Baba Siddique की हत्या का महाराष्ट्र चुनाव के लिए क्या हैं मायने? महायुति पर इतनी हमलावर क्यों है MVA?
Baba Siddique News in Hindi: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या में अभी तक कोई पॉलिटिकल एंगल सामने नहीं आया है। लेकिन, इस हत्याकांड को लेकर जबर्दस्त राजनीति हो रही है। सत्ताधारी महायुति गठबंधन के बड़े नेता की जघन्य हत्या पर विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के नेता ज्यादा उबल रहे हैं। दरअसल, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले इस हत्याकांड को लेकर हो रहे सियासी बवाल के पीछे खास सियासी मायने छिपे लग रहे हैं।
बाबा सिद्दीकी चार दशक कांग्रेस में बिताने के बाद इसी साल लोकसभा चुनाव से पहले फरवरी में ही महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की एनसीपी में शामिल हुए थे। उनका बेटा जीशान सिद्दीकी अभी भी मुंबई की बांद्रा ईस्ट सीट से एमएलए हैं।

एमवीए के नेता हैं महायुति सरकार पर हमलावर
इस हत्याकांड को लेकर महाराष्ट्र में विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) और केंद्र में इंडिया ब्लॉक के नेता सत्ताधारी महायुति सरकार के खिलाफ पूरी तरह से हमलावर हैं। राहुल गांधी से लेकर शरद पवार, उद्धव ठाकरे और अरविंद केजरीवाल तक ने निशाना साधा है।
सभी दलों के नेताओं के निशाने पर विशेष तौर पर राज्य के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस हैं। उनसे इस्तीफा मांगा जा रहा है। उद्धव ने तो आरोपियों की गिरफ्तारी पर भी संहेद जता दिया है और सवाल किया है कि क्या पकड़े गए आरोपी ही असली आरोपी हैं?
मुसलमान नेताओं के निशाने पर रही है कांग्रेस और एमवीए पार्टियां
दरअसल, बीते लोकसभा चुनावों में महा विकास अघाड़ी में शामिल कांग्रेस, एनसीपी (शरदचंद पवार) और शिवसेना (यूबीटी) पर कुछ मुस्लिम नेताओं ने खुलेआम आरोप लगाए थे कि इन सबको मुस्लिम वोट तो चाहिए, लेकिन इन्हें मुसलमान उम्मीदवारों से परहेज है।
महाराष्ट्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री और राज्य में कांग्रेस के प्रमुख चेहरा आरिफ नसीम खान ने चुनाव प्रचार से खुद को यही कहकर अलग भी कर लिया था कि 'कांग्रेस को मुस्लिम वोट चाहिए....कैंडिडेट क्यों नहीं?'
नसीम खान मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सीट से टिकट के दावेदार थे। लेकिन, पार्टी ने मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ को मौका दिया था। एमवीए की तीनों पार्टियों ने मुसलमान प्रत्याशियों को टिकट से दूर ही रखने में भलाई समझी। गायकवाड़ चुनाव जीत गईं। अकेले वर्षा ही नहीं, राज्य की 48 सीटों में से एमवीए को 30 सीटों पर जीत मिली।
कांग्रेस में संभावनाएं खत्म होता देख ही एनसीपी में शामिल हुए थे बाबा सिद्दीकी
चुनाव के बाद के विश्लेषणों में यही बात सामने आई है कि मुस्लिम उम्मीदवारों से कन्नी काटने के बावजूद मुसलमानों ने एकतरफा एमवीए के लिए ही वोट दिया और उसमें उद्धव ठाकरे की पार्टी भी शामिल रही, जो कभी मुसलमान वोटरों के लिए वर्जित मानी जाती थी।
बाबा सि्ददीकी भी कांग्रेस की राजनीति में संभावनाएं खत्म होता देख ही लोकसभा चुनावों से पहले महायुति का साथ पकड़ना तय किया था। लेकिन, शायद विधायकी बचाने के लिए बेटे को ऐसा करने से रोक दिया।
महाराष्ट्र से एक भी लोकसभा सांसद मुसलमान नहीं
महाराष्ट्र में मुस्लिम आबादी करीब 1.30 करोड़ है, जो कि प्रदेश की जनसंख्या के लगभग 11.56% होती है। उत्तर कोंकण, खानदेश, मराठवाड़ा और पश्चिमी विदर्भ समेत मायानगरी मुंबई के कुछ पॉकेट में उनकी काफी जनसंख्या है। लेकिन, इसके बावजूद इस बार की लोकसभा में इनका प्रतिनिधित्व शून्य है। जबकि, माना जाता है कि 48 सीटों में से 14 सीटों पर यह समुदाय हार और जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है।
महाराष्ट्र विधानसभा में भी सिर्फ 10 मुस्लिम एमएलए
महाराष्ट्र में अब किसी भी दिन विधानसभा चुनाव तारीखों की घोषणा हो सकती है। नवंबर में वहां चुनाव होने हैं। 288 सीटों वाली मौजूदा विधानसभा में सिर्फ 10 मुस्लिम एमएलए हैं। इनमें से कांग्रेस के 4, एआईएमआईएम और समाजवादी पार्टी के 2 और एनसीपी, शिवसेना के एक विधायक शामिल हैं।
मुस्लिम मतदाताओं की सहानुभूति बटोरने की कोशिश में एमवीए!
बाबा सिद्दीकी मुस्लिम नेता थे और अपने समुदाय के मतदाताओं में उनकी अच्छी पकड़ थी। वे लगातार 1999, 2004 और 2009 में बांद्रा से विधायक चुने जा चुके थे। उनका बेटा अभी भी विधायक है। यही वजह है कि एमवीए और इंडिया ब्लॉक के नेता सिद्दीकी के बहाने लगता है कि उनके मुस्लिम वोट बैंक का सहानुभूति अपने पक्ष में बनाए रखना चाहते हैं।
क्योंकि, सिद्दीकी सत्ताधारी दल में थे, इसलिए विपक्ष को लगता है कि उसका काम उनकी हत्या से और ज्यादा आसान रहने वाला है। ऐेसे में लगता है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव तक यह हत्याकांड प्रदेश की राजनीति में गरम रहने वाला है।












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