Encounter: ये था आजाद भारत का पहला पुलिस एनकाउंटर, दाऊद के भाई को उतारा था मौत के घाट
Manya Surve: मन्या सुर्वे 80 के दशक में ऐसा खूंखार अपराधी था जिससे अंडर वर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम भी डरता था।

India First Encounter: उत्तर प्रदेश के माफिया डाउन अतीक अहमद के बेटे असद अहमद का गुरुवार को झांसी में एनकाउंटर कर दिया गया। अब इस एनकाउंटर के बाद अधिकांश लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ कर रहे हैं। हालांकि, कई विपक्षी नेता इस एनकाउंटर पर सवाल भी उठा रहे हैं। तो चलिए आज हम बताने जा रहे हैं आजाद भारत का पहला एनकाउंटर कब हुआ था? किसने किया था? वह खूंखार अपराधी कौन था जिससे दाऊद भी खौफ खाता था?
अंडरवर्ल्ड डॉन मन्या सुर्वे (Manya Surve) का हुआ था पहला एनकाउंटर
भारत में पहला पुलिस एनकाउंटर साल 1982 में अंडरवर्ल्ड डॉन मन्या सुर्वे (Manya Surve) का मुंबई में हुआ था। मुंबई पुलिस के असिस्टेंट कमिश्नर इशाक बागवान की टीम ने इस खूंखार अपराधी का एनकाउंटर किया था। कहा जाता है कि मान्या सुर्वे के खौफ से दाऊद इब्राहिम भी डरता था।
जानें कौन था खूंखार अपराधी मन्या सुर्वे जो पढ़ाई में भी था टॉपर
मन्या सुर्वे (Manya Surve) का जन्म साल 1944 में हुआ था। मान्या सुर्वे का असली नाम मनोहर अर्जुन सुर्वे था। चूंकि, उसके गैंग के लोग उसे मन्या पुकारते थे, इसलिए पुलिस रिकॉर्ड में भी उसका नाम मन्या सुर्वे ही दर्ज हो गया। वह मुंबई में पैदा नहीं हुआ लेकिन पर वह पला , पढ़ा और बड़ा हुआ मुंबई में ही। उसने मुंबई के कीर्ति कॉलेज से ग्रेजुएशन से बीएससी किया। रिकॉर्ड के मुताबिक बीएससी में उसे 75 फीसदी नंबर आए थे।
सौतेले भाई ने दिलाया अपराध की दुनिया में कदम
मन्या सुर्वे (Manya Surve) को अपराध की दुनिया में उसका सौतेला भाई भार्गव दादा लाया। जब वह अपराध की दुनिया में आया, तो उसने अपने साथ पढ़े अपने कुछ दोस्तों को भी अपने गैंग में शामिल कर लिया। भार्गव की अपने जमाने में दादर इलाके में खासी दहशत थी।
1969 में दोस्तों के साथ मिलकर की थी पहली हत्या
भार्गव और उसके दोस्त मन्या पोधाकर के साथ मिलकर मन्या सुर्वे ने सन 1969 में किसी दांदेकर का मर्डर किया था। हालांकि कई लोग कहते हैं कि उसे फंसाया गया था। इस कत्ल में तीनों गिरफ्तार हुए, उन पर मुकदमा चला और तीनों को आजीवन कारावास की सजा हुई। सजा के बाद उसे बल्कि पुणे की यरवदा जेल में शिफ्ट कर दिया गया।
मान्या ने दाऊद के भाई को सरे आम मौत के घाट उतारा था
मान्या सुर्वे वास्तविकता में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके बड़े भाई सबीर इब्राहिम का सबसे बड़ा दुश्मन था। कहा जाता है कि मान्या ने दाऊद के बड़े भाई सबीर इब्राहिम को सरे आम मौत के घाट उतार दिया था। दाऊद ने मान्या पर कई बार हमले का प्रयास किया लेकिन कुछ नहीं बिगाड़ सका। मान्या ने दाऊद के गुर्गों के खिलाफ काफी लंबे समय तक लड़ाई लड़ी। उसने दाऊद को कई बार चुनौती दी।
जेल में दुश्मनी के बाद उसे रत्नागिरी जेल में डाल दिया गया
कैद की अवधि के दौरान, गैंगस्टर सुहास के साथ उनकी भयंकर प्रतिद्वंद्विता के कारण उन्हें रत्नागिरी जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था। इस जेल में रहते हुए, उन्होंने भूख हड़ताल में भाग लिया और बहुत अधिक वजन कम करना शुरू कर दिया। कुछ दिन में वह बीमार होने लगा जिसके कारण पुलिस अधिकारी उन्हें पास के एक अस्पताल में ले गए ।
अस्पताल से भागा फिर बनाई खतरनाक गैंग
मन्या सुर्वे ने अस्पताल में भर्ती होने का फायदा उठाया और 14 नवम्बर 1979 को वह पुलिस को चकमा देकर अस्पताल से भाग लिया। वहां से फिर वह मुंबई आ गया। मुंबई आने के बाद उसने छिप-छिपकर खतरनाक गैंग तैयार करने लगा। उसने अपने गैंग में धारावी के शेख मुनीर, डोंबिवली के विष्णु पाटील और मुंबई के उदय शेट्टी को खासतौर पर रखा। यही नहीं, दयानंद शेट्टी, परुषराम काटकर जैसे कुख्यात अपराधी भी इस गैंग में शामिल हुए।
अपराध का दूसरा नाम बन गया था मान्या सुर्वे
खतरनाक गैंग बनाने के बाद मन्या सुर्वे के गुर्गों ने सबसे पहले 5 अप्रैल 1980 को मुंबई के दादर में एक एंबेसडर कार चुराई और इसमें बैठकर लक्ष्मी ट्रेडिंग कंपनी में जमकर लूटपाट मचाई। इसके बाद इस गैंग ने धारावी के काला किला इलाके में उस शेख अजीज पर कातिलाना हमला किया, तो मन्या सुर्वे के दोस्त शेख मुनीर का दुश्मन था। बाद में उसने विदेशी उपन्यास में लिखी मोडस ऑपरेंडी को आजमा कर माहिम में बरखा बिजली इलाके से एक कार चुराई और फिर गोवंडी में 1 लाख 26 हजार व सायन में कैनरा बैंक में करीब डेढ़ लाख रुपये की दिनदहाड़े लूट की।
पुलिस पड़ी पीछे
मान्यो सुर्वे का जब अपराध बढ़ने लगा तो मुंबई पुलिस पर सवाल उठने लगे। जिसके बाद पुलिस ने सबसे पहले उसके साथी शेख मुनीर को जून , 1981 में कल्याण से पकड़ा। दूसरे साथियों दयानंद शेट्टी और काटकर को भी गोरेगांव से गिरफ्तार किया गया। मन्या सुर्वे ने यहां भी पुलिस को चकमा दे दिया और गुप्त ठिकाने पर छिप गया।
गर्लफ्रैंड के चक्कर में हुआ एनकाउंटर
जब पुलिस वहां पहुंची , तो वह वहां से भी चंद मिनट पहले भाग लिया , लेकिन जब 11 जनवरी , 1982 को वह वडाला में आंबेडकर कॉलेज के पास स्थित एक ब्यूटी पार्लर में अपनी गर्लफ्रेंड को लेने आया , तो वह तब के पुलिस अधिकारियों इशाक बागवान, राजा तांबट के साथ हुई पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।












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