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DRDO ने विकसित की ऐसी टेक्नोलॉजी, भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों से धोखा खा जाएंगे दुश्मन

मुंबई: बुधवार को आईएनएस करंज जंगी पनडुब्बी के भारतीय नौसेना में शामिल करने से एक दिन पहले रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने देश को रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ी खुशखबरी दी है। डीआरडीओ ने सोमवार रात को एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) टेक्नोलॉजी का आखिरी टेस्ट पूरा कर लिया है। भारतीय पनडुब्बियों को और भी ज्यादा घातक बनाने की दिशा में इसे बहुत बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि दुनिया के कुछ विकसित देशों के पास ही अभी यह टेक्नोलॉजी है। इस टेक्नोलॉजी से पनडुब्बियों में ना तो ज्यादा तेज आवाज होगी और ना ही दुश्मन उसका जल्दी भनक ही लगा पाएगा।

भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों से धोखा खा जाएंगे दुश्मन

भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों से धोखा खा जाएंगे दुश्मन

एआईपी टेक्नोलॉजी की खासियत ये है कि इसके लगने के बाद भारतीय पनडुब्बियां बहुत ही खामोश, लेकिन पहले से और भी ज्यादा घातक हो जाएंगी। इस टेक्नोलॉजी की विशेषता ये है कि इसकी मदद से पनडुब्बी बहुत लंबे वक्त तक पानी के अंदर रह सकती है और न्यूक्लियर पनडुब्बियों की तुलना में बहुत ज्यादा शांत होने की वजह से इसका सब-सर्फेस प्लेटफॉर्म दुश्मनों के लिए ज्यादा नुकसानदेह साबित हो जाता है। डीआरडीओ को मिली इस कामयाबी के बाद भारतीय नौसेना अब अपनी सभी गैर-परमाणु कलवरी क्लास युद्धक पनडुब्बियों में इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की सोच रही है।

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    समंदर की सतह पर आने की जरूरत नहीं

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    नई टेक्नोलॉजी को आत्मनिर्भर भारत अभियान के नजरिए से भी बहुत बड़ी सफलता माना जा रहा है। क्योंकि अभी यह तकनीक सिर्फ अमेरिका, फ्रांस, चीन, यूके और रूस के पास ही है। डीआरडीओ की एआईपी टेक्नोलॉजी फॉस्फोरिक एसिड फ्यूल सेल पर आधारित है, कलवरी क्लास की आखिरी दोनों पनडुब्बियों (कुल 6) में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। डीआरडी ने इसपर आखिरी परीक्षण मंगलवार रात को मुंबई में सतह पर किया है, जो इस सीरीज का आखिरी परीक्षण था। इस तकनीक के इस्तेमाल के बाद गैर-परमाणु पनडुब्बियों को वातवरण से ऑक्सीन लेने की जरूरत नहीं पड़ती है, जो कि डीजल-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में होती है। यानी नई तकनीक लगने के बाद पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए समंदर की सतह पर आने की जरूरत नहीं और वह आराम से पानी के नीचे ही लंबे वक्त तक तैनात रह सकती है।

    पाकिस्तान एआईपी टेक्नोलोजी के लिए दुनिया से लगा रहा है गुहार

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    वहीं परमाणु पंडुब्बियों में रियेक्टर की वजह से तापमान मेंटेन करने के लिए लगातार कूलेंट को पंप करना पड़ता है, जिससे बहुत ज्यादा आवाज निकलती है, जिससे लंबी दूरी से भी दुश्मन अलर्ट हो सकते हैं। गौरतलब है कि इस तकनीक के लिए पाकिस्तान लंबे वक्त से छटपटा रहा है। वह लगातार फ्रांस से उसकी पाकिस्तानी अगोस्टा 90 बी पनडुब्बियों में एआईपी टेक्नोलॉजी फिट करने की गुहार लगा रहा था। लेकिन, फ्रांस ने उसे दो टूक कह दिया है कि वह उसकी पनडुब्बी को अपग्रेड नहीं करेगा। इसके बाद पाकिस्तान चीन और तुर्की का मुंह ताकने को मजबूर हो गया है।

    आईएनएस करंज की कल मुंबई में तैनाती

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    इस बीच पनडुब्बी आईएनएस करंज को बुधवार को ही मुंबई में तैनात करने की तैयारी है। यह एक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी है। यह स्लीथ कलवरी क्लास की तीसरी पनडुब्बी होगी। इसकी भी खासियत है कि यह भी मेक इन इंडिया के तहत बनी है। समंदर में पनडुब्बियों का इस्तेमाल अपनी सीमा की रक्षा, माइंस बिछाने, खुफिया जानकारी जुटाने और दुश्मन के जहाजों को तबाह करने के लिए होता है। ये सारी पनडुब्बियां मझगांव डॉकयार्ड में बनी हैं। आईएनएस करंज के क्रू को इंडियन नेवी ने ही ट्रेनिंग दी है। (तस्वीरें-सांकेतिक)

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