महाराष्ट्र में अभी भी मृत्युदर नहीं हुई कम, छोटे शहर सबसे ज्यादा प्रभावित
मुंबई, 13 जून: कोरोना की दूसरी लहर से भी महाराष्ट्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां पर रोजाना के केसों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। हालांकि राज्य में कोविड के मामले और मौत दोनों के आंकड़ों में गिरावट आ रही है, लेकिन मृत्युदर (सीएफआर) बढ़ रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 1 से 11 जून के बीच राज्य ने 2.41% की CFR दर्ज की, जो मई के पहले 11 दिनों में 1.45% और अप्रैल में इसी अवधि में 0.5% थी। हालांकि 1 जून से 11 जून के बीच मामलों में अप्रैल की इसी अवधि की तुलना में 76% की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन मौतों में 11% की वृद्धि हुई है।

मामले में अधिकारियों ने कहा कि मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे बड़े शहर, जहां पहले कोरोना महामारी अपने चरम पर थी, वहां पर मौत के मामले स्थिर हो गए हैं, लेकिन छोटे जिले और कस्बों में आंकड़े बढ़ रहे हैं। मौजूदा वक्त में कई जिलों में CFR ज्यादा है, जो दर्शाता है कि राज्य अभी पूरी तरह से खतरे से बाहर नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि सतारा, कोल्हापुर और रत्नागिरी जैसे जिले में मौतें अब मुंबई की तुलना में ज्यादा हो रही हैं। हालांकि उम्मीद जताई जा रही कि अगले दो हफ्तों में इन जगहों पर गिरावट दर्ज की जाएगी।
मामले में पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के महामारी विशेषज्ञ डॉ गिरिधर बाबू ने कहा कि टोटल में पांच अंकों की संख्या जोड़ने से निश्चित रूप से मृत्यु दर में बदलाव आएगा। कई जगहों पर महामारी का पीक खत्म होने के बाद पुरानी मौत का आंकड़ा जोड़ा जा रहा है, क्योंकि कोई भी मौत के आंकड़े को छिपा नहीं सकता है। बिहार में तो कोर्ट को सही आंकड़ों के लिए हस्ताक्षेप करना पड़ा था। ऐसे में हर राज्य में इस तरह की जरूरत है।












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