Maharashtra: बदलापुर रेप आरोपी की गोली लगने से मौत, पिस्तौल छीनकर पुलिस पर की थी फायरिंग

Maharashtra News: महाराष्ट्र के बदलापुर में सोमवार शाम को एक नाटकीय मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने यौन उत्पीड़न के आरोपी अक्षय शिंदे को मार गिराया। यह घटना उस वक्त हुई जब शिंदे को तलोजा जेल से बदलापुर पुलिस स्टेशन ले जाया जा रहा था।

शाम करीब 5:30 बजे शिंदे ने भागने की कोशिश में एक पुलिस अधिकारी का हथियार छीन लिया और गोलीबारी शुरू कर दी। इस गोलीबारी में दो पुलिस अधिकारी घायल हो गए। जबकि शिंदे गंभीर रूप से घायल हुआ। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया। जहां उसकी मौत हो गई। घायल पुलिस अधिकारियों में सहायक पुलिस निरीक्षक नीलेश मोरे और इंस्पेक्टर संजय शिंदे शामिल थे।

badlapur case

इंस्पेक्टर संजय शिंदे जिनका शातिर अपराधियों को पकड़ने में अनुभव रहा है। उन्होंने इस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई। वह पहले भी दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कासकर की गिरफ्तारी जैसी हाई-प्रोफाइल कार्रवाईयों का हिस्सा रहे हैं।

अक्षय शिंदे पर 17 अगस्त को बदलापुर के एक स्कूल में चार और पांच साल की दो बच्चियों के यौन उत्पीड़न का आरोप था। वह उस स्कूल में सफाईकर्मी के रूप में कार्यरत था और इसी दौरान उसने यह घिनौना अपराध किया। उसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे इलाके में विरोध प्रदर्शन हुए और महाराष्ट्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल का गठन किया। इस टीम में पुलिस के एनकाउंटर विशेषज्ञ इंस्पेक्टर संजय शिंदे भी शामिल थे।

अक्षय शिंदे की गिरफ्तारी के बाद स्कूल के चेयरमैन और सचिव के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई। उन पर आरोप है कि उन्होंने घटना की सूचना समय पर पुलिस को नहीं दी। इसके चलते उन पर पॉक्सो अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की गई है। दोनों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी है।

इस मामले को लेकर महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि अक्षय शिंदे को जांच के लिए ले जाया गया। क्योंकि उनकी पूर्व पत्नी ने यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया था। उन्होंने एक पुलिस कर्मी नीलेश मोरे पर गोली चलाई। जो घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस मौके पर है। आत्मरक्षा में यह कार्रवाई की गई। जांच के बाद अधिक जानकारी सामने आएगी।

इस मामले ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश पैदा किया है और स्थानीय प्रशासन की भूमिका की भी आलोचना की गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले की निगरानी के लिए सक्रिय रुख अपनाया है। इस दुखद घटना ने बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े कानूनों और त्वरित न्यायिक प्रक्रियाओं की आवश्यकता को उजागर किया है।

अक्षय शिंदे की मौत और मुठभेड़ के बाद की परिस्थितियों ने न केवल कानून व्यवस्था की चुनौतियों को सामने रखा है। बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में बाल सुरक्षा की अहमियत पर भी रोशनी डाली है। अब जांच के परिणाम और न्यायालय की निगरानी आने वाले दिनों में इस जघन्य अपराध पर न्याय की दिशा को निर्धारित करेंगे।

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