बॉम्बे HC के जस्टिस रोहित देव ने दिया इस्तीफा, कहा- 'आत्मसम्मान' के खिलाफ काम नहीं कर सकते
बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस रोहित देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। खास बात यह है कि वे 4 दिसंबर 2025 को रिटायर होने वाले थे। जस्टिस ने इस्तीफा देते वक्त कहा कि आत्मसम्मान के खिलाफ काम नहीं कर सकता हूं।
बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस रोहित देव ने चलती कोर्ट में शुक्रवार को यानी 4 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति देव ने कई वकीलों की उपस्थिति में कोर्ट में घोषणा की, जिसके बाद दिन के लिए उनके मामले खारिज कर दिए गए।
कोर्ट रूप में मौजूद एक वकील के अनुसार, न्यायमूर्ति देव ने इस्तीफा देने के अपने फैसले के पीछे का कारण नहीं बताया। लेकिन, कहा कि वह अपने आत्मसम्मान के खिलाफ काम नहीं कर सकते। खास बात यह है कि वे 4 दिसंबर 2025 को रिटायर होने वाले थे।

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर को किया था बरी
साल 2022 में, जस्टिस रोहित देव ने कथित माओवादी संबंध मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा को बरी कर दिया था। साथ ही उन पर लगाए गए आजीवन कारावास को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत वैध मंजूरी के अभाव में मुकदमे की कार्यवाही शून्य थी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर रोक लगा दी और हाई कोर्ट की नागपुर पीठ को मामले की नए सिरे से सुनवाई करने का आदेश दिया।
जस्टिस देव ने पिछले सप्ताह 3 जनवरी को महाराष्ट्र सरकार के संकल्प के संचालन पर रोक लगा दी थी, जिसके माध्यम से राज्य को नागपुर के नागपुर-मुंबई समृद्धि एक्सप्रेस वे के निर्माण या निष्पादन कार्य में लगे ठेकेदारों द्वारा गौण खनिजों के अवैध उत्खनन से संबंधित राजस्व विभाग द्वारा शुरू की गई दंडात्मक कार्यवाही को रद्द करने का अधिकार दिया गया था।
महाराष्ट्र सरकार के महाधिवक्ता भी रहे
जस्टिस देव को जून 2017 में बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस के रूप में नियुक्त किया गया था और दिसंबर 2025 में सेवानिवृत्त होने वाले थे। एचसी के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने से पहले, न्यायमूर्ति देव ने 2016 में महाराष्ट्र सरकार के लिए महाधिवक्ता के रूप में भी काम किया था।












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