पायलट का वशीकरण करवाया, PA साथ क्यों नहीं गया? अजित पवार की प्लेन क्रैश पर NCP ने उठाए गंभीर सवाल, मचा बवाल
Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की प्लेन क्रैश में निधन के 10 दिन बाद एक बार फि कुछ नेताओं ने ऐसे सवाल किए है, जिसके बाद साजिश की आशंका खड़ी कर दी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के कुछ नेताओं ने इस कथित घटना को सामान्य दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए गंभीर संदेह जताया है।
सांसद बजरंग सोनवणे ने यह सवाल उठाया कि अगर विमान हादसा था तो उसकी परिस्थितियां असामान्य क्यों बताई जा रही हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह आरोप नहीं बल्कि संदेह है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

NCP सांसद का दावा- अजित दादा के प्लेन में बम था जो फट गया
गौरतलब है कि अजित पवार को मुंबई से बारामती ले जा रहा विमान 28 जनवरी को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें सवार सभी लोग मारे गए। इस घटना के बाद कई 'सिद्धांत' सामने आने लगे हैं। एनसीपी (शरद पवार समूह) के सांसद बजरंग सोनवणे ने तो यहां तक आशंका जताई कि विमान में बम था और वह हवा में ही फट गया।
एनसीपी विधायक ने कहा- 'पायलट का वशीकरण करवाया गया होगा'
रविवार को मीडिया से बात करते हुए एनसीपी विधायक अमोल मिटकरी ने पायलट को लेकर चौंकाने वाली बात कही। उन्होंने पायलट सुमित कपूर के 'वशीकरण' की संभावना जताई गई। मिटकरी ने इसे 'वशीकरण आतंकवादी' हादसा बताते हुए इसमें आत्मघाती हमलावर की भूमिका पर संदेह व्यक्त किया। राजीव गांधी और अजमल कसाब के मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कई आतंकी हमलों में ऐसे ही 'वशीकरण' का इस्तेमाल होता है।
प्रतिबंधित प्लेन का 'अजित दादा' की यात्रा के लिए क्यों भेजा गया?
मिटकरी ने विमान संचालन से जुड़ी कंपनी और पायलट की भूमिका पर सवाल खड़े किए। अमोल मिटकरी ने विमानन कंपनी वीएसआर पर तीखे आरोप लगाए। जिस प्लेन पर पहले से ही प्रतिबंध था, फिर भी 28 जनवरी को 'अजित दादा' की यात्रा के लिए उसी प्लेन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या 50 करोड़ रुपये के बीमा के लालच में बीमा कंपनी ने पायलट को ऐसा करने के लिए उकसाया होगा।
पायलट ने 'मेडे कॉल' क्यों नहीं किया?
मिटकरी ने यह भी पूछा कि कंपनी ने पिछले साल दिसंबर में ही प्रत्येक पायलट के लिए 50 करोड़ रुपये का बीमा क्यों कराया था। मिटकरी ने यह भी पूछा कि कथित आपात स्थिति में पायलट की ओर से 'मेडे कॉल' क्यों नहीं किया गया। इन सभी संदेहों और आशंकाओं को जोड़ते हुए, मिटकरी ने जोर दिया कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश है।

मिटकरी के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा और तेज़ हो गई। उन्होंने इस पूरे मामले को साधारण तकनीकी चूक से आगे बताते हुए मानसिक दबाव या किसी साजिश की संभावना की जांच की मांग की। हालांकि उनके इन बयानों पर पार्टी के ही कुछ नेताओं ने संयम बरतने की सलाह दी है।

अजित पवार का पीए क्यों साथ नहीं गया?
इस बीच सांसद बजरंग सोनवणे ने अजित पवार के निजी सहायक यानी पीएम की अनुपस्थिति को भी संदेह के दायरे में बताया और कहा कि ऐसे सभी पहलुओं की गहराई से जांच होनी चाहिए। उन्होंने गृह मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सरकार की ओर से कहा गया है कि सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानों में फैल रही अफवाहों को गंभीरता से लिया जा रहा है और तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी तरह की गलत सूचना या भ्रम फैलाने वालों पर सख्त नज़र रखी जाएगी।












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