हजार शिक्षकों की भर्ती सरकार करेगी। इसकी जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने दी।

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के स्कूलों में 50 हजार शिक्षकों की भर्ती करने का फैसला किया है। इस बात की जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने शुक्रवार को अपने बयान में कहा। उन्होंने ये भी दावा किया कि एजुकेशन परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में महाराष्ट्र की रैंकिंग में गिरावट मूल्यांकन की एक नई पद्धति के कारण थी।

पत्रकारों से बात करते हुए केसरकर ने कहा कि 30 हजार पद पहले चरण में और शेष 20 हजार पद दूसरे चरण में भरे जाएंगे। बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी, जिसके कारण नियुक्ति में देरी हुई। शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया अब शुरू होगी और इसके लिए एक सरकारी प्रस्ताव जारी किया जाएगा।

deepak kesarkar

स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि कुछ स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और ये सुनिश्चित करने के लिए की छात्रों को असुविधा न हो, शिक्षा विभाग ने नए शिक्षकों की नियुक्ति तक सेवानिवृत्त शिक्षकों को अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया है। जैसे ही शिक्षकों की भर्ती होगी, उन्हें जिला परिषद स्कूलों और सहायता प्राप्त संस्थानों में तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य सरकार 17 हजार स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने की योजना बना रही है।

शिक्षा प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक में महाराष्ट्र दूसरे स्थान से खिसककर 7वें स्थान पर आ गया। इस पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने चिंता जाहिर की । इस पर दीपक केसरकर ने कहा कि अब पैरामीटर बदल दिए गए हैं क्योंकि सभी राज्यों की उपलब्धि 90 प्रतिशत से अधिक हो गई है। नए मानदंडों के अनुसार, कोई भी राज्य पहली पांच श्रेणियों में कटौती नहीं कर सकता। केवल चंडीगढ़ और पंजाब ही छठा स्थान हासिल कर सके और अन्य सभी राज्य 7वां स्थान हासिल कर सके। ये मूल्यांकन की एक नई पद्धति है। हालांकि, उन्होंने कहा कि NCP प्रमुख की उठाई गई चिंताओं पर गौर किया जाएगा।

दीपक केसरकर ने स्वीकार किया कि सहायता प्राप्त निजी स्कूलों का स्तर जिला परिषद स्कूलों की तुलना में नीचे चला गया है। इन निजी (सहायता प्राप्त) स्कूलों को केंद्रीय योजनाओं से कोई मदद नहीं मिलती है, लेकिन सरकार इन स्कूलों का सारा खर्च उठाती है। अगर इन स्कूलों को सरकारी दर्जा मिलता है, तो उन्हें केंद्र सरकार की सभी योजनाएं मिलेंगी। इन स्कूलों को सरकारी स्कूल मानकर मदद करने के लिए केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया है। उनके विभाग ने छात्रों के सुधार का आंकलन करते समय "नवीनतम तकनीक" का उपयोग करने का निर्णय लिया है। यदि आप कौन बनेगा करोड़पति (प्रश्नोत्तरी आधारित टेलीविजन कार्यक्रम) देखते हैं, तो इसमें एक रिमोट कंट्रोल जैसा उपकरण होता है जिसका उपयोग दर्शक अपनी पसंद दर्ज करने के लिए करते हैं। इसी तरह की तकनीक उत्तर देते समय छात्रों के हाथ में होगी। इससे हमें सही आकलन करने में मदद मिलेगी और उन्हें मार्गदर्शन मिलेगा।

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