Bombay HC:स्टेन स्वामी के काम के प्रति सम्मान जताकर अदालत ने की ये टिप्पणी
मुंबई, 19 जुलाई: महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि 'बिना ट्रायल के लोग कितने दिनों तक जेल में रहेंगे। स्पीडी ट्रायल एक मौलिक अधिकार है।' जज ने साफ किया कि अदालत यह बात सभी केस के लिए कह रही है। वैसे यह टिप्पणी बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनजे जमादार की खंडपीठ ने भीमा कोरेगांव केस से जुड़े आरोपी स्टेन स्वामी के मामले की सुनवाई के दौरान की है। गौरतलब है कि पिछले 5 जुलाई को भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार स्टेन स्वामी की एक निजी अस्पताल में मौत हो गई थी।

जेल में क्या हुआ इसकी जांच हो- वकील
अदालत ने कहा है, 'इस केस में चार्ज फ्रेम नहीं हुए हैं, कितने गवाहों की जांच की जाएगी, इसमें कितने साल लग जाएंगे.....वे जेल में बंद हैं....बिना ट्रायल के लोग कितने साल तक जेल में बंद रहेंगे। स्पीडी ट्रायल एक मौलिक अधिकार है।' अदालत 5 जुलाई को हुए स्टेन स्वामी की मौत की न्यायिक जांच की मांग को लेकर वरिष्ठ वकील मिहिर देसाई के जरिए दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। देसाई ने कोर्ट से कहा कि वह मौत के कारण की बात नहीं कर रहे, बल्कि जेल में क्या हुआ उसकी जांच चाहते हैं, जिसके कारण आखिरकार उनकी मौत हुई। उन्होंने कहा कि 'मैं चाहता हूं कि जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की गाइडलाइंस के अनुसार हो और रिपोर्ट हाई कोर्ट में फाइल होनी चाहिए।'
समाज के लिए उनके काम के प्रति हमें आदर है- हाई कोर्ट
इसपर जस्टिस शिंदे ने कहा कि 'स्टेन स्वामी अद्भुत व्यक्ति थे और उन्होंने समाज के लिए सेवाएं प्रदान की थीं। समाज के लिए उनके काम के प्रति हमें बहुत आदर है, चाहे आज की कानूनी स्थिति जो भी हो। हमने उनका अंतिम संस्कार ऑनलाइन देखा और यह बहुत सम्मानजनक और शालीन तरीके से किया गया।' मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
पार्किंसन रोग से पीड़ित थे
स्वामी भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तार किए गए 16 में आखिरी आरोपी थे। उनकी उम्र 84 साल थी और वे पार्किंसन रोग से पीड़ित थे और गिरफ्तार आरोपियों में सबसे बुजुर्ग थे। उन्हें पिछले साल 9 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था और हाई कोर्ट के निर्देश पर 29 मई को तजोला सेंट्रल जेल से निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया था, जहां 5 जुलाई को उन्होंने दम तोड़ दिया।












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