बॉम्बे HC का सरकार से सवाल- कैसे किल्लत के बीच फिल्मी स्टार और राजनेता बांटने के लिए पा जा रहे रेमडेसिविर
मुंबई, 13 मई: पूरा देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर की चपेट में है। जिस वजह से स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों को अस्पतालों में बेड तक नहीं नसीब हो रहा है। अगर किसी तरह मरीज ने जद्दोजहद करके बेड पा भी लिया, तो ऑक्सीजन और जीवन रक्षक दवाइयों के लिए वो परेशान हो रहे हैं। गुरुवार को कोरोना से जुड़ी एक याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस पर कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से कुछ अहम सवाल पूछे हैं।

दरअसल कोरोना की दूसरी लहर आते ही जीवन रक्षक दवा रेमडेसिविर बाजारों और अस्पतालों से अचानक से गायब हो गई। अगर मिल भी रही है, तो पूरी डोज की कीमत एक लाख से ऊपर है। इसी बीच कुछ नेता और फिल्मी स्टार मरीजों को रेमडेसिविर बांटते नजर आए। जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि जब बाजारों और अस्पतालों में रेमडेसिविर नहीं है, तो आखिर ये नेता और फिल्मी हस्तियां कहां से ये इंजेक्शन ला रही हैं।
क्या काम करती है रेमडेसिविर?
आपको बता दें कि रेमडेसिविर एक एंटी वायरल ड्रग है, जिसका उपयोग गंभीर कोरोना मरीजों पर किया जाता है। इसे इंजेक्शन के रूप में ही दिया जाता है। जिसकी 6 डोज जरूरी रहती है। जब से कोरोना की दूसरी लहर आई तब से इसकी काफी ज्यादा किल्लत चल रही है। वैसे आमतौर पर इस दवा की कीमत 600 से 3200 के पास रहती है, लेकिन इस वक्त ये 1.5 लाख तक बिक रही है।
पिछले हफ्ते भी उठा था मुद्दा
हफ्ते भर पहले भी बॉम्बे हाईकोर्ट में कोरोना से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई हुई थी। उस दौरान कोर्ट ने बीजेपी सांसद सुजय विखे पाटिल द्वारा नई दिल्ली से अनाधिकारिक और चुपके से रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदने पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि इस दवा को जरूरतमंदों के पास होना चाहिए।












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