महाराष्ट्र में मंत्रालयों को लेकर विवाद, अजित को वित्त मिलने पर शिंदे गुट ने जताई आपत्ति, जानें वजह
महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल का दौर लगातार जारी है। एनसीपी का अजित पवार गुट भले ही रविवार को शपथ लेकर महाराष्ट्र सरकार में शामिल हो गया लेकिन इस नए गठबंधन के चलते सरकार के अंदर पहले से मौजूद शिवसेना के शिंदे गुट का पारा हाई हो गया है।
मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट बैठक हुई। इस बैठक में 9 ऐसे मंत्री शामिल हुए जिनके पास कोई पोर्टफोलियो ही नहीं था। माना जा रहा है कि, तीन-दलीय सरकार के मंत्रिपरिषद में अजित पवार के खेमे को 13 मंत्री पद मिल सकते हैं।

भाजपा, शिवसेना और राकांपा के बीच विभिन्न विभागों के वितरण पर मतभेद के कारण नए शामिल मंत्रियों को विभागों के आवंटन में देरी हुई है। जानकारी के मुताबिक अजित के खेमे को वित्त और सहकारिता मंत्रालय मिला है।
अजित पवार अपने लिए वित्त विभाग चाहते हैं, जबकि शिंदे गुट इसके लिए तैयार नहीं है। अजित पवार ने साथ में ऊर्जा और सिंचाई विभाग की मांग की है। तीनों दलों के बीच मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर चल रही उठापटक ने बीजेपी के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अजित गुट ने सरकार से 14 विभाग मांगे हैं, जो पूर्ववर्ती उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली एमवीए सरकार में एनसीपी के पास थे। उनकी मांगों में वित्त, ऊर्जा, आवास, सहयोग, महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय जैसे विभाग शामिल हैं।
अजित पवार गुट ने जिन विभागों की मांग की है। उनमें से अधिकांश विभाग भाजपा के पास हैं। लेकिन शिंदे गुट बीजेपी की ओर से दिए जा रहे इन मंत्रालयों से खुश नहीं है। इसके पीछे की वजह पिछली सरकार में अजित पवार द्वारा उनके साथ किया गया भेदभाव बताया जा रहा है।
दरअसल अजित पवार महा विकास अघाड़ी सरकार में वित्त मंत्री के पद पर रहे थे। उस वक्त शिवसेना के कई विधायकों ने शिकायत की थी कि अजित पवार सिर्फ एनसीपी विधायकों को ज्यादा फंड देते हैं, शिवसेना के मंत्रियों को नहीं।
शिंदे गुट के विधायकों ने शिवसेना का साथ छोड़ते वक्त ये कहा था कि वो इसी वजह से एमएवी से अलग हो रहे हैं। चूंकि एक बार फिर से वित्त विभाग अजित पवार को मिल रहा है। तो ऐसे में उनकी चिंताएं फिर बढ़ गई हैं। अब गठबंधन सरकार आने के बाद शिंदे गुट के विधायकों ने मांग की है कि अजित पवार को वित्त मंत्रालय ना दिया जाए।












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