Koregaon-Bhima Case: गौतम नवलखा जेल से रिहा, अब घर पर रहेंगे नजरबंद
कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा को रिहा कर दिया गया। हालांकि अभी वो घर में नजरबंद रहेंगे। नवी मुंबई की तलोजा सेंट्रल जेल से शनिवार को छूटने के बाद उन्हें मुंबई पुलिस को हैंडओवर कर दिया गया। हालांकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) लगातार उनकी रिहाई का विरोध कर रही थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी एक भी दलील नहीं सुनी।

एनआईए ने कोर्ट को ये भी बताया था कि गौतम नवलखा ने अपने स्वास्थ्य को लेकर कोर्ट को जानबूझकर गुमराह किया, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने इस तर्क को दरकिनार कर दिया। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें 24 घंटे के अंदर जेल से रिहा कर नजरबंदी में भेजने का आदेश दिया। हालांकि कोर्ट ने ये भी कहा कि डीवीआर के सीसीटीवी कैमरे को पहली मंजिल से हटाकर एनआईए की मर्जी के मुताबिक शिफ्ट किया जा सकता है।
NIA को थी ये आपत्ति
सर्वोच्च अदालत में एनआईए की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जिस डॉक्टर ने गौतम नवलखा की मेडिकल रिपोर्ट बनाई है, वो उनका रिश्तेदार है। ऐसे में उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता। इसके अलावा जहां पर उन्हें नजरबंद किया जाना है, वो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का कार्यालय है। हालांकि कोर्ट ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया।
2020 से जेल में
आपको बता दें कि कोरेगांव-भीमा हिंसा से जुड़े एक मामले में गौतम नवलखा को अप्रैल 2020 में गिरफ्तार किया गया था। उनपर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा था। साथ ही पुणे पुलिस ने दावा किया था कि जिन सम्मेलन में ये हुआ उसको माओवादियों ने समर्थन दिया था। इसी मामले में स्टैन स्वामी की गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन पिछले साल जुलाई में जेल में ही उनकी मौत हो गई। वो 84 साल के थे। उन्होंने भी उम्र का हवाला देते हुए जमानत की कई याचिकाएं डालीं, लेकिन उनको राहत नहीं मिली थी।












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