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एकनाथ शिंदे कैंप को मिला बड़ा मौका, BMC चुनाव से पहले फंस गई उद्धव की Shiv Sena (UBT) ?

महाराष्ट्र की राजनीति में बीएमसी पर आई सीएजी की एक रिपोर्ट ने राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है। इस रिपोर्ट में हजारों करोड़ रुपए का ठेका देने में बीएमसी पर मनमानी का आरोप है। उद्धव कैंप के लिए यह बड़ा झटका है।

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बीएमसी चुनाव से पहले आई सीएजी की एक रिपोर्ट से महाराष्ट्र की राजनीति दिलचस्प हो गई है। बीएमसी पर पिछले ढाई दशकों से भी ज्यादा समय के शिवसेना का कब्जा रहा है और अभी भी देश के सबसे अमीर नगर निकाय पर उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली सेना (शिवसेना उद्धव बाल ठाकरे) का कब्जा है। सीएजी की रिपोर्ट कहती है कि वहां बीते करीब तीन वर्षों में जो काम हुए हैं, उसमें हजारों करोड़ रुपए का ठेका देने में गड़बड़ी की गई है। जाहिर है कि बीएमसी पर उद्धव की पार्टी का कब्जा है तो जवाबदेह भी वही होगी। यही वजह है कि शिवसेना और बीजेपी खेमे में इस रिपोर्ट से उत्साह बढ़ गया है, जबकि बीएमसी के पास सीएजी के सवालों का ठोस जवाब नहीं है।

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बीएमसी में हजारों करोड़ रुपए के ठेके में गड़बड़ी-सीएजी
मुंबई में बीएमसी चुनाव के ऐलान में पहले ही देरी हो चुकी है। यह कभी भी कराया जा सकता है। लेकिन, उससे पहले देश के कई छोटे राज्यों से ज्यादा बजट वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर जो कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) की एक स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट ने ढाई दशकों से ज्यादा समय से इसपर कब्जा किए बैठी शिवसेना (आज की तारीख में शिवसेना {यूटीबी}) को मुसीबत में फंसा दिया है। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक देश के सबसे धनाढ्य नगर निकाय में बिना किसी टेंडर और कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट के हजारों करोड़ रुपए का काम आवंटित कर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार बीएमसी का यह रवैया सतर्कता और खरीदारी मानदंडों का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन है। उद्धव ठाकरे कैंप की मुश्किलें बढ़ाने वाली यह धमाकेदार रिपोर्ट शनिवार को विधानसभा में पेश की गई है।

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बीजेपी-शिंदे कैंप के लिए उत्साह बढ़ाने वाली रिपोर्ट
सीएजी की स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर खुलासे हैं। इसके अनुसार बीएमसी ने ठेका देते वक्त पारदर्शिता नहीं बरती है और इसके फैसलों से निगम को बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ है और लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। बीएमसी पर कब्जा उद्धव ठाकरे कैंप के लिए अभी भी सबसे बड़ा आधार है। 52,619 करोड़ रुपए से ज्यादा की बजट वाला यह निकाय बहुत सारे छोटे राज्यों की अर्थव्यस्था पर भी भारी पड़ता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कैंप और उनकी सहयोगी बीजेपी के लिए सीएजी की रिपोर्ट एक तरह से बहुत ही बड़ा विस्फोटक हथियार है। क्योंकि, बीएमसी पर कब्जा भाजपा का बड़ा एजेंडा रहा है और पिछले चुनाव में शिवसेना (अभी की शिवसेना यूटीबी) मामूली रूप से उससे आगे रही थी।

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सीएजी रिपोर्ट जिससे फंस सकती ही शिवसेना यूटीबी
दरअसल, महाराष्ट्र में पिछले साल उद्धव ठाकरे की एमवीए सरकार गिरने के बाद जून में शिवसेना-बीजेपी की सरकार सत्ता में आई थी। दो महीने से भी कम समय यानि अगस्त, 2022 में शिंदे सरकार ने सीएजी से बीएमसी की ऑडिट के लिए कहा था। सीएजी ने 28 नवंबर, 2019 से लेकर 31 अक्टूबर, 2022 तक 9 विभागों द्वारा 12,024 करोड़ रुपए की लागत से करवाए गए काम की जांच की। इसने कोविड संबंधी 3 ,539 करोड़ रुपए काम की जांच नहीं की, क्योंकि बीएमसी ने इससे जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। फिर भी सीएजी ने पाया कि 214 करोड़ के 20 काम में से 5 बिना टेंडर मंगवाए आवंटित किए गए, 4,776 करोड़ रुपए के 64 काम में बीएमसी और ठेकेदार के बीच कोई करार नहीं हुआ। मतलब, गलती पकड़े जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता भी बंद कर दिया गया। 3,355 करोड़ रुपए के 13 काम की मात्रा और गुणवत्ता मूल्यांकन के लिए थर्ड पार्टी ऑडिटर बहाल नहीं किए गए। मलाड में एक पंपिंग स्टेशन का 464 करोड़ रुपए का ठेका एक ऐसे ठेकेदार को दे दिया गया, जिसके खिलाफ मध्य प्रदेश में मुकदमा दर्ज है।

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    यह तो सिर्फ ट्रेलर है- देवेंद्र फडणवीस
    बीएमसी की दलील है कि कोरोना महामारी में नागरिक सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्यों का ठेका उसने बिना टेंडर जारी किए इसलिए दे दिया, क्योंकि इसकी तत्काल आवश्यकता हो गई थी। लेकिन, लेखा कानून के दायरे में यह दलील कितना काम कर सकती है, इसका तो अंदाजा ही लगाया जा सकता है। भाजपा-शिवसेना गठबंधन के लिए सीएजी की यह रिपोर्ट मौके पर चौके से कम नहीं है। राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि इससे बीएमसी के अंदर के भ्रष्टाचार का खुलासा हो गया है। उन्होंने राज्य विधानसभा में कहा है कि 'ऑडिट रिपोर्ट से पता चलता है कि बीएमसी की कार्यशैली कम पारदर्शिता वाली और भ्रष्ट है। यह तो सिर्फ एक ट्रेलर है, क्योंकि कुछ ही कार्यों की जांच की गई है।'

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    बीएमसी पर अभी तक है उद्धव खेमे का दबदबा
    फरवरी, 2017 में हुए बीएमसी चुनाव में तत्कालीन शिवसेना को 227 सीटों वाली महानगरपालिका में 84 सीटें मिली थी। बीजेपी 82 सीटें लेकर उससे सिर्फ 2 सीटें ही पीछे थी। लेकिन, तब की शिवसेना अब पूरी तरह से खंडित हो चुकी है। भले ही बीएमसी पर उद्धव खेमे का कब्जा हो, लेकिन शिंदे कैंप को असली शिवसेना का दर्जा मिलने से उद्धव खेमे की ताकत पर पहले ही सवाल उठ रहे थे और अब सीएजी की रिपोर्ट ने उसपर लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों को और गंभीर बना दिया है। शिंदे गुट और बीजेपी इसे ही भुनाने की कोशिशों में जुट गए हैं। बीएमसी की सीटें 227 से बढाकर 236 करने का फैसला मौजूदा सरकार पहले ही पलट चुकी है।

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    यह एक राजनीतिक रिपोर्ट है- आदित्य ठाकरे
    बीएमसी के कार्यों के आवंटन में हुई हजारों करोड़ रुपए की इस गड़बड़ी के खिलाफ भाजपा ने एफआईआर दर्ज करने की भी मांग शुरू कर दी है। डिप्टी सीएम फडणवीस ने इसके बारे में कहा है कि पहले सीएजी की रिपोर्ट की लोक लेखा समिति (PAC) जांच करेगी और तब सरकार इसपर कोई कार्रवाई का फैसला करेगी। फिलहाल उद्धव ठाकरे के बेटे की ओर से यही सफाई दी गई है कि 'यह एक राजनीतिक रिपोर्ट है। सरकार की नजर बीएमसी पर है। अगर उनमें दम है तो उन्हें नागपुर, नासिक, ठाणे और नवी मुंबई के नगर निकायं की भी ऑडिट करवानी चाहिए।'

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