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औरंगजेब की कब्र का मामला पहुंचा बॉम्‍बे हाईकोर्ट, मकबरे को लेकर दाखिल याचिका में कर दी ये डिमांड

Aurangzeb Tomb Controversy: महाराष्‍ट्र में औरंगजेब की कब्र को हटाए जाने की मांग के बाद जमकर बवाल मचा है। वहीं अब औरंगजेब के मकबरे का मामला बॉम्‍बे हाईकोर्ट पहुंच गया है।

बता दें महाराष्‍ट्र के संभाजीनगर के खुल्‍दाबाद में औरंगजेब की कब्र है वो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है। इसकी वजह है कि औरंगजेब की कब्र भारत की राष्‍ट्रीय स्‍मारकों की सूची में शामिल है। अभी तक हिंदू संगठन कब्र को हटाने की मांग महाराष्ट्र सरकार से कर रहे थे लेकिन अब हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर औरंगजेब के म‍कबरे को लेकर नई डिमांड कर दी गई है।

Aurangzeb Tomb Controversy

बता दें औरंगजेब की कब्र को हटाए जाने की मांग पर महाराष्‍ट्र की फडणवीस सरकार ने साफ कर दिया है कि ये निर्णय उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। जिसके बाद मुगल बादशाह औरंगजेब के मकबरे को राष्ट्रीय स्मारकों की सूची से हटाने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर कर दी है।

किसने दायर की है ये याचिका? क्‍या दिया है तर्क

ये याचिका सामाजिक कार्यकर्ता केतन निरोडकर ने बॉम्‍बे हाईकोर्ट में दाखिल की है और मकबरे को हटाने की मांग करते हुए तर्क दिया गया है कि यह एएसआई अधिनियम, 1958 की धारा 3 के तहत स्थापित मानदंडों को पूरा नहीं करता है, जो राष्ट्रीय महत्व के कुछ प्राचीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों की पहचान करता है।

औरंगजेब की कब्र को दूसरी जगह स्‍थानांतरिक करने की भी डिमांड

औरंगजेब की कब्र को सूची से हटाने का अनुरोध याचिका में भविष्य में सांप्रदायिक तनाव को रोकने के उद्देश्य से किया गया है। इसमें सुझाव दिया गया है कि इस स्थल को सूची से हटाने और इसे स्थायी रूप से स्थानांतरित करने से किसी भी संभावित संघर्ष से बचने में मदद मिलेगी।

कैसे शुरू हुआ औरंगजेब की कब्र का मामला?

यह कदम हिंदू संगठनों की बढ़ती मांगों के बीच उठाया गया है। याद रहे खासकर फिल्म "छावा" की रिलीज के बाद, जिसने महाराष्ट्र के संभाजीनगर के खुल्दाबाद में स्थित कब्र को हटाने के लिए सिरे से मांग की जा रही है।

नागपुर में हुई हिंसा

बता दें 17 मार्च को नागपुर में हिंसा भड़क उठी, यह अफ़वाह फैली कि हिंदू समूहों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान इस्लामी प्रतीकों का अपमान किया है। इस घटना के बाद हिंसा के सिलसिले में 10 अलग-अलग एफआईआर दर्ज करके 105 लोगों को गिरफ़्तार किया गया, जिनमें 10 नाबालिग भी शामिल हैं। इसके बाद शांति बहाल करने के लिए प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू लागू किया गया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 21 मार्च को आश्वासन दिया कि हिंसा के सिलसिले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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