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महाराष्ट्र में फिर से पॉवर शेयरिंग फॉर्मूला बनाना चाहती है BJP, अब भी बरकरार है सीएम के नाम पर सस्पेंस

Maharashtra CM Face News: महारष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? इसको लेकर अभी तक सस्पेंस बरकरार है। हालांकि, मुख्यमंत्री के नाम को लेकर गुरुवार 28 नवंबर को गृहमंत्री अमित शाह के साथ महायुति की बैठक हुई थी। यह बैठक करीब दो घंटे तक चली और इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार समेत महायुति गठबंधन के नेता शामिल हुए।

बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारी जीत के बाद भाजपा अपने सहयोगियों के साथ सत्ता-साझेदारी का फार्मूला फिर से तैयार करना चाहती है। क्योंकि, इस चुनाव में भाजपा को 132, शिवसेना को 57 और एनसीपी को 41 सीटें मिलीं। इसके अलावा, भाजपा के पास छोटे दलों/निर्दलीय विधायकों के पांच औपचारिक समर्थन पत्र भी हैं। इसी संख्या बल को ध्यान में रखकर मंत्रालय बांटने का फार्मूला तय किया गया है।

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इतना ही नहीं, भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास 288 सदस्यीय विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा की 132 सीटों की संख्या 2014 में 122 और 2019 में 105 सीटों की पिछली संख्या से अधिक है। इस बात पर सहमति बनी है कि मुख्यमंत्री की सहायता के लिए दो उपमुख्यमंत्री होंगे। वहीं, बीजेपी को 25, शिंदे की शिवसेना को 10 और अजित दादा की एनसीपी को 7 मंत्री पद मिलेंगे।

पिछली बार महागठबंधन में तीनों दलों के बीच सत्ता की हिस्सेदारी बराबर-बराबर थी। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में 1996 से ही उपमुख्यमंत्री रहे हैं, सिवाय 2014 से 2019 तक भाजपा-शिवसेना सरकार के दौरान। 1995-99 तक शिवसेना-भाजपा सत्ता में थी तो उस वक्त शिवसेना के डॉ मनोहर जोशी और नारायण राणे ने सीएम के रूप में कार्य किया।

जबकि, भाजपा के गोपीनाथ मुंडे ने डिप्टी सीएम के रुप में कार्य किया था। यह वही सरकार थी जिस पर स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे ने रिमोट कंट्रोल के माध्यम से शासन चलाया था। इसके विपरीत, जब 1999-2014 तक कांग्रेस-एनसीपी की सरकार थी, तब कांग्रेस के पास सीएम पद था जबकि एनसीपी के पास डिप्टी सीएम थे।

खबर के मुताबिक, उस वक्त मुख्यमंत्री स्वर्गीय विलासराव देशमुख (दो बार), सुशील कुमार शिंदे, अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण थे। वहीं, एनसीपी के डिप्टी सीएम विजयसिंह मोहिते-पाटिल, छगन भुजबल, स्वर्गीय आरआर पाटिल और अजित पवार थे। जब 2014-19 तक भाजपा के देवेंद्र फड़नवीस मुख्यमंत्री थे।

उन्होंने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना को डिप्टी सीएम पद की पेशकश नहीं की थी। इसके बाद जब फडणवीस ने सरकार बनाने की कोशिश की तो उन्होंने पवार को डिप्टी सीएम पद की पेशकश की थी। हालांकि, 2022 में ठाकरे सरकार गिरने के बाद फडणवीस खुद महायुति सरकार में सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में डिप्टी सीएम बने।

जब ​​अजित पवार महायुति में शामिल हुए उन्हें भी डिप्टी सीएम का पद मिला। राजनीतिक जानकारों की मानें तो 1999-2014 तक, अधिकतम सीटों वाली पार्टी को सीएम पद मिला। हालांकि, 2004 में शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के पास कांग्रेस से दो सीटें ज़्यादा थीं, फिर भी, उन्होंने इसके मुक़ाबले अच्छे विभाग हासिल किए और कांग्रेस ने छोटे दलों के साथ चुनाव-पूर्व गठबंधन के आधार पर कुल संख्याबल का हवाला दिया।

हालांकि, कम सीटों वाली पार्टी को हमेशा डिप्टी सीएम और गृह मंत्री का पद मिला। फडणवीस ने फ़ॉर्मूला फिर से तैयार किया और 2014-19 के बीच शिवसेना को डिप्टी सीएम या गृह मंत्रालय का पद नहीं दिया। पिछली सरकार में भी फडणवीस ने डिप्टी सीएम के तौर पर गृह मंत्रालय की कमान संभाली थी।

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