बॉम्बे HC ने नवाब मलिक से पूछा- क्या आपने ट्वीट करने से पहले वानखेड़े के खिलाफ तथ्यों की पुष्टि की?
नई दिल्ली, 11 नवंबर: पिछले एक महीने से नवाब मलिक लगातार एनसीबी और समीर वानखेड़े के खिलाफ हमलावर हैं। इस मामले में उन्होंने बहुत सारे ट्वीट भी किए। इससे जुड़े एक मामले में बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जिस पर कोर्ट ने एनसीपी नेता मलिक को इस मामले में हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए, साथ ही पूछा कि क्या उन्होंने ट्वीट करने से पहले वानखेड़े और उनके परिवार से संबंधित जानकारी का सत्यापन किया था।

ये पूरा मामला मानहानि का है, जिसे समीर वानखेड़े के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े ने दायर किया है। उनका आरोप है कि नवाब मलिक ने उनके खिलाफ गलत बयानबाजी की। जिससे उनकी छवि खराब हुई। इस वजह से वो 1.25 करोड़ के हर्जाने की मांग करते हैं। फिलहाल कोर्ट ने मलिक को उस तरह की बयानबाजी रोकने का आदेश दिया, जो वानखेड़े परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाए।
न्यायधीश ने ज्ञानदेव के वकील अरशद शेख से कहा कि आपको सिर्फ ये साबित करना है कि जो ट्वीट नवाब मलिक की ओर से किए गए हैं, वो झूठे हैं। याचिकाकर्ता के बेटे एक सरकारी अधिकारी हैं, ऐसे में उनकी जांच कोई भी सामान्य व्यक्ति कर सकता है। इसके बाद मलिक के वकील अतुल दामले से कोर्ट ने पूछा कि क्या आपके मुवक्किल ने जानकारी सोशल मीडिया पर डालने से पहले उसको सत्यापित किया था। क्या एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में प्रामाणिकता की पुष्टि करने की जरूरत नहीं है?
सोशल मीडिया से पोस्ट हटाने की मांग
ज्ञानदेव वानखेड़े ने अपनी मांग में कहा कि कोर्ट मलिक को बयानबाजी रोकने के आदेश दे। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए जो टिप्पणी की है, उसे वो तुरंत हटा लें। इस पर मलिक के वकील ने एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा, ताकि ट्वीट से संबंधित तथ्य कोर्ट के सामने रखे जा सकें।












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