100 करोड़ की 'वसूली': जूलियो रिबेरो का जांच करने से इनकार, कहा- 'शरद पवार खुद सक्षम, वही करें'

मुंबई। महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर लगे हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली के आरोपों से महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आया हुआ है। ये आरोप किसी विपक्षी पार्टी के नेता ने नहीं बल्कि मुंबई के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने लगाए हैं जिन्होंने सीएम उद्धव ठाकरे को चिठ्ठी लिखी थी। इस चिठ्ठी में आरोप है कि महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने एंटीलिया केस में गिरफ्तार पुलिस अफसर सचिन वाजे को हर महीने 100 करोड़ की वसूली का टारगेट दे रखा था। इस चिठ्ठी के बाद एनसीपी नेता शरद पवार को भी सामने आना पड़ा और उन्होंने आरोपों को गंभीर बताते हुए जाने माने पूर्व पुलिस अधिकारी जूलियो रिबेरो से मामले की जांच कराने की बात कही। ये रिबेरो की ही साख है कि विपक्षी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी जांच के लिए रिबेरो का नाम लिया। लेकिन इस मामले पर रिबेरो का क्या कहना है आइए ये जानते हैं।

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    Anil Deshmukh Case: Julio Rebeiro ने 100 Core वसूली मामले की जांच से किया इंकार | वनइंडिया हिंदी
    मेरे जैसे लोग दूर ही भले- रिबेरो

    मेरे जैसे लोग दूर ही भले- रिबेरो

    एनडीटीवी से बात करते हुए रिबेरो ने कहा कि वह इस जांच का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं। रिबेरो ने इसकी जो वजह बताई है वह बेहद ही चौंकाने वाली है। पहले तो उन्होंने कहा कि वह 92 साल के हैं और इस उम्र में ऐसी जांच का जिम्मा उठाने के लिए तैयार नहीं हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि अगर वह ठीक भी होते तो भी इस जांच में अपने हाथ न डालते।

    रिबेरो ने कहा कि यह मामला इतना धुंधला और पेचीदा है कि मैं इसकी जांच नहीं करता। इसमें राजनेता और महत्वाकांक्षी पुलिस अफसर शामिल हैं। ये पुलिस अफसर किस लॉबी से हैं और क्या करते हैं इसमें मेरे जैसे लोगों के लिए कोई जगह नहीं है और मैं ऐसी किसी जांच का हिस्सा नहीं बनूंगा।

    शरद पवार को खुद करनी चाहिए जांच- रिबेरो

    शरद पवार को खुद करनी चाहिए जांच- रिबेरो

    उन्होंने आगे यह भी कहा कि आखिर मैं क्यों वर्तमान में सत्ता में शामिल एक गृह मंत्री के खिलाफ जांच की अगुवाई करूं। शरद पवार ने उनका नाम जांच के लिए सुझाया है इस पर उन्होंने कहा कि शरद पवार पार्टी प्रमुख हैं। वह सक्षम हैं और उन्हें खुद जांच करनी चाहिए। वह सब जानते हैं और उन्हें खुद इस मामले में एक्शन लेना चाहिए। उन्हें ये करना होगा क्योंकि लोग इस सबसे तंग आ चुके हैं।

    मुंबई के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह के आरोपों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वह कैसे चुप रहे। जब आपके नीचे के अधिकारी को सीधे गृहमंत्री बुलाकर वसूली का आदेश दे रहे थे तो उन्हें सीधे गृहमंत्री से मिलना चाहिए था और आपत्ति जतानी जतानी चाहिए थी। अगर वह न मानते तो इस्तीफा दे देना चाहिए था।

    अधिकारियों की महत्वाकांक्षा को बताया जिम्मेदार

    अधिकारियों की महत्वाकांक्षा को बताया जिम्मेदार

    जब रिबेरो से पूछा गया कि वह खुद में जांच में हिस्सा नहीं ले रहे हैं लेकिन किसी अफसर का नाम जांच के लिए देना हो तो वह किसके नाम की सलाह देंगे ? इस पर पूर्व टॉप पुलिस अफसर ने कहा कि "नहीं, मैं ऐसा बिल्कुल नहीं करूंगा। किसी अच्छे आदमी के नाम का सुझाव देकर उन्हें ऐसी जटिल स्थिति में मैं नहीं डालूंगा। यह बहुत मुश्किल स्थिति है क्योंकि इसमें राजनीतिक कड़ियों के अलावा, अब मुंबई पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ हत्या के आरोप लगाए जा रहे हैं। यह सब महत्वाकांक्षी पुलिस अधिकारियों और बेईमान राजनेताओं के कारण हो रहा है।'

    कौन हैं जूलियो रिबेरो ?
    जूलियो रिबेरो पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे हैं। पुलिस सेवा में अपने काम के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है। वह मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे हैं। बाद में उन्हें सीआरपीएफ का डायरेक्टर जनरल (डीजी) बनाया गया। वह गुजरात पुलिस के डीजी भी रहे। उन्होंने 80 के दशक में पंजाब पुलिस के डीजी के रूप में सिख चरमपंथ का मुकाबला किया।

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