Arun Gawli News: दाऊद के कट्टर डॉन 'Daddy' की 17 साल बाद रिहाई से किस पार्टी को फायदा? BMC चुनाव का क्या रोल?
Arun Gawli News: मुंबई के अंडरवर्ल्ड का एक नाम, जिसने कभी दाऊद इब्राहिम को टक्कर दी, वो अरुण गवली उर्फ 'डैडी', 18 साल बाद नागपुर सेंट्रल जेल से रिहा होकर भायखला की दगड़ी चॉल में लौट आया है। सुप्रीम कोर्ट ने 3 सितंबर 2025 को उसे जमानत दी, और गणेश महोत्सव के बीच उसकी वापसी ने सियासी गलियारों में तहलका मचा दिया।
बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव नजदीक हैं, और गवली की रिहाई ने सवाल खड़े कर दिए हैं - क्या 'डैडी' का प्रभाव शिवसेना (UBT-उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को भायखला में मजबूती देगा, या महायुति गठबंधन (BJP-शिंदे सेना-NCP) को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा? आइए, सिलसिलेवार समझते हैं...

Arun Gawli Don Daddy Story- 'डैडी' की कहानी: मिल मजदूर से गैंगस्टर तक
अरुण गवली का जन्म मुंबई के एक रिटायर्ड मिल मजदूर के घर हुआ। 1980 के दशक में मुंबई टेक्सटाइल मिल हड़ताल ने हजारों मजदूरों को बेरोजगार कर दिया। गवली ने इस मौके का फायदा उठाया और बेरोजगार युवाओं को अपने साथ जोड़ा। वो BRA गैंग (बाबू रेशम, रामा नाइक, अरुण गवली) का हिस्सा बने, जो पहले दाऊद इब्राहिम के लिए काम करता था। लेकिन जल्द ही BRA ने अपनी अलग राह चुनी, और मध्य मुंबई के मिल इलाकों में जबरन वसूली और प्रोटेक्शन रैकेट चलाने लगा।
जब रामा नाइक और बाबू रेशम गैंगवार में मारे गए, तो गवली दगड़ी चॉल का 'डैडी' बन गया। उसकी गलियों में गुप्त रास्ते थे, जहां से वो मुंबई पुलिस को चकमा देता था। भायखला और अग्रीपाड़ा में गवली को रॉबिन हुड की तरह देखा जाता था। मिलें बंद होने पर उसने मजदूरों को पैसे बांटे, झगड़े सुलझाए, और परिवारों की मदद की। लेकिन दूसरी तरफ, वो हत्या, अपहरण, और वसूली के लिए भी कुख्यात था।
Dawood Ibrahim से दुश्मनी: खून-खराबे की दास्तान
गवली और दाऊद इब्राहिम की दुश्मनी ने मुंबई के अंडरवर्ल्ड को खून से रंग दिया। 1990 के दशक में गवली ने कथित तौर पर दाऊद के बहनोई इब्राहिम पारकर की हत्या का आदेश दिया। जवाब में, दाऊद के गुर्गों ने 1992 में जेजे अस्पताल गोलीकांड को अंजाम दिया, जिसमें गवली का शार्पशूटर शैलेश हल्दांकर और दो पुलिसकर्मी मारे गए। इस घटना के बाद जेजे अस्पताल में आज भी सख्त सुरक्षा रहती है। गवली ने अपने भाई किशोर को भी गैंगवार में खो दिया।
1990 के दशक के अंत में मुंबई पुलिस ने एनकाउंटर की रणनीति अपनाई। विजय सालस्कर जैसे पुलिसवाले गवली के कई गुर्गों को मार गिराया, जिससे उसका गैंग कमजोर हो गया। कहा जाता है कि गवली सालस्कर से इतना डरता था कि 2004 के लोकसभा चुनाव में वो अपने घर से वोट डालने भी नहीं निकला, क्योंकि सालस्कर वहां तैनात था।
Gangster to MLA Journey- गैंगस्टर से MLA तक: सियासत की पारी
1997 में गवली ने अखिल भारतीय सेना (ABS) बनाई और गैंगस्टर की छवि को गांधी टोपी से ढकने की कोशिश की। 2004 में वो चिंचपोकली से MLA चुने गए। उनकी पत्नी आशा गवली उर्फ अपराध जगत की 'Mummy' की, बेटी गीता गवली, और ननद वंदना भी BMC पार्षद रहीं। लेकिन शिवसेना के साथ उनके रिश्ते हमेशा तनावपूर्ण रहे। बाल ठाकरे ने उन्हें कभी 'आपले मुले' कहा, लेकिन ABS बनाने के बाद गवली की ताकत कम हो गई।
2008 में गवली का सियासी करियर तब ध्वस्त हो गया, जब उन्हें शिवसेना पार्षद कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के लिए गिरफ्तार किया गया। 2012 में MCOCA के तहत उन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई। 17 साल जेल में बिताने के बाद, 3 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी, क्योंकि उन्होंने अपनी सजा का बड़ा हिस्सा काट लिया था।
BMC Chunav 2025 Date- गवली की रिहाई और BMC चुनाव 2025
BMC देश की सबसे अमीर नगर निगम है, जिसका 2025-26 का बजट 74,247 करोड़ रुपये है। 2017 से लंबित BMC चुनाव अब नवंबर 2025 में होने की संभावना है। भायखला में 3.5 लाख वोटर हैं, और गवली की वापसी ने सियासी समीकरण गरमा दिए हैं।
शिवसेना (UBT) को फायदा?
- गवली का प्रभाव: भायखला और अग्रीपाड़ा में गवली को अब भी 'डैडी' के रूप में सम्मान मिलता है। उनकी रिहाई से शिवसेना (UBT-उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को फायदा हो सकता है, क्योंकि गवली की बेटी गीता गवली, जो पहले ABS से पार्षद रह चुकी हैं, अब शिवसेना (UBT) के टिकट पर भायखला से चुनाव लड़ सकती हैं। उद्धव ठाकरे के करीबी मिलिंद नार्वेकर ने गीता और आशा गवली से मुलाकात कर समर्थन की बात की थी।
- MVA (महा विकास अघाड़ी) में तनाव: शिवसेना (UBT) ने जनवरी 2025 में ऐलान किया कि वो BMC चुनाव अकेले लड़ेगी, जिससे MVA गठबंधन (कांग्रेस, NCP-SP) में दरार पड़ गई। गवली की लोकप्रियता भायखला में UBT को मजबूती दे सकती है।
- गणेश महोत्सव का असर: गवली की रिहाई गणेश महोत्सव के दौरान हुई, जब भायखला में उनका भव्य स्वागत हुआ। ये मराठी भावनाओं को भुनाने का मौका दे सकता है, खासकर जब UBT और MNS-महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (राज ठाकरे) ने 'मराठी मानूस' के लिए एकजुट होने के संकेत दिए हैं।
Shock to Mahayuti- महायुति को झटका?
शिंदे सेना और BJP: महायुति गठबंधन (BJP, शिंदे सेना, NCP) BMC में मजबूत स्थिति चाहता है। लेकिन गवली की रिहाई से भायखला में यामिनी जाधव (शिंदे सेना) को चुनौती मिल सकती है। यामिनी के पति यशवंत जाधव भायखला से 2019 में जीते थे, लेकिन गवली की लोकप्रियता उनके वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है।
मराठा आरक्षण का मुद्दा: गवली की रिहाई मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच हुई है। मनोज जरांगे पाटिल के आंदोलन ने मराठा वोटरों को प्रभावित किया है, और गवली का मराठी समुदाय में प्रभाव इसे और जटिल बना सकता है।
Geeta Gawli Role- गीता गवली का रोल: भायखला की नई सियासत
गीता गवली 2014 और 2019 में भायखला से विधानसभा चुनाव हार चुकी हैं। 2014 में वो AIMIM के वसीम पठान से सिर्फ 4,419 वोटों से हारी थीं। अब शिवसेना (UBT) उन्हें टिकट दे सकती है, क्योंकि महायुति की यामिनी जाधव शिंदे खेमे में हैं। गीता की मां आशा गवली ने कहा, 'गीता ने पहले भी अच्छा काम किया। डैडी अब जनता की सेवा करेंगे।'
अरुण गवली उर्फ 'डैडी' की 17 साल बाद रिहाई ने मुंबई की सियासत में भूचाल ला दिया। BMC चुनाव 2025 में भायखला (Byculla) का रण निर्णायक हो सकता है, जहां गवली का प्रभाव शिवसेना (UBT) को मजबूती दे सकता है। गीता गवली के टिकट की चर्चा और मराठी मानूस की भावनाएं UBT के लिए फायदेमंद हो सकती हैं, जबकि महायुति को भायखला में चुनौती मिल सकती है। सवाल ये है - क्या 'डैडी' का जादू 90 के दशक की तरह फिर चलेगा, या ये सिर्फ पुरानी यादों का शोर है? आप क्या सोचते हैं? कमेंट बॉक्स में बताएं...
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