मुंबई के मांसाहारी भोजन को लेकर गुजराती और मराठी लोगों में हुई झड़प, MNS के दखल से बढ़ा विवाद, पहुंची पुलिस
Maharashtra News: महाराष्ट्र में केंद्र सरकार के त्रि-भाषा फॉर्मूले के तहत सीएम फडणवीस ने राज्य में कक्षा 1से 5 तक के बच्चों के स्कूल पाठ्यक्रम में हिंदी को तीसरी भाषा के तौर पर अनिवार्य कर दिया है। जिसके बाद महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी का विवाद फिर तूल पकड़ चुका है।
वहीं शुक्रवार को मुंबई के घाटकोपर इलाके में मराठी-गैरमराठी तनाव की घटना सामने आई है। घाटकोपर में गुजराती और मराठी लोग मांसाहारी भोजन को लेकर आपस में भिड़ गए। स्थिति तब और बिगड़ गई जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप करते हुए हाउसिंग सोसाइटी के कुछ सदस्यों पर अपने मराठी भाषी पड़ोसियों के भोजन का अपमान करने का आरोप लगाया। बवाल इतना बढ़ गया कि मुंबई पुलिस को बुलाना पड़ा। जिसके बीच-बचाव के बाद मामला शांत हुआ।

इस बवाल का वीडियो मनसे ने खुद शेयर किया है जो वायरल हो गया है। जिसमें मनसे नेता राज परते ने सोसायटी के गुजराती निवासियों पर मराठी भाषी परिवारों को उनके खाने की पसंद के लिए "गंदा" कहकर उनके साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए नजर आ रहे हैं।
MNS बोली- ऐसी चीजें हम बर्दाश्त नहीं करेंगे
मनसे नेता राज परते ने कहा "मुंबई में कोई भी रह सकता है और यहां काम कर सकता है, लेकिन हम ऐसी चीजों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। कोई दूसरा व्यक्ति यह कैसे तय कर सकता है कि उन्हें क्या खाना चाहिए।
"ये कहते हैं तुम मराठी लोग गंदे हो"
मनसे नेता ने कहा "इस घाटकोपर में हम मराठी लोगों के लिए हर दिन कितना संघर्ष करते हैं। तुम मराठी लोग गंदे हो, मछली और मटन खाते हैं।" उन्होंने कहा पूरा समाज गुजराती है, केवल 4 लोग मराठी हैं। ये लोग प्रतिदिन मराठी लोगों को निम्न श्रेणी की भाषा का प्रयोग करके अपमानित करता है। मैं आज इसमें प्रवेश कर गया, लेकिन यह एक क्षण में चला जायेगा। हर किसी की... हालांंकि इसका विरोध एक निवासी ने किया जिसने दावा किया किया कि हमारे क्षेत्र में खाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
भाजपा मंत्री ने का ये पाप नहीं करना चाहिए
इन तनावों के बीच, महाराष्ट्र के मंत्री और मुंबई भाजपा के अध्यक्ष आशीष शेलार ने कहा "किसी को भी मराठी भाषी लोगों, उनकी भाषा और उनकी संस्कृति को नीची नज़र से देखने का पाप नहीं करना चाहिए।"
"बुरा व्यवहार न करने की चेतावनी दी गई"
गौरतलब है मुंबई पुलिस के हस्तक्षेप से एक समाधान निकला जिसमें सोसायटी के निवासियों को अपने पड़ोसियों के साथ बुरा व्यवहार न करने की चेतावनी दी गई, साथ ही सद्भाव बनाए रखने पर जोर दिया। हालांकि इस मामले की कोई भी औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई। इतना ही नहीं आरोपी गुजराती निवासी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी।












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